Bihar Flood News Update: बाढ़ का क़हर, गंगा का उफान, 12 लाख से अधिक लोग प्रभावित, 19 की मौत

Bihar Flood News Update: बिहार में बाढ़ का क़हर जारी है, गंगा और उसकी सहायक नदियों के बढ़ते जलस्तर ने प्रदेश के कई जिलों में तबाही मचा दी है। पानी का उफान न सिर्फ खेत-खलिहानों को डुबो रहा है, बल्कि लोगों के घर, सड़कों और उम्मीदों को भी निगल रहा है।

रविवार को भागलपुर के नए निचले इलाकों तक गंगा का पानी पहुंच गया, यहां तक कि विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में भी पानी भर गया। पटना के दियारा इलाके में सड़क संपर्क टूट चुका है, जबकि नालंदा और बेगूसराय के कई गांव बाढ़ की गिरफ्त में हैं।

Bihar Flood News Update

अब तक 19 लोगों की मौत
राज्यभर में बाढ़ के पानी में डूबने से रविवार को 19 लोगों की मौत हो गई। इनमें बेगूसराय के आठ, भागलपुर, सीवान, भोजपुर और खगड़िया के दो-दो, जबकि मुंगेर, वैशाली और कटिहार के एक-एक लोग शामिल हैं। भागलपुर में डूबने वालों में सुपौल से आए एक कांवरिया और पीरपैंती की 12 वर्षीय बच्ची थीं।

8 जिलों की 12.58 लाख आबादी प्रभावित
खगड़िया में 88 वर्षीय बुजुर्ग और कटिहार में 65 वर्षीय वृद्ध की मौत ने गांवों में मातम फैला दिया। बेगूसराय में मां-बेटी समेत आठ लोगों की जान चली गई। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, 230 पंचायतों में 12 लाख 58 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। राहत कार्य के लिए 1000 से अधिक नावें चल रही हैं।

पटना में 1.85 लाख, भोजपुर में 1.68 लाख, वैशाली में 1.67 लाख, भागलपुर में 2.37 लाख, मुंगेर में 1.26 लाख, बेगूसराय में 3.15 लाख और सारण में 38 हजार लोग प्रभावित हैं। एसडीआरएफ की 22 और एनडीआरएफ की 10 टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं।

गंगा समेत तमाम नदियां खतरे के निशान से ऊपर
बक्सर से भागलपुर तक गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है। कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, अघवारा, पुनपुन, सोन, कमला बलान, भूतही बलान, महानंदा और घाघरा भी उफान पर हैं। तटबंधों पर दबाव बढ़ गया है और जल संसाधन विभाग लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है।

सड़कें डूबीं, गांव कटे, खतरा बढ़ा
भागलपुर, खगड़िया और मुंगेर में बाढ़ के पानी ने ग्रामीण और शहरी इलाकों का संपर्क तोड़ दिया है। एनएच-80 समेत कई सड़कें जलमग्न हो गई हैं। पीरपैंती, कहलगांव और सबौर में स्थिति ज्यादा गंभीर है। नाथनगर प्रखंड के सात पंचायतों में तो हालात इतने बिगड़े कि राहत शिविर जाते वक्त सात लोगों को एक बड़े घड़ियाल ने काट लिया, जिससे दहशत फैल गई है।

मानवता की सबसे बड़ी परीक्षा
बिहार की बाढ़ सिर्फ जलस्तर का संकट नहीं, बल्कि जिंदगी, जीविका और जीने की उम्मीदों का भी संघर्ष है। लाखों लोग खुले आसमान के नीचे, नावों और राहत शिविरों में ठिठुरते हुए आने वाले कल का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन की टीमें दिन-रात काम कर रही हैं, लेकिन नदी का रौद्र रूप थमने का नाम नहीं ले रहा। इस आपदा ने एक बार फिर हमें याद दिलाया है कि प्रकृति के सामने इंसान कितना असहाय हो सकता है, और यह कि राहत सिर्फ नावों और राशन से नहीं, बल्कि हर हाथ के आगे बढ़ने से आती है।

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