बिहार चुनाव में महिलाओं की अनदेखी! 15 साल में सबसे कम महिला उम्मीदवार, किस पार्टी ने कितनों को दिया टिकट
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव का माहौल अब पूरी तरह गर्म है। घोषणापत्रों और वादों की झड़ी लगी है कहीं महिलाओं के लिए "मिशन करोड़पति" की बात हो रही है, तो कहीं हर महीने 2500 रुपये देने का वादा किया जा रहा है। लेकिन जब टिकट बंटवारे की बारी आई, तो तस्वीर कुछ और ही निकली। सियासी पार्टियों के बड़े-बड़े वादों के बीच महिला उम्मीदवारों की संख्या इस बार सबसे कम दिखाई दे रही है।
महिला उम्मीदवारों की संख्या घटी, आंकड़े चौंकाने वाले
इस बार के विधानसभा चुनाव में कुल 2,615 प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें से 2,357 पुरुष हैं, जबकि सिर्फ 258 महिलाएं चुनावी मैदान में उतर रही हैं। यानी पूरे बिहार में कुल उम्मीदवारों में महिलाएं महज करीब 10% हैं। यह आंकड़ा पिछले 15 सालों में सबसे कम है।

पिछले चुनाव में जहां 370 महिलाओं को टिकट मिला था, वहीं इस बार यह संख्या घटकर 258 रह गई है। यानी बड़ी-बड़ी पार्टियां महिलाओं को लेकर जितने वादे कर रही हैं, टिकट बंटवारे में वैसा उत्साह कहीं नजर नहीं आया।
🔹 कौन सी पार्टी ने कितनी महिलाओं को दिया मौका?
अब बात करें दलों की-तो सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी महागठबंधन दोनों ही इस कसौटी पर कमजोर दिख रहे हैं।
- भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बार सिर्फ 13 महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है।
- जनता दल (यूनाइटेड) यानी JDU ने भी 13 महिलाओं को टिकट दिया है।
- दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने 23 महिला उम्मीदवारों को मौका दिया।
- कांग्रेस ने सबसे कम, यानी सिर्फ 5 महिलाओं को टिकट थमाया है।
अगर छोटे और क्षेत्रीय दलों की बात करें, तो जन सुराज ने 25, और बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने 26 महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। यानी इन दलों ने महिलाओं को मुख्यधारा की पार्टियों से कहीं ज्यादा प्रतिनिधित्व दिया है।
🔹'जीत की संभावना कम'-पार्टियों का आम जवाब
जब राजनीतिक दलों से पूछा गया कि आखिर उन्होंने महिलाओं को टिकट देने में इतनी कंजूसी क्यों की, तो लगभग सभी ने एक ही जवाब दिया-"जीत की संभावना कम थी।" हालांकि आंकड़े बताते हैं कि पिछली बार 370 महिला उम्मीदवारों में से 26 ने जीत हासिल की थी, जो करीब 7 प्रतिशत सफलता दर है। वहीं पुरुष उम्मीदवारों की सफलता दर लगभग 10 प्रतिशत रही थी। यानी जीत का अंतर बहुत बड़ा नहीं है, फिर भी महिलाओं को टिकट देने से पार्टियां झिझक रही हैं।
🔹 वादों में महिलाएं 'मुख्य केंद्र', पर टिकट में पिछड़ीं
इस चुनाव में हर दल के घोषणापत्र में महिलाओं के लिए योजनाएं और वादे भरे पड़े हैं। एनडीए ने अपने घोषणापत्र में "मिशन करोड़पति" की घोषणा की है, जिसके तहत महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने की बात कही गई है। वहीं तेजस्वी यादव ने वादा किया है कि अगर महागठबंधन की सरकार बनी, तो महिलाओं को 5 साल तक हर महीने 2500 रुपये दिए जाएंगे। लेकिन जब वही दल टिकट बांटने की बारी पर आए, तो उनके इन वादों की गंभीरता पर सवाल उठना लाजमी है।
चुनावी कैलेंडर और नतीजों की तारीख
बिहार विधानसभा चुनाव इस बार दो चरणों में होने जा रहे हैं। पहला चरण 6 नवंबर, जबकि दूसरा चरण 11 नवंबर को होगा। दोनों चरणों के नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।
बिहार की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी का मुद्दा आज भी अधूरा है। जहां मंचों पर महिला सशक्तिकरण की बातें खूब होती हैं, वहीं टिकट बंटवारे में महिलाएं अब भी 'सीमित कोटा' तक सिमटकर रह जाती हैं। 258 महिलाओं के इस चुनावी मैदान में उतरने के बावजूद, सवाल वही है-क्या बिहार की राजनीति में महिलाओं को सिर्फ वोट बैंक के रूप में देखा जा रहा है या वास्तव में उन्हें बराबरी का मौका दिया जाएगा?












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