'मुझे अपने पिता पर गर्व है', पाक गोलीबारी में शहीद BSF सब-इंस्पेक्टर इम्तियाज को बेटे ने दी नम आंखों से विदाई
BSF Sub Inspector Imtiaz Martyr Funeral: 10 मई की सुबह 5:30 बजे, इमरान रजा ने अपने पिता बीएसएफ सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद इम्तियाज से आखिरी बार बात की थी। उस वक्त उन्हें क्या पता था कि यह उनकी अंतिम बातचीत होगी। उसी शाम, जम्मू-कश्मीर के आरएस पुरा सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से हुई गोलीबारी में इम्तियाज शहीद हो गए।
सोमवार, 12 मई को जब पटना एयरपोर्ट पर उनका पार्थिव शरीर पहुंचा, इमरान शांत खड़े रहे। उन्होंने कहा, 'मुझे अपने पिता पर गर्व है। मैं देश के लिए जान कुर्बान करने वाले हर सैनिक को सलाम करता हूं।'

आखिरी बार बात सुबह 5:30 बजे...
सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद इम्तियाज, बीएसएफ की 148वीं बटालियन में तैनात थे। 10 मई को आरएस पुरा सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से की गई सीमा पार गोलीबारी में वे शहीद हो गए। बताया गया कि उनके दाहिने पैर में गोली लगी थी, लेकिन वे मोर्चे पर डटे रहे।
10 मई की सुबह, इमरान की अपने पिता से आखिरी बातचीत हुई थी। उन्होंने बताया, 'पापा ने कहा था कि दाहिने पैर में थोड़ी चोट है... लेकिन सब ठीक है।' उन्हें क्या पता था, वही आवाज उनकी ज़िंदगी की आखिरी याद बन जाएगी।
पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
- स्थान: नारायणपुर, जिला सारण, बिहार
- समारोह: पटना एयरपोर्ट पर गार्ड ऑफ ऑनर और पुष्पांजलि
- उपस्थित नेता: बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल, मंत्री और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों सहित कई राजनीतिक नेता और अधिकारी उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए एयरपोर्ट पर मौजूद थे।
शहीद इम्तियाज का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में किया गया। बिहार के जनप्रतिनिधियों और जनता ने एक सुर में कहा - 'देश इम्तियाज की कुर्बानी को कभी नहीं भूलेगा।'
गांव तक पहुंची गूंज - 'वो अब भी हमारे दिलों में ज़िंदा हैं'
सारण जिले के नारायणपुर गांव में जब उनका पार्थिव शरीर पहुंचा, तो हर आंख नम हो गई। चारों ओर एक ही आवाज थी - 'शहीद इम्तियाज अमर रहें...।' उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। जवानों ने सलामी दी और देश ने अपने सच्चे सपूत को आखिरी विदाई दी।
इमरान की अपील - 'पाकिस्तान को अब सबक सिखाना होगा'
जब पत्रकारों ने पूछा कि वो इस हालात पर क्या कहना चाहते हैं, इमरान ने कहा, 'सरकार को ऐसा जवाब देना चाहिए कि फिर किसी बेटे को अपने पिता को खोने का दर्द न झेलना पड़े।' उनकी आंखों में न आंसू थे, न शिकायत - बस एक सच्चे सिपाही के बेटे का साहस और स्वाभिमान था।
एक फौजी की विरासत, एक बेटे की कसम
बीएसएफ सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद इम्तियाज अब भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी बहादुरी की कहानी हर गांव, हर शहर में गूंज रही है। और उनका बेटा इमरान... अपने पिता की विरासत को सीने में लिए खड़ा है - एक नई उम्मीद, एक नई प्रेरणा।












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