बिहार में गरमाई शहाबुद्दीन की प्रतिमा पर सियासत, मांझी के बयान से चढ़ा सियासी पारा
बिहार में एक बार फिर शहाबुद्दीन के नाम पर सियासत गर्मा गई है। 1 मई 2021 को शहाबुद्दीन की मौत पर बिहार काफ़ी सियासी ड्रामा देखने को मिला था। अब शहाबुद्दीन की पुण्यतिथि पर बिहार का सियासी पारा चढ़ गया है।
पटना, 2 मई 2022। बिहार में एक बार फिर शहाबुद्दीन के नाम पर सियासत गर्मा गई है। 1 मई 2021 को शहाबुद्दीन की मौत पर बिहार काफ़ी सियासी ड्रामा देखने को मिला था। अब शहाबुद्दीन की पुण्यतिथि पर बिहार का सियासी पारा चढ़ गया है। आपको बता दें कि कि सीवान के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन का निधन दिल्ली के अस्पताल में हुआ था। जिसके बाद उन्हें दिल्ली के ही कब्रिस्तान में दफना दिया गया। शहाबुद्दीन को दिल्ली में दफनाने के बाद सियासी सगर्मियां बढ़ गई थी लेकिन कोरोना काल की वजह से मामले को ज़्यादा हवा नहीं मिल पाई थी। लेकिन अब उनकी पुण्यतिथि पर बिहार के सत्तारूढ़ दल 'हम' ने पुराने मुद्दे को फिर से हवा दे दी है। हम के दिग्गज नेता जीतन राम मांझी के बयान के सियासी पारा पूरी तरह से चढ़ चुका है।

सीवान में पूर्व सांसद की प्रतिमा लगाने की मांग
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने शहाबुद्दीन को सीवान के विकास की पहचान बताते हुए उनकी प्रतिमा लगाने की मांग की है। आपको बता दें कि शहाबुद्दीन की पुण्यतिथि पर जीतन राम मांझी ने बिहार सरकार से शहाबुद्दीन की प्रतिमा लगाने की मांग की थी। जीतन राम मांझी ने ट्वीट कर लिखा कि 'सीवान के विकास की पहचान, अपनी बेबाकी की वजह से करोड़ों दिलों पर आज भी राज करने वाले पूर्व सांसद मरहूम डॉक्टर मोहम्मद शहाबुद्दीन साहब की प्रथम पुण्यतिथि पर सादर नमन। हर कोई शहाबुद्दीन नहीं हो सकता, बिहार सरकार से मैं सीवान में पूर्व सांसद की प्रतिमा लगाने की मांग करता हूं।

जीतन राम मांझी के बयान पर चढ़ा सियासी पारा
जीतन राम मांझी के इस बयान पर सियासी पारा पूरी तरह से चढ़ चुका है। कुछ नेता मांझी के समर्थने में बयान दे रहे हैं तो कुछ नेता मांझी के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी कर रहे हैं। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने मांझी के बयान पर एतराज़ जताते हुए कहा कि चंदा बाबू के बेटों को तेज़ाब से नहला दिया गया था ये नहीं भूलना चाहिए। शहाबुद्दीन राष्ट्रीय जनता दल से ताल्लुक रखते थे और जीतन राम माझी (हम) के साथ-साथ सत्तारूढ़ दल के सहाय़क नेता हैं। इस वजह से एनडीए गठबंधन के नेता भी अपना पाला बचाते हुए बयानबाज़ी कर रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि सीवान में शहाबुद्दीन के नाम पर अभी भी सियासी समीकरण बदलते देर नहीं लगती है। ऐसे में ज़्यादातर नेता बच बचा कर ही बयानबाज़ी कर रहे हैं।

भाजपा ने शहाबुद्दीन के आतंक के खिलाफ़ जंग लड़ी है- संतोष
जीतन राम मांझी के बयान पर भाजपा नेताओं ने ज़्यादा आपत्ति दर्ज की है। वहीं मांझी की पार्टी हिदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रधान सचिव ने भी शहाबुद्दीन के नाम पर तारीफ़ों के पुल ही बांधे हैं। दानिश रिज़वान (प्रधान सचिव, हम) ने कहा कि पूरे बिहार के लोग शहाबुद्दीन को विकास पुरुष के तौर पर आज भ याद करते हैं। सीवान में विकास की वजह से आज भी शहाबुद्दीन करोड़ों दिलों पर राज करते हैं। इसलिए हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा की बिहार सरकार से मांग है कि सीवान में शहाबुद्दीन साहब की प्रतिमा लगाई जाए। इसी बयान पर भाजपा नेता ने संतोष पाठक ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि जीतन राम मांझी की क्यो सोच है यह वह जानें लेकिन भाजपा ने सीवान में शहाबुद्दीन के आतंक और उसके खिलाफ जंग लड़ी है। भाजपा को यह किसी भी हाल में मज़ूर नहीं होगा कि बाहुबली नेता शहाबुद्दीन की आदमकद प्रतिमा सीवान के अंदर लगे। लोगों को शायद अब चंदा बाबू का केस याद नहीं है जिनके बेटों को तेज़ाब से नहला दिया गया था। शहाबुद्दीन की प्रतिमा लगने के पक्ष में भाजपा कभी भी नहीं आएगी।
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