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Bihar Chunav 2025: राहुल गांधी की फोटो वाले सेनेटरी पैड बांटकर महिला वोटरों को लुभाना? 'पैडमैन' रणनीति पर बवाल

बिहार चुनाव से पहले कांग्रेस की महिला केंद्रित रणनीति पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। फिल्म 'पैडमैन' से प्रेरित होकर कांग्रेस ने राज्य में 5 लाख से ज्यादा महिलाओं के बीच फ्री सेनेटरी पैड बांटने की योजना शुरू की है। लेकिन इस मुहिम की चर्चा जितनी इसके उद्देश्य के लिए नहीं, उतनी राहुल गांधी की तस्वीर के कारण हो रही है -जो हर पैड बॉक्स पर छपी हुई है।

इस योजना का नाम 'प्रियदर्शिनी उड़ान योजना' है, जिसका मकसद ग्रामीण महिलाओं में माहवारी स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ाना है। यह पहल 'माई-बहन मान योजना' के तहत महिलाओं को ₹2,500 मासिक सहायता के वादे के साथ जोड़ी गई है। इस रणनीति ने राजनीतिक घमासान छेड़ दिया है। कांग्रेस इसे 'महिला सशक्तिकरण' का हिस्सा बता रही है, जबकि विपक्षी एनडीए और खासकर बीजेपी और जेडीयू इसे महिलाओं का "अपमान" करार दे रही है।

Rahul Gandhi sanitary pad

🟠 सत्ता पक्ष का हमला: "कांग्रेस की मानसिकता उजागर हुई"

केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा,

"मुझे उनकी सोच पर तरस आता है। उन्हें ये सब चुनाव के समय याद आता है। यह हास्यास्पद है कि अगर वे पैड बांट भी रहे हैं तो उस पर राहुल गांधी की तस्वीर क्यों लगा रहे हैं? कांग्रेस चुनाव के समय योजनाओं की बात करती है और उसके बाद भूल जाती है।"

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा, "यह गलत है। आप प्रचार के लिए किस हद तक जाने को तैयार हैं? यह अच्छी बात है कि आप सेनेटरी पैड बांट रहे हैं, लेकिन उन पर राहुल गांधी की तस्वीर लगाना अजीब और अनुचित लगता है।"

बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने ट्वीट किया, "राहुल गांधी की फोटो वाले सेनेटरी पैड महिलाओं का अपमान है। कांग्रेस महिला विरोधी पार्टी बन गई है। बिहार की महिलाएं इन्हें सबक सिखाएंगी।"

जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, "हमारे नेता नीतीश कुमार ने महिलाओं के लिए असली काम किए हैं। कांग्रेस ने सिर्फ प्रचार किया है।"

🟠 कांग्रेस का बचाव: "ये महिलाओं की हकीकत से जुड़ी पहल है"

ऑल इंडिया महिला कांग्रेस प्रमुख अलका लांबा ने बचाव में कहा, "आज भी बिहार की बेटियां कपड़ा इस्तेमाल करने को मजबूर हैं, जिससे वे गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाती हैं। अगर हम सेनेटरी पैड बांट रहे हैं, तो सवाल यह होना चाहिए कि अब तक यह काम सरकार ने क्यों नहीं किया?"

उन्होंने बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा, "जो पार्टी हर चीज़पर मोदी जी की फोटो छापती है -वैक्सीन सर्टिफिकेट से लेकर सिन्दूर के डिब्बे तक -वो अब राहुल गांधी की फोटो से क्यों परेशान है?"

अलका लांबा कहती हैं,

"हमने बिहार में एक सर्वे किया, और चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए कि आज के आधुनिक भारत में बिहार की महिलाएं और बेटियां मासिक धर्म के दौरान कपड़े का इस्तेमाल कर रही हैं और गंभीर बीमारियों का शिकार हो रही हैं। महिला कांग्रेस ने हमारी माताओं, बहनों, बिहार की बेटियों को मुफ्त सेनेटरी वेंडिंग मशीन देने का बीड़ा उठाया है जो बेरोजगारी, महंगाई, गरीबी के कारण कपड़े का इस्तेमाल कर रही हैं और इसे खरीदने में असमर्थ हैं... हमने 30,000 पैड बनाने के लिए मशीनें लगाईं, मुफ्त प्रशिक्षण दिया, मुफ्त मशीनें दीं, मुफ्त कच्चा माल दिया। और आज मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि ये पैड बिहार की महिलाएं बना रही हैं, उन्हें काम मिल रहा है, कमाई हो रही है। हम अगले 2 दिनों में मुफ्त सेनेटरी पैड बॉक्स वितरित करने जा रहे हैं। बॉक्स पर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी की तस्वीर है, हमारे विधायकों, भाइयों, पिताओं की तस्वीर होगी जो वितरण में हमारी मदद कर रहे हैं। वे इस जागरूकता में हमारी मदद कर रहे हैं। हम सोच रहे थे कि तस्वीर नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री की भी होनी चाहिए थी क्योंकि हाईकोर्ट ने आपको सेनेटरी वेंडिंग मशीन लगाने के लिए कहा था लेकिन आपकी सरकार विफल रही, वेंडिंग मशीन लगाओ...मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए, अपनी नाकामी छिपाने के लिए, राहुल जी के नाम पर विवाद खड़ा किया जा रहा है।"

🟠 सोशल मीडिया पर पब्लिक में है गुस्सा

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक मुजफ्फरपुर की पिंकी कुमारी ने कहा, "महिलाएं जब सेनेटरी पैड इस्तेमाल करें और उस पर एक पुरुष की फोटो हो, यह बहुत ही असहज करने वाला है। ये कांग्रेस का बहुत बचकाना कदम है।" वहीं वैशाली की सुनीता सिंह ने कहा, "राहुल गांधी को 'पैडमैन' बनाकर कांग्रेस क्या साबित करना चाहती है? महिलाओं की सुरक्षा की बात होनी चाहिए थी, न कि प्रचार की।"

सोशल मीडिया यूजर का कहना है कि ये प्रचार का बहुत ही गलत तरीका है। कईयों ने कहा कि राहुल गांधी की पीआर ऑउट ऑफ कंट्रोल हो गया है। कई यूजर ने ये सवाल उठाए हैं कि सेनेटरी पैड पर एक मेल की तस्वीर देखने में ही अजीब है।

चुनाव में महिलाएं होंगी निर्णायक

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार चुनाव में महिलाओं का वोट निर्णायक साबित हो सकता है। महागठबंधन ने जहां ₹2,500 की नकद सहायता योजना का वादा किया है, वहीं एनडीए सरकार 'महिला संवाद' जैसे कार्यक्रमों के जरिए गांव-गांव पहुंच रही है।

लेकिन कांग्रेस का यह 'पैडमैन प्लान' अब पार्टी के लिए उल्टा पड़ता दिख रहा है। सवाल ये है कि क्या यह रणनीति जागरूकता बढ़ाएगी या चुनावी नुकसान का कारण बनेगी?

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