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Bihar Chunav 2025: तेजस्वी यादव को 16 अगस्त तक जमा करना होगा अपना EPIC, चुनाव आयोग ने क्यों दिया अल्टीमेटम?

Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले सियासी घमासान अपने चरम पर है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। पटना के निर्वाचन अधिकारी ने तेजस्वी को नोटिस भेजकर 16 अगस्त 2025 तक अपना वोटर आईडी (EPIC) जमा करने का अल्टीमेटम दिया है।

नोटिस में दावा किया गया है कि तेजस्वी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिस EPIC नंबर को दिखाया, वह फर्जी हो सकता है। यह मामला बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और वोटर लिस्ट विवाद के बीच और गर्माता जा रहा है। आइए, जानते हैं इस सियासी ड्रामे की पूरी कहानी...

Bihar Elections 2025

क्या है विवाद?

तेजस्वी यादव ने 2 अगस्त 2025 को पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सनसनीखेज दावा किया था कि उनका नाम बिहार की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। उन्होंने EPIC नंबर RAB2916120 दिखाते हुए कहा कि चुनाव आयोग की वेबसाइट पर इसे सर्च करने पर 'No Records Found' का मैसेज आया। तेजस्वी ने इसे सियासी साजिश करार देते हुए आरोप लगाया कि उनके जैसे बड़े नेता का नाम अगर वोटर लिस्ट से हट सकता है, तो आम लोगों का क्या हाल होगा?

हालांकि, चुनाव आयोग ने तुरंत पलटवार करते हुए तेजस्वी के दावे को खारिज कर दिया। आयोग ने वोटर लिस्ट का वह पेज सार्वजनिक किया, जिसमें तेजस्वी का नाम EPIC नंबर RAB0456228 के साथ दीघा विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र संख्या 204 (बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पुस्तकालय भवन) में क्रमांक 416 पर दर्ज है। आयोग ने साफ किया कि तेजस्वी का नाम लिस्ट में मौजूद है और उनका दूसरा EPIC नंबर रिकॉर्ड में नहीं मिला।

दो EPIC नंबर का रहस्य क्या?

विवाद तब और गहरा गया, जब पता चला कि तेजस्वी के नाम पर दो EPIC नंबर-RAB0456228 (2020 के विधानसभा चुनाव में नामांकन के हलफनामे में दर्ज) और RAB2916120 (प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाया गया)-सामने आए। पटना के जिला निर्वाचन अधिकारी और डीएम डॉ. थियागराजन एस.एम. ने कहा कि दूसरा EPIC नंबर आयोग के रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं है। इसे लेकर आयोग ने तेजस्वी को 8 अगस्त 2025 को पहला नोटिस भेजा, जिसका जवाब न मिलने पर दूसरा नोटिस जारी किया गया।

8 अगस्त को जारी नोटिस में निर्वाचन अधिकारी ने लिखा, 'प्रेस कॉन्फ्रेंस में आपके द्वारा दिखाया गया EPIC नंबर RAB2916120 फर्जी प्रतीत होता है। फर्जी सरकारी दस्तावेज बनाना और उसका उपयोग करना कानूनी अपराध है। आपसे अनुरोध है कि इस EPIC की कॉपी 16 अगस्त 2025, शाम 5 बजे तक हमारे कार्यालय में जमा करें।'

तेजस्वी का पलटवार

तेजस्वी ने इस नोटिस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'मुझे चुनाव आयोग से कोई नोटिस नहीं मिला, बल्कि पटना जिला प्रशासन से पत्र आया है। अगर दो EPIC नंबर जारी हुए, तो गलती चुनाव आयोग की है। मैं पिछले 10 सालों से एक ही EPIC नंबर से वोट देता आ रहा हूं। आयोग गलतियां करता है और जवाब हमसे मांगता है। मैं इसका करारा जवाब दूंगा।' तेजस्वी ने यह भी दावा किया कि बिहार में 65 लाख 64 हजार लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, खासकर यादव और मुस्लिम समुदाय के।

सियासी तड़का: विपक्ष और सत्ताधारी आमने-सामने

इस विवाद ने बिहार की सियासत को और गर्मा दिया है। बीजेपी और जेडीयू ने तेजस्वी पर निशाना साधते हुए इसे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का मौका बना लिया। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तंज कसते हुए कहा, 'तेजस्वी जी, आपका नाम ससम्मान आपके पिताजी के साथ वोटर लिस्ट में है। शायद आपको इसे खोजने में दिक्कत हो रही है।' वहीं, पप्पू यादव ने तेजस्वी का बचाव करते हुए चुनाव आयोग पर ही सवाल उठाए और इसे बीजेपी का प्रवक्ता करार दिया।

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी तेजस्वी के बयानों का समर्थन करते हुए कहा कि यह मामला वोटर लिस्ट में पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है। दूसरी ओर, आयोग ने साफ किया कि SIR प्रक्रिया का मकसद डुप्लीकेट, मृत, और गैर-निवासी मतदाताओं के नाम हटाना है। पिछले 22 साल में 22 लाख मृत वोटर, 36 लाख पलायन कर चुके लोग, और 7 लाख डुप्लीकेट नाम हटाए गए हैं।

अगर EPIC फर्जी निकला तो?

पटना के दीघा थाने में एक स्थानीय नागरिक ने तेजस्वी के खिलाफ दो EPIC नंबर रखने की शिकायत दर्ज की है। अगर दूसरा EPIC नंबर RAB2916120 फर्जी साबित होता है, तो तेजस्वी के खिलाफ FIR दर्ज हो सकती है, क्योंकि फर्जी सरकारी दस्तावेज बनाना और उसका इस्तेमाल करना भारतीय दंड संहिता की धारा 465 और 471 के तहत अपराध है। यह तेजस्वी के लिए कानूनी और सियासी दोनों मोर्चों पर बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है।

SIR प्रक्रिया और बिहार की सियासत

बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और सत्ताधारी दलों में तनातनी चल रही है। 1 अगस्त 2025 को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के बाद तेजस्वी और राहुल गांधी ने आयोग पर 'वोट चोरी' का आरोप लगाया। राहुल ने इसे 'एटम बम' सबूत का मामला बताया, लेकिन आयोग ने तेजस्वी के दावे को खारिज कर इसे कमजोर कर दिया। 1 सितंबर 2025 तक फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी, और तब तक लोग अपने नाम जुड़वा सकते हैं।

तेजस्वी के सामने क्या विकल्प?

तेजस्वी को अब 16 अगस्त 2025, शाम 5 बजे तक पटना के निर्वाचन कार्यालय में EPIC नंबर RAB2916120 की कॉपी और स्पष्टीकरण जमा करना होगा। अगर वह जवाब देने में नाकाम रहते हैं या EPIC फर्जी साबित होता है, तो यह बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले RJD के लिए बड़ा झटका हो सकता है। दूसरी ओर, तेजस्वी इस मुद्दे को सियासी हथियार बनाकर महागठबंधन को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं।

आगे क्या?

यह मामला बिहार की सियासत में नया मोड़ ला सकता है। अगर तेजस्वी इस कानूनी पचड़े से निकल पाए, तो वह इसे विपक्ष की एकजुटता के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन अगर दूसरा EPIC फर्जी साबित हुआ, तो उनकी छवि और RJD की रणनीति को बड़ा नुकसान हो सकता है। अब सभी की नजरें 16 अगस्त पर टिकी हैं, जब तेजस्वी को जवाब देना है।

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