Bihar Election result 2020: शुरुआती रुझानों में JDU पर BJP भारी, नीतीश कुमार नहीं रहेंगे बड़े भाई
पटना- बिहार के चुनाव नतीजों के शुरुआती रुझानों में भाजपा सहयोगी नीतीश कुमार के जनता दल यूनाइटेड से काफी आगे निकल चुकी है। इस चुनाव में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ही अपना सीएम पद का उम्मीदवार बनाया हुआ है। रुझानों से पता चलता है कि जेडीयू के खराब प्रदर्शन के चलते एनडीए महागठबंधन से पिछड़ रहा है। बिहार में भाजपा हमेशा जदयू को अपना बड़ा भाई मानती रही है और यह एकमात्र हिंदी भाषी राज्य है, जहां अब तक कभी भी पार्टी का मुख्यमंत्री नहीं बना है। ऐसे में अगर चुनाव नतीजों का यही ट्रेंड अंतिम नतीजों में तब्दील हुआ तो नीतीश कुमार प्रदेश में भाजपा के बड़े भाई वाली हैसियत खो देंगे।

2015 में नीतीश कुमार की जदयू ने राजद और कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। उससे दो साल पहले नीतीश कुमार ने बीजेपी की ओर से नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार तय करने के बाद गठबंधन तोड़ लिया था। लेकिन, आरजेडी के साथ उनका गठबंधन ज्यादा टिकाऊ नहीं रहा और 2017 के मध्य में उन्होंने महागठबंधन वाली सरकार से इस्तीफा देकर फिर से बीजेपी का साथ पकड़ लिया और मुख्यमंत्री पद पर बने रहे। इस दौरान कई ऐसे मौके आए जब कहा गया कि भाजपा अब नीतीश कुमार को किनारे करना चाहती और अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहती है। जब चिराग पासवान ने लोजपा को एनडीए से अलग चुनाव लड़ाने की घोषणा की तब भी यही कहा जाने लगा कि चिराग बीजेपी के ही मोहरे हैं। लेकिन, बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व पूरे चुनाव के दौरान नीतीश के पीछे मजबूती से अटल रहा और यहां तक कहा था कि अगर बीजेपी ज्यादा सीटें लाई और एनडीए की जीत हुई तब भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही होंगे।
भाजपा की टॉप लीडरशिप के दावों और वादों के बावजूद चिराग पासवान ने जेडीयू के प्रदर्शन में पलीता लगाने की कोई भी कोशिश नहीं छोड़ी और कभी खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान बताया तो कभी सत्ता में आने पर नीतीश कुमार को जेल में डालने का शिगूफा छोड़ा। वह बार-बार कहते रहे कि सरकार तो बीजेपी की अगुवाई में एलजेपी के समर्थन से ही बनेगी। उन्होंने चुनावों में पीएम मोदी के लिए वोट करने की अपील की। हालांकि, इस दौरान बिहार भाजपा के प्रदेश नेता ही चिराग पर हमलावर रहे, पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व उनके खिलाफ कुछ भी कहने के लिए तैयार नहीं दिखा, सिर्फ नीतीश को ही सीएम चेहरा बताता रहा।
वैसे नीतीश कुमार के मौजूदा कार्यकाल में रोजगार, प्रवासी मजदूर, कोरोना वायरस और बाढ़ के मुद्दे पर प्रदेश भाजपा का एक धरा उनकी पार्टी जदयू से पीछा छुड़ाने की कोशिश में भी लगा रहा। लेकिन, अभी तक जो चुनाव रुझान आ रहे हैं, उससे लगता है कि असल में चिराग पासवान ने ही जेडीयू के खिलाफ उम्मीदवार उतारकर और नीतीश के खिलाफ आक्रामक प्रचार कर जेडीयू और एनडीए को ज्यादा नुकसान पहुंचाया है।












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