Bihar Election 2025: बीजेपी छोड़ सकते हैं आरके सिंह? चार नेताओं के टिकट पर खुला मोर्चा, गुस्से की वजह क्या है?
Bihar Election 2025 (RK Singh): आरा से दो बार सांसद और केंद्र में सात साल मंत्री रह चुके आरके सिंह इन दिनों अपने ही दल पर हमलावर हैं। पूर्व गृह सचिव और रिटायर्ड आईएएस अफसर रहे आरके सिंह अब बीजेपी-जेडीयू के उन नेताओं को खुलकर चुनौती दे रहे हैं, जिन्हें वे अपनी हार का जिम्मेदार मानते हैं।
सवाल यह है कि आखिर इतने सीनियर नेता किस बात से नाराज हैं और किस चार नेताओं को टिकट मिलने से रोकने के लिए मैदान में उतरने की धमकी दे रहे हैं? आरा लोकसभा सीट से 2024 में हार का सामना करने वाले आरके सिंह अब तक इस हार को भूल नहीं पाए हैं। उनका आरोप है कि बीजेपी के ही कुछ स्थानीय नेताओं ने उन्हें हराने के लिए साजिश रची।

आरके सिंह ने साफ कह दिया है कि अगर इन नेताओं को 2025 विधानसभा चुनाव में टिकट मिला, तो वे खुद उनके खिलाफ प्रचार करेंगे। उनका गुस्सा सिर्फ हार तक सीमित नहीं है। सभाओं और मीडिया इंटरव्यू में वे भ्रष्टाचार और सरकार के तौर-तरीकों पर उसी अंदाज में सवाल उठा रहे हैं, जैसा जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर करते हैं।
आरके सिंह बोले- भ्रष्ट लोगों को बर्दाश्त नहीं करेंगे
आरके सिंह ने हाल ही में कहा था, "भ्रष्ट लोगों को बर्दाश्त नहीं करेंगे। चाहे अफसर हो या नेता, जो चोरी करेगा, उसका बखिया उधेड़ देंगे।"
उन्होंने सीओ, बीडीओ और यहां तक कि राशन डीलरों तक पर पैसे लेकर काम करने का आरोप लगाया।
पीएम आवास योजना में गरीबों से 20 हजार वसूले जाने का जिक्र कर सिंह ने साफ कहा कि यही वजह है कि लोग इलाज और पढ़ाई के लिए दिल्ली-मुंबई भागते हैं। उनके मुताबिक, बिहार की हालत इसलिए खराब है क्योंकि लोग जाति के नाम पर भ्रष्ट और चरित्रहीन नेताओं को वोट दे देते हैं।
निशाने पर ये चार बड़े नाम
आरके सिंह के सीधे निशाने पर बीजेपी के राघवेंद्र सिंह और अमरेंद्र प्रताप सिंह, तथा जेडीयू के भगवान सिंह कुशवाहा और राधाचरण साह हैं।
राघवेंद्र और अमरेंद्र पर आरोप है कि चुनाव में उन्होंने अंदरखाने उनके खिलाफ काम किया। जेडीयू नेता भगवान सिंह कुशवाहा पर तो कई हत्या के केस होने का जिक्र किया और कहा कि वे हमेशा विपक्ष में रहकर एनडीए को नुकसान पहुंचाते रहे हैं।
वहीं राधाचरण साह का नाम मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की गिरफ्तारी से भी जुड़ा रहा है। आरके सिंह ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और जेडीयू नेता संजय झा को इन चारों के बारे में लिखित शिकायत दी है।

आरा से हार और कुशवाहा फैक्टर
विशेषज्ञ मानते हैं कि 2024 लोकसभा चुनाव में कुशवाहा वोट बैंक ने निर्णायक भूमिका निभाई। लंबे समय से बीजेपी का मजबूत वोट माने जाने वाले इस वर्ग ने इस बार दूरी बना ली। आरके सिंह का आरोप है कि स्थानीय बीजेपी-जेडीयू नेताओं की गुटबाजी ने पूरा गणित बिगाड़ दिया।
काराकाट में पवन सिंह के मैदान में उतरने से राजपूत वोटर बंट गए, वहीं आरा में कुशवाहा वोटरों ने खुलकर आरके सिंह को सबक सिखाया। यही वजह रही कि वे हार गए और अब वे खुली नाराजगी जता रहे हैं।
पार्टी नेतृत्व पर सवाल
आरके सिंह का गुस्सा सिर्फ स्थानीय नेताओं तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने भी उन्हें चुनाव में अकेला छोड़ दिया। खुद को "लोन वॉरियर" बताते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बाहरी कहकर प्रचार से दूर किया गया।
अब वे खुले मंच से कह रहे हैं कि बीजेपी नेतृत्व भ्रष्ट और आरोपित नेताओं को बचा रहा है। उनका संदेश साफ है-अगर पार्टी ने इन्हीं लोगों को टिकट दिया तो वे बीजेपी के खिलाफ भी चुनावी मैदान में उतर सकते हैं।

क्या बीजेपी छोड़ेंगे आरके सिंह?
सवाल उठ रहा है कि क्या आरके सिंह 2025 से पहले बीजेपी छोड़ देंगे? उनका सुर दिन-ब-दिन तल्ख़ होता जा रहा है और वे खुद को पार्टी लाइन से अलग रखकर बोल रहे हैं। हालांकि अब तक उन्होंने इस्तीफे की बात नहीं कही, लेकिन उनके बयान बीजेपी हाईकमान के लिए सिरदर्द बन चुके हैं। अगर उनकी नाराजगी दूर नहीं हुई तो 2025 विधानसभा चुनाव में आरा और आसपास की सीटों पर बीजेपी को बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है।
साफ है कि आरके सिंह की नाराजगी सिर्फ टिकट वितरण तक नहीं है। यह बिहार बीजेपी और एनडीए की अंदरूनी राजनीति का वह चेहरा है, जो चुनाव नजदीक आते-आते और भी बड़ा संकट बन सकता है।












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