Bihar Politics: लालू के दावत-ए-इफ्तार में नहीं दिखे कांग्रेस के दिग्गज, सहनी भी नदारद, क्या पक रही अलग खिचड़ी
RJD Lalu Yadav Iftar Party Bihar Politics: बिहार में राजनेताओं के दावत-ए-इफ्तार ने बदले हुए सियासी समीकरण पर नई बहस छेड़ दी है। पटना में राजद ने लालू यादव के नाम इफ्तार पार्टी आयोजन किया। दावत में पूर्व मुख्यमंत्री नेता विपक्ष तेजस्वी यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी समेत राजद के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे।
राजद की इफ्तार पार्टी और दिग्गज कांग्रेसी नेताओं की मौजूदगी नहीं, वहीं VIP प्रमुख मुकेश सहनी भी गैर हाज़िर रहे। इस पर सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है कि क्या महागठबंधन में अलग खिचड़ी पक रही है। इस समीकरण को भी समझेंगे, उससे पहले बिहार में हुई इफ्तार डिप्लोमेसी ने किस तरह सियासी फिज़ा बदली है उस पर नज़र डालते हैं।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लालू प्रसाद यादव द्वारा दी गई इफ्तार पार्टी ने ज़ोरदार झटका दिया है, क्योंकि लालू के दावत-ए-इफ्तार में विभिन्न मुस्लिम संगठनों के बड़े चेहरे शामिल हुए। वहीं सीएम नीतीश कुमार के इफ्तार पार्टी का मुस्लिम संगठनो ने बहिष्कार कर दिया।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी LJPR कार्यालय पटना में इफ्तार पार्टी आयोजिन किया। इसमें सीएम नीतीश कुमार समेत एनडीए के कई दिग्गज नेताओं ने शिरकत की। वही मुस्लिम धार्मिक संगठनों दावत-ए-इफ्तार को कबूल नहीं किया। इससे तो यह रुख साफ हो गया है कि आगामी चुनाव में एनडीए के घटक दलों में शामिल JDU और LJPR से मुस्लिम वोट बैंक खिसक चुका है।
NDA के घटक दलों से मुस्लिम वोट ने किनारा तो कर लिया है, वहीं महागठबंधन में कोल्ड वार जैसी स्थिति पैदा हो गई है।राजद नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी के सरकारी आवास पर हुई इफ्तार पार्टी में लालू, राबड़ी के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने शिरकत की।
सूरजभान सिंह भी नज़र आए और भी कई नामचीन हस्तियां शामिल हुईं। कांग्रेस नेता और मुकेश सहनी की गैरमौजूदगी ने महागठबंधन के भीतर चल रही खटास को हवा दे दी है। जबकि महागठंबधन के सभी प्रमुख चेहरे को इफ्तार पार्टी के लिए आमंत्रित किया गया था।
कांग्रेस नेताओं के शामिल नहीं होने पर सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि बिहार की सियासत में मुस्लिम वोट बैंक के साथ नए समीकरण तैयार हो सकते हैं। अंदर खाने राजद और कांग्रेस के बीच मतभेद है, क्योंकि बिहार में कांग्रेस ने परिवर्तन सिर्फ राजद पर प्रेशर बनाने के लिए किया है।
कांग्रेस ने कन्हैया को आगे किया ताकि तेजस्वी का युवाओं में कद कम हो सके। इन्हीं सब को लेकर यह चर्चा है कि अगर कांग्रेस और राजद गठबंधन से अलग राह बनाती है तो कांग्रेस तीसरा मोर्चा तैयार कर सकती है। इस मोर्चे में मुकेश सहनी और पशुपति पारस की पार्टी को जगह मिल सकती है।












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