Farming Tips: बिहार में ‘Black Potato’ के बाद अब ‘Black Turmeric’ की खेती,किसी भी सीज़न में उगा सकते हैं किसान

Black Turmeric Farming In Bihar: बिहार के किसान पारंपरिक खेती से अलग हटकर खेती में नया प्रयोग कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

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Black Turmeric Farming In Gaya: बिहार के किसान खेती में नये-नये प्रयोग कर पारंपरिक खेती से अलग खेती कर अपनी अलह पहचान बना रहे हैं। बिहार के गया में काले आलू की कामयाब खेती के बादल अब काली हल्दी की खेती पर ज़ोर दिया जा रहा है। गया में काले आलू की खेती के बाद मार्केट में काफी डिमांड है। इसलिए अब काली हल्दी की खेती का नया प्रयोग किया जा रहा है।

गया जिला के गुलरियाचक गांव (टिकारी प्रखंड क्षेत्र) के निवासी किसान आशीष कुमार सिंह पारंपरिक खेती से अलग नया प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने डेढ एकड़ ज़मीन में काली हल्दी की खेती की है। खेती में नये-नये प्रयोग के लिए अलग पहचान रखने वाले किसान आशीष ने मध्य प्रदेश से काली हल्दी के बीच मंगवाए थे।

किसान आशीष ने करीब 2 साल से काली हल्दी की खेती कर रहे हैं, 2021 में उन्होंने गया की ज़मीन पर खाली हल्दी की खेती शुरू की थी। ग़ौरतलब है कि साल 2016 में काली हल्दी को भारतीय कृषि विभाग ने लुप्त प्राय प्रजाति की लिस्ट में शामिल कर दिया है।

काली हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीफंगल गुण पाए जाने की वजह से मार्केट में इसकी बहुत ज्यादे डिमांड है। आमतौर पर इसका इस्तेमाल दवाई बनाने के लिए किया जाता है। औषधीय गुणों के लिए पहचान रखने वाली काली हल्दी की खेती बहुत कम जगहों पर ही देखने को मिलती है।

आम हल्दी की खेती के मुकाबले काली हल्दी की खेती करने से किसानों की आमदनी में भी काफी इज़ाफा होगा। किसान आशीष कुमार सिंह ने बताया कि एक आर्टिकल पढ़ रहे थे, इसी दौरान उन्होंने काली हल्दी के बारे में जानकारी हासिल की।

आशीष ने काली हल्दी की खेती करने के पीछे की वजह उसकी विलुप्त प्राय प्रजाति होना बताया। उन्होंन कहा कि विलुप्त प्रजाति होने की वजह से काली हल्दी की खेती को बढ़ाने के मकसद से उन्होंने यह नया प्रयोग किया। पिछले 2 साल से लगातर वह काली हल्दी की खेती कर रहे हैं।

मध्य प्रदेश से उन्होंने काली हल्दी के बीज मंगवाया था, क्योंकि करीब 3 हज़ार साल पहले से ही मध्य प्रदेश के आदिवासी समुदाय के लोग इस हल्दी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस हल्दी को शुभ भी मानते हैं। किसान आशीष ने बताया कि एक हल्दी का वज़न 100 ग्राम तक होता है। किसी भी सीज़न में इस हल्दी को उगा सकते हैं।

काली हल्दी के फायदे के बारे में बात की जाए तो पीली हल्दी के मुकाबले काली हल्दी में 20 गुना ज़्यादा एंटीऑक्सीडेंट और एंटीफंगल गुण पाया जाता है। इस हल्दी को काटकर सूंघने पर कपूर के तरह खुशबू आती है। काली हल्दी का खाने में इस्तेमाल नहीं होता है। इसमें मौजूद औषधीय गुण की वजह से कई बीमारी ठीक हो सकती है।

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