Bihar Election 2025: बिहार का बड़ा भईया कौन? 5 पॉइंट में समझिए BJP-JDU का इंटरनल गणित!
Bihar Election 2025: बिहार की राजनीति में इस बार का चुनाव नतीजा सिर्फ सीटों की गिनती नहीं, बल्कि कई साल पुराने समीकरणों के टूटने और नए सत्ता संतुलन के उभरने की कहानी बन गया है। राज्य की राजनीति हमेशा से जटिल रही है। कभी गठबंधनों के मेल-मिलाप, तो कभी नेताओं की अदला-बदली। लेकिन इस बार जो तस्वीर उभर रही है, वह बिहार के राजनीतिक इतिहास के लिए बेहद अहम है। पहली बार बीजेपी राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है और जेडीयू दूसरे स्थान पर खिसक गई है।
ऐसे में सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठेगा, इसके लिए पूरे राज्य में चर्चा तेज हो गई है। एनडीए के अंदर भी हलचल बढ़ गई है, क्योंकि बीजेपी की बढ़त उसे सत्ता की चाबी अपने हाथ में रखने का मौका दे रही है। वहीं नीतीश कुमार की राजनीतिक पकड़ पहले जैसी मजबूत नजर नहीं आ रही, जिससे आने वाले दिनों का खेल और भी दिलचस्प हो गया है।

शाम 6 बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक बीजेपी (BJP) 90 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं जिसमें 35 सीटें भाजपा जीते चुकी है और 55 सीटों पर लीड कर रही है। जेडी(यू) (JD(U)) 83 सीटों पर आगे है जिसमें 24 सीटों के नतीजे फाइनल हो गए हैं जबकि बाकी पर बढ़त बरकरार है। आरजेडी (RJD) 26, एलजेआरपीवी (LJPRV) 19, कांग्रेस (INC) 6, एआईएमआईएम (AIMIM) 5, हम (HAM) 5 और अन्य (Others) 9 सीटों पर आगे है।
बड़ा सवाल, सीएम कौन बनेगा?
रुझानों ने सबसे अधिक चर्चा इस बात पर शुरू कर दी है कि अब मुख्यमंत्री कौन बनेगा। चुनाव प्रचार के दौरान एनडीए ने कई बार कहा कि लड़ाई नीतीश कुमार और पीएम मोदी के चेहरे पर लड़ी जा रही है, लेकिन नीतीश कुमार को आधिकारिक तौर पर सीएम उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया था। अब जब बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है, तो सवाल उठ रहा है कि क्या बीजेपी खुद अपना मुख्यमंत्री चुनेगी या फिर पुरानी परंपरा को जारी रखते हुए नीतीश कुमार को ही कमान सौंपेगी।
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सीटों का समीकरण यह साफ दिखा रहा है कि बीजेपी के पास सरकार बनाने की ताकत अपने दम पर भी लगभग है। एनडीए के अन्य दलों, चिराग पासवान की एलजेपी (आर) की 21 सीटें, जीतन राम मांझी की हम की 5 और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम की 4 सीटों को जोड़ दिया जाए तो एनडीए का आंकड़ा 121 तक पहुंच जाता है।
बिहार में बहुमत के लिए 122 सीटों की जरूरत होती है। यानी जेडीयू की बारगेनिंग पॉवर पहले की तुलना में कमजोर दिख रही है। इसके साथ ही ध्यान देने वाली बात यह भी है कि केंद्र में मोदी सरकार को नीतीश कुमार का समर्थन हासिल है, जिससे समीकरण और रोमांचक हो जाते हैं।
सहयोगी दलों की पुरानी खटास भी आई चर्चा में
चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा, तीनों ही नेताओं की नीतीश कुमार के साथ पुरानी तनातनी किसी से छिपी नहीं है। इन चुनावी नतीजों ने इस बात की चर्चा तेज कर दी है कि क्या ये तीनों नेता नीतीश के लिए किसी चुनौती का कारण बनेंगे, या फिर सरकार गठन में बीजेपी इन दलों के साथ मिलकर नया समीकरण खड़ा करेगी।
बीजेपी का सफर: 2010 से 2025 तक का बदलाव
बीजेपी ने आखिरी बार 2010 के विधानसभा चुनाव में 91 सीटें जीती थीं। उस चुनाव में जेडीयू 115 सीटों पर जीती थी और नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद संभाला था। इसके बाद 2015 में बीजेपी 53 सीटों पर सिमट गई, जबकि 2020 में उसने 74 सीटें जीतीं। 2020 के चुनाव में आरजेडी 75 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और बीजेपी दूसरे स्थान पर थी। इस बार का नतीजा बीजेपी के लिए ऐतिहासिक मोड़ है, क्योंकि वह पहली बार राज्य की सबसे बड़ी शक्ति बनकर सामने आ रही है।
अब पूरा बिहार इस बात पर नज़र लगाए बैठा है कि एनडीए किसे मुख्यमंत्री बनाता है। क्या नीतीश कुमार एक बार फिर सत्ता पर वापसी करेंगे या बीजेपी कोई नया चेहरा सामने लाएगी?
सभी दलों के बाक़ी रुझान और अंतिम नतीजे आने के बाद सत्ता का चित्र और साफ होगा, लेकिन इतना तय है कि बिहार की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है।
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