BPSC Protest: RJD,BJP और JDU के आरोपों पर Jansuraj अध्यक्ष का पलटवार, मनोज भारती ने कह दी ये बड़ी बात
Jansuraj Delegates Meeting With CS Amrit Lal: जन सुराज पार्टी के अध्यक्ष मनोज भारती ने बिहार के मुख्य सचिव अमृत लाला मीणा से मुलाकात की। यह बैठक 8 जनवरी को हुई, जिसमें प्रशांत किशोर के बिगड़ते स्वास्थ्य और BPSC छात्रों की मांगों पर चर्चा की गई।
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प्रशांत किशोर 2 जनवरी से BPSC छात्रों की मांगों को लेकर आमरण अनशन पर हैं। 6 जनवरी को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था, लेकिन उसी दिन शाम तक उन्हें जमानत मिल गई। 7 जनवरी को उनकी तबियत अचानक बिगड़ने पर उन्हें मेदांता अस्पताल के ICU में भर्ती कराया गया।

BPSC परीक्षा में अनियमितता की जांच: प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव को पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। इसमें प्रमुख मांग थी कि 70वीं BPSC परीक्षा में हुई अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और परीक्षा दोबारा आयोजित हो।
इसके अलावा, पिछले दस वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं और पेपर लीक की जांच पर श्वेत पत्र जारी करने की भी मांग की गई। मनोज भारती ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उन्होंने मुख्य सचिव से छात्रों की मांगों पर जल्द विचार करने का अनुरोध किया है।
प्रशांत किशोर के स्वास्थ्य के बारे में अवगत कराया: मनोज भारती ने कहा कि सरकार को प्रशांत किशोर के स्वास्थ्य के बारे में अवगत कराया गया है और छात्रों की मांगों पर विचार करने का अनुरोध किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र की जननी बिहार को लाठितंत्र बनाने वाले दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
मनोज भारती ने कहा कि एक शिष्टमंडल को मुख्यमंत्री से मिलने का प्रयास किया जाए ताकि प्रशांत किशोर अपने अनशन पर पुनर्विचार कर सकें। इस प्रतिनिधिमंडल में MLC अफाक अहमद, पूर्व सांसद सीताराम यादव, पूर्व विधायक किशोर कुमार, सेवानिवृत्त अधिकारी अरविंद ठाकुर, ललन यादव और एन.के मंडल शामिल थे।
राजनीतिक आरोपों पर प्रतिक्रिया: राजद, भाजपा और जदयू के राजनीतिक आरोपों का जवाब देते हुए मनोज भारती ने कहा कि आरोप लगाने वाले पहले सत्याग्रह करके दिखाएं जैसा प्रशांत किशोर कर रहे हैं। इसके बाद ही उनके आरोपों का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप के बजाय छात्रों की मांगों पर ध्यान देना चाहिए।
अन्य मांगों में 2015 के सात निश्चय वादे के तहत 18 से 35 वर्ष तक के बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने की बात शामिल थी। इसके अलावा, बिहार की सरकारी नौकरियों में स्थानीय युवाओं को कम से कम दो तिहाई हिस्सेदारी सुनिश्चित करने हेतु डोमिसाइल नीति लागू करने का भी आग्रह किया गया था।












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