बिहार में लगे झटके के बाद भाजपा तैयार कर रही UP मॉडल, क्या हो पाएगी कामयाब ?
बिहार में जो हुआ वह भाजपा के लिए के लिए सही नहीं है, लेकिन गठबंधन टूटने के बाद भाजपा इसे अवसर के तौर पर कैश कराने की तैयारी में जुट गई है।
पटना, 10 अगस्त 2022। बिहार में एनडीए गठबंधन से किनार करते हुए नीतीश कुमार ने भाजपा को तगड़ा झटका दिया है। प्रदेश में सियासी समीकरण बदलने के बाद अब भाजपा 'यूपी मॉडल' की तर्ज़ पर बिहार में सियासी ज़मीन मज़बूत करने में जुट गई है। नीतीश कुमार एनडीए गठबंधन का हिस्सा थे तो भाजपा खुलकर अपने अजेंडे पर काम नहीं कर पा रही थी, लेकिन अब भाजपा को खुली छूट मिल चुकी है कि वह अपने मुताबिक सियासी पकड़ मज़बूत करे। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ है कि जिस तरह यूपी में भाजपा ने क्षेत्रीय पार्टियों के प्रभाव को कम कर दिया अब बिहार में भी वही रणनीति के तहत आगामी चुनाव की रणनीति तैयार की जएगी।

अपने अजेंडे के साथ जनाधार बनाने की कोशिश
बिहार में जो हुआ वह भाजपा के लिए के लिए सही नहीं है, लेकिन गठबंधन टूटने के बाद भाजपा इसे अवसर के तौर पर कैश कराने की तैयारी में जुट गई है। आगामी चुनाव के लिए भाजपा अपने अजेंडे पर चुनावी मैदान तैयार करेगी। भारतीय जनता पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनाव में सभी क्षेत्रीय सियासी दलों से अच्छा प्रदर्शन किया था। जिसके बाद से ही बिहार में लगातार भाजपा अपने पैर पसारने लगी और पार्टी का जनाधार भी बढ़ने लगा। नीतीश कुमार की वजह से कई मुद्दे पर भाजपा को खामोशी एख्तियार करना पड़ जाता था।

भाजपा ने शुरू में ही खेल दिया था मास्टरस्ट्रोक
भाजपा बिहार में अपनी ज़मीन मजबूत करते हुए शुरु से ही सियासी चाल चल रही थी। इसमें कोई दो राय नहीं है। 2020 विधानसभा चुनाव में जिस तरह से मंत्रिमंडल का गठन किया गया था। उससे बिहार में भाजपा की सियासी ज़मीन मजबूत होने की नींव पड़ चुकी थी। अतिपिछड़ी जाति से ताल्लुक रखने वली वाली रेणु देवी को उप मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने मास्टरस्ट्रोक खेल दिया था। आगामी चुनाव में भाजपा इस पूरी तरह से कैश कराने की कोशिश भी करेगी। हाल ही में भाजपा की तरफ़ से तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में जेपी नड्डा (पार्टी अध्यक्ष) और अमित शाह (केंद्रीय गृहमंत्री) ने शिरकत की थी। इस दौरान बिहार की राजधानी पटना में भाजपा के होर्डिग्स ने जनता दल युनाईटेड के होश उड़ा दिए थे। हर तरफ भाजपा के चर्चे से जदयू नेता असहज महसूस कर रहे थे।

बिहार में स्वतंत्र चुनाव लड़ने की तैयारी
भारतीय जनता पार्टी अब बिहार में स्वतंत्र होकर आगामी लोकसभा और विधानसभा के अजेंडे तय कर सकेगी। भाजपा अब राजग और महागठबंधन की तुलना करते हुए जनता के पास अपनी बात रखेगी। इसी के तहत डोर टू डोर कार्यकर्ता भी भाजपा की ज़मीन मजबूत करने में जुटेंगे। भाजपा नेता लगातार इस मुद्दे को कैश कराने में जुटे हुए हैं कि एनडीए से नीतीश कुमार ने गठबंधन तोड़ा है। भाजपा तो अपने हर बयान में यह साफ़ करती रही है कि बिहार में एनडीए नीतीश कुमार की अध्यक्षता में आगामी सभी चुनाव लड़ेगी। इसके बावजूद नीतीश कुमार ने भाजपा को धोखे में रखा।

क्या केंद्रीय योजनाओं मिलेगा लाभ ?
बिहार में डबल इंजन की सरकार से विकास की राहें खुली थी, उद्योग जगत में एक क्रांति आई थी। पिछले दो सालों का आंकड़ा देखा जाए तो प्रदेश में विकास की ओर अग्रसर हुआ था। राज्य में उद्योग लगने की वजह से युवाओं के लिए रोज़गार पैदा हुए, लाखों बेरोज़गारों को रोज़गार मिला। इस बात को नीतीश कुमार ने भी माना था। बिहार में कई केंद्रीय योजनाएं परवान चढ़ी थी लेकिन अब हाला बदल गए। बिहार में सरकार बदल गई भले ही सीएम नीतीश कुमार ही रहेंगे लेकिन अब केंद्रीय योजना को कितना अमली जामा पहनाया जाता है, यह देखने वाली बात होगी। वहीं अगर केंद्र की योजना बिहार में परवान नहीं चढ़ेगी तो क्या भाजपा बिहार में कामयाब हो पाएगी, क्योंकि मबागठबंधन केंद्र की भाजपा सरकार का हवाला देते हुए केंद्र की योजना को अमलीजामा नहीं पहनाने का आरोप तो लगाएगी।
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