बिहार का पहला एरोपोनिक और हाइड्रोपोनिक यूनिट इस ज़िले में हो रहा तैयार, जानिए खासियत
Bihar Farming News: बिहार के किसान खेती में नए-नए प्रयोग कर काफी मुनाफा कमा रहे हैं। वहीं अब सरकार भी किसानों के बहतेर मुनाफे के लिए कदम उठा रही है।

Bihar Farming Tips: बिहार में कई युवा किसान परंपरागत खेती से अलग हटकर खेती में नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही वह अच्छा मुनाफा भी कमा रहे हैं। इसी कड़ी में सरकार भी किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए पहल कर रही है।
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बिहार का पहला एरोपोनिक और हाइड्रोपोनिक यूनिट नालंदा जिले में लगने जा रहा है। विभाग की तरफ़ से भी परंपरागत खेती से अलग हटकर खेती के लिए नए-एन प्रयोग किये जा रहे हैं। ताकि परीक्षण कामयाब हुआ तो किसानों को भी इसका फायदा मिले।
पानी के ऊपर सब्ज़ी की खेती के नए तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। अगर परीक्षण कामयाब हुआ तो किसान भी अपने खेतों में नई तकनीक से खेती कर सकेंगे। चंडी स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल में एरोपोनिक और हाइड्रोपोनिक यूनिट स्थापित की जा रही है।
आलू की खेती के लिए एरोपोनिक यूनिट तैयार किया जा रहा है, इसके ज़रिए हवा में खेती को बढ़ावा मिलेगा। वही हाइड्रोपोनिक यूनिट के ज़रिए पानी के ऊपर बेमौसम महंगी सब्जी की खेती की जाएगी। दोनों यूनिट को स्थापित करने में करीब 5 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
सहायक निदेशक उद्यान डॉ. अभय कुमार गौरव की मानें तो एरोपोनिक यूनिट तैयार होने में अभी वक्त लगेगा। वहीं हाइड्रोपोनिक यूनिट तैयार हो चुका है। फ्रेम तैयार कर उसमें पौधा लगाने की तैयारी की जा रही है। इस तकनीक में फ्रेम के उपर पौधा रहेगा और नीचे से पानी बहेगी।
पौधे में ज़रूरत के हिसाब से उपर और नीचे से पोषक तत्व दिया जाएगा। इस विधि के ज़रिए किसी भी मौसम में कोई भी सब्जी उगा कर किसान आमदनी कर सकते हैं। हाइड्रोपोनिक यूनिट का ट्रायल कामयाब होने पर किसानों को ट्रेनिंग दी जाएगी।
हाइड्रोपोनिक यूनिट में ट्रायल के लिए लैट्यूस, तुलसी, पार्सले, केल, थाइम, धनिया जैसे सलाद में इस्तेमाल होने के अलावा 5 हज़ार पौधे तैयार किए जा रहे हैं। अगले महीने से हाइड्रोपोनिक यूनिट में इन पौधों को लगाकर ट्रायल किया जाएगा।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में आलू बीज उत्पादन के साथ ही बेमौसमी सब्ज़ी की खेती के लिए भी प्रोडक्शन यूनिट स्थापित किया जा रहा है। हाइड्रोपोनिक सिस्टम के ज़रिए किसी भी मौसम में स्ट्रॉवेरी, केल, लेट्यूस जैसी मंहगे सब्जी और फल की खेती आसानी से हो सकेगी। बेमौसम मिलने वाले फल और सब्जी की कीमत ज्यादा होती है, इस तकनीक से किसानों को फायदा होगा।












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