बिहारः महादलित युवाओं के विकास घोटाले मामले में सभी आरोपित IAS के खिलाफ दूसरी FIR दर्ज, 17 करोड़ का हुआ गबन

पटना। बिहार के सतर्कता जांच ब्यूरो ने बिहार महादलित विकास मिशन घोटाले में कथित तौर पर शामिल होने के लिए साल 1991 बैच के सेवारत आईएएस अधिकारी एमवी राजू, तीन सेवानिवृत आईएएस अधिकारियों के साथ-साथ 6 अन्य लोगों के खिलाफ दूसरी प्राथमिकी दर्ज की गई है। सतर्कता जांच ब्यूरो के निरीक्षक संजीव कुमार के बयान के आधार पर आईएएस अधिकारी एसएम राजू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

Bihar vigillance registered fir against ips officers in case of scam of soft skill training

इनके साथ-साथ बीएमवीएम निदेशक राघवेंद्र झा, राज नारायण लाल, रामाशीष पासवान, देबजानी कर, तत्कालीन मिशन के राज्य कार्यक्रम निदेश अनिल कुमार सिन्हा ( ओएसडी ), शशि भूषण सिंह ( को-ऑर्डिनेटर ), हरेंद्र श्रीवास्तव ( ओएसडी ), बीरेंद्र चौधरी ( सहायक निदेशक ) और डॉ. बीरबल ढा ( निदेशक, ब्रिटिश लिंगुआ ) के नाम भी शामिल हैं।

बीएमवीएम यानी कि बिहार महादलित विकास मिशन के लिए जारी 17 करोड़ रुपये का गबन किया था जो कि मूल रूप से महादलित युवाओं के उत्थान के लिए था। मिशन साल 2010 में लागू हुआ और यह घोटाला साल 2016 तक जारी रहा। दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक साल 2011 में 4 अक्टूबर को बीएमवीएम ने महादलित युवाओं को एमएस ऑफिस, टैली बोली जाने वाली अंग्रजी और अन्य पाठ्यक्रमों सहित 22 ट्रेडों की ट्रेनिंग के लिए एक विज्ञापन छपवाया था। इसमें केंद्र सरकार के विशेष सहायता से तत्कालीन राज्य सरकार की दशरथ मांझी कौशल विकास योजना के तहत कौशल विकास ट्रेंनिंग के लिए धन आवंटित किया गया था।

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घोटाले की जांच के दौरान वीआईबी ने पाया कि ब्रिटिश लिंग्वो के निदेशक डॉ. बीरबल झा ने बिहार महादलित विकास मिशन के अधिकारियों की मिलीभगत से साजिश रचकर 2012 और 2016 के वित्तीय वर्ष में फर्जी कागज जमाकर सरकार से 17 करोड़ रुपये ले लिए। वहीं जनवरी 2017 में निलंबित किए गए राजू 2003 में भी विवादों के घेरे में थे।

बिहार में तत्कालीन विपक्ष के नेता सुशील कुमार मोदी ने भ्रष्टाचार के आरोपों पर उनकी बर्खास्तगी की मांग करते हुए सरकार को सलाह दी थी कि वह कर्नाटक में अपने निलंबन के बाद जहां भी वह प्रतिनियुक्ति पर गए थे, उसे स्वीकार नहीं किया जाए।

इसके बाद साल 2016 में दिसंबर माह में विजिलेंस ब्यूरो ने आईएएस अधिकारी राजू समेत 15 अन्य अधिकारियों के खिलाफ बिहार के बाहर तकनीकी शिक्षा लेने वाले एससी व एसटी छात्रों के लिए मैट्रिक छात्रवृत्ति वितरण में कथित अनियमितता के लिए केस दर्ज किया था। दर्ज एफआईआर में वीआईबी ने खुलासा किया कि योजना के तहत बीएमवीएम ने दावा किया कि उसने 14,826 छात्रों को प्रशिक्षित किया था।

जांच के दौरान यह सामने आया कि जिन छात्रों का नाम फर्मों की सूची में था, वे ऐसे उम्मीदवार थे, जिन्हें प्रशिक्षण और प्रमाणन कभी दिया ही नहीं गया था। ऐसे युवाओं ने एक लिखित बयान दिया था कि वे कभी भी इस तरह के प्रशिक्षण में नहीं गए थे। इसके अलावा जांच में ब्यूरो ने पाया कि अधिकांश छात्रों ने एक ही सत्र और अवधि के दौरान अलग-अलग ट्रेड में हिस्सा लिया था।

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