नीतीश के करीबी IAS एस सिद्धार्थ ने नहीं दिया इस्तीफा, नवादा से चुनाव लड़ने की बात से भी किया इनकार
Bihar Chunav 2025 (Dr S Siddharth): बिहार शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) और वरिष्ठ IAS अधिकारी डॉ. एस सिद्धार्थ ने अपने पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने के फैसले का खंडन किया है। डॉ. एस. सिद्धार्थ के वीआरएस की खबर ने राजनीतिक और नौकरशाही गलियारों में हलचल मचा दी थी। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उन्होंने 17 जुलाई को वीआरएस के लिए आवेदन सौंपा है और अब यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विचाराधीन है। माना जा रहा था कि मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद इस पर अंतिम निर्णय होगा।
हालांकि डॉ. एस. सिद्धार्थ ने खुद मीडिया के सामने आकर वीआरएस लेने की खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि, "मैंने न तो इस्तीफा दिया है और न ही वीआरएस के लिए आवेदन किया है। यह खबर पूरी तरह से भ्रामक और तथ्यहीन है।" एस. सिद्धार्थ नवंबर 2025 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में उनके अचानक रिटायरमेंट को लेकर फैली खबरों ने कई तरह की राजनीतिक अटकलों को जन्म दे दिया था। लेकिन अब खुद सिद्धार्थ के बयान के बाद मामला शांत होता नजर आ रहा है।

चुनावी राजनीति में कदम रखने को लेकर लगाई गई अटकलें!
डॉ. सिद्धार्थ के जनता दल यूनाइटेड (JDU) के टिकट पर आगामी विधानसभा चुनाव में नवादा सीट से चुनाव लड़ने की अटकलें लगाई जा रही थीं। उन्होंने हाल के महीनों में नवादा का दो बार दौरा किया और स्थानीय स्कूलों का निरीक्षण भी किया। दौरे के दौरान वे आम लोगों के बीच देखे गए, यहां तक कि उन्होंने चाय और लिट्टी भी बनाई। इसी वजह ये अफवाह उठी। लेकिन उन्होंने चुनाव लड़ने की बात से भी इनकार कर दिया है।
अभी फिलहाल नवादा से आरजेडी नेता विभा देवी विधायक हैं। यहां से 2020 के चुनाव में JDU ने कौशल यादव को टिकट दिया था। जो दूसरे नंबर पर थे।
जानिए डॉ. एस सिद्धार्थ?
डॉ. एस सिद्धार्थ का जन्म तमिलनाडु में हुआ। उन्होंने IT दिल्ली से स्नातक और 1989 में IIM अहमदाबाद से प्रबंधन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। 1991 बैच के IAS अधिकारी के रूप में उन्होंने शिक्षा विभाग और कैबिनेट सचिवालय में बतौर अपर मुख्य सचिव सेवाएं दीं। वे न केवल एक अनुभवी प्रशासक हैं, बल्कि ट्रेंड पायलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर, पेंटर और कार्टूनिस्ट के रूप में भी पहचान रखते हैं।
डॉ. एस सिद्धार्थ ने जब शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाली तो उन्होंने तत्कालीन अधिकारी केके पाठक के कई फैसलों में बदलाव किए थे। जिसको लेकर वो चर्चाओं में आए थे। उन्होंने 12 जून 2024 को निर्देश दिया था कि स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति नहीं होने पर सीधे उनका नाम काटा न जाए।
अपने एक अन्य फैसले में 6 जून 2024 को उन्होंने स्कूलों के निरीक्षण की जिम्मेदारी जिला स्तर के डीडीसी अधिकारियों को सौंपी थी। स्कूल टाइमिंग तय करने का अधिकार उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को सौंप दिया था।












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