Bihar Chunav: पारस,सहनी,सोरेन को कितनी सीटें? राहुल लेंगे फाइनल फैसला, कांग्रेस की इस डिमांड से टेंशन में RJD
Bihar Chunav 2025 (Mahagathbandhan Seat Sharing): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर महागठबंधन (INDIA Bloc) में सीट बंटवारे पर चर्चा तेज हो गई है। इसी कड़ी में शनिवार (06 सितंबर) को कांग्रेस नेताओं ने महागठबंधन के सहयोगियों-राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और अन्य दलों के साथ सीट बंटवारे को लेकर बैठक की। सूत्रों के मुताबिक, आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान से सीट बंटवारे को लेकर पहले से चर्चा करते रहे हैं। सीटों का अंतिम ऐलान सितंबर के दूसरे पखवाड़े में होने की संभावना है।
अब महागठबंधन की सीट शेयरिंग को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। अब तय हो गया है कि पशुपति कुमार पारस की RLJP, मुकेश सहनी की वीआईपी और हेमंत सोरेन की झामुमो (JMM) को कितनी सीटें मिलेंगी, इसका अंतिम फैसला दिल्ली में राहुल गांधी की मौजूदगी में होगा। तेजस्वी यादव भी इस बैठक में शामिल होंगे, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और महासचिव केसी वेणुगोपाल भी मौजूद रहेंगे।

🔵 दिल्ली में 9 सितंबर को महागठबंधन की बड़ी बैठक, सीट पर फाइनल होगी डील
सूत्रों का कहना है कि यह मीटिंग 9 सितंबर को कांग्रेस की सेंट्रल इलेक्शन कमेटी में हो सकती है, जहां न सिर्फ सीट बंटवारे बल्कि उम्मीदवारों के नाम पर भी अंतिम मुहर लगेगी। सूत्रों के मुताबिक पारस, सहनी, सोरेन को सीट देने के लिए राजद, कांग्रेस और वाम दलों को अपनी सीटों से समझौता करना पड़ सकता है।
🔵 कांग्रेस को चाहिए 90 सीटें! इस डिमांड से RJD की बढ़ी परेशानी
2020 के चुनाव में महागठबंधन को कई सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। इस बार कोशिश यही है कि उन हार वाली सीटों पर सही और मजबूत उम्मीदवार उतारे जाएं। यही वजह है कि सीट टू सीट चर्चा हो रही है। मंथन इस बात पर भी है कि मुकेश सहनी, पारस और हेमंत सोरेन को कितनी-कितनी सीटें दी जाएं।
जानकारों का कहना है कि राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के बाद कांग्रेस का मनोबल बढ़ा है और वह ज्यादा सीटों की दावेदारी कर रही है। राहुल गांधी की 14 दिन की मतदाता अधिकार (Voter Adhikar) यात्रा की सफलता से उत्साहित कांग्रेस ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में पिछली बार से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग की है। साल 2020 के चुनाव में कांग्रेस ने 70 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और 19 सीटें जीत पाई थी। लेकिन इस बार पार्टी नेताओं का कहना है कि 90 से कम सीटों पर चुनाव लड़ने का कोई कारण नहीं है।
🔵 कांग्रेस नेता बोले- राहुल गांधी बिहार में महागठबंधन का सबसे बड़ा चेहरा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता किशोर कुमार झा ने कहा- "यात्रा के बाद पूरे राज्य में कांग्रेस को लेकर जबरदस्त उत्साह है। लोग अपने मताधिकार को लेकर जागरूक हुए हैं। जाहिर है कि कांग्रेस को इस बार 70 से कहीं ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए। राहुल गांधी अब बिहार में महागठबंधन के सबसे बड़े नेता के रूप में उभरे हैं।"
किशोर कुमार झा का कहना है कि कांग्रेस का फोकस उन सीटों पर होगा जहां पार्टी 2020 में कमजोर रही थी। उन्होंने मिथिलांचल, सीमांचल और कोसी क्षेत्रों को पार्टी का मजबूत गढ़ बताया। हालांकि, RJD और अन्य दलों का दबाव है कि कांग्रेस को इतनी सीटें देना संभव नहीं होगा, क्योंकि अब VIP, RLJP और JMM जैसे नए पार्टनर्स को भी जगह देनी है।
हालांकि, आरजेडी के भीतर से यह संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस को 60 से ज्यादा सीटें देना मुश्किल होगा, क्योंकि इस बार महागठबंधन में नए सहयोगियों को भी एडजस्ट करना है। 2020 में आरजेडी ने 144 सीटों पर चुनाव लड़ा और 75 सीटों पर जीत हासिल की थी। इस बार आरजेडी 135-140 सीटों से ज्यादा पर उम्मीदवार उतारने के पक्ष में नहीं है।
उधर, वीआईपी (VIP) नेता मुकेश सहनी ने 60 सीटों और डिप्टी सीएम पद की मांग रखी है। वामदलों में CPI-ML ने 40, जबकि CPI और CPM ने 10-10 सीटों की मांग की है।
🔵 महागठबंधन में कौन कितनी सीटों पर लड़ सकता है चुनाव? (संभावित सीट बंटवारा 243 सीटों में से)
🔹 RJD: 122-124 सीटें
🔹 कांग्रेस: 58-62 सीटें
🔹 वाम दल (CPI-ML, CPI, CPM): 31-33 सीटें
🔹VIP (मुकेश सहनी): 20-22 सीटें
🔹 RLJP (पशुपति पारस): 5-7 सीटें
🔹 JMM (हेमंत सोरेन): 2-3 सीटें
यानी कुल मिलाकर सभी दलों को एडजस्ट करने के लिए RJD और कांग्रेस को अपने पिछले चुनाव की तुलना में सीटें कम करनी पड़ सकती हैं। पिछली बार RLJP और VIP एनडीए का हिस्सा थे। आरएलजेपी ने 3 सीटें जीती थीं, जबकि वीआईपी ने 11 सीटों पर चुनाव लड़ा और 4 सीटें जीतीं। बाद में वीआईपी के अधिकांश विधायक भाजपा में शामिल हो गए।
🔵 इंडिया ब्लॉक में सीट शेयरिंग की रणनीति और टकराव की आशंका
दिलचस्प बात ये है कि VIP के मुकेश सहनी ने साफ कह दिया है कि सीटों पर कोई विवाद नहीं है और महागठबंधन पूरी एकजुटता से चुनाव लड़ेगा। वहीं, RJD सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस जितनी सीटें चाहती है, उतनी मिलना मुश्किल है। आखिरकार, सभी दलों को साथ रखना और उम्मीदवारों की ताकत के हिसाब से बंटवारा करना ही महागठबंधन की मजबूरी है।
जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र और झारखंड की तर्ज पर अब बिहार में भी कांग्रेस और RJD के बीच सीटों पर मोलभाव का सिलसिला जारी है। झामुमो ने साफ कर दिया है कि बिहार में उनकी सीटें RJD के कोटे से ही तय होंगी, ठीक वैसे ही जैसे झारखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने झामुमो को जगह दी थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में इस बार सीट बंटवारा आसान नहीं होगा। कांग्रेस वोटर अधिकार यात्रा की सफलता को भुनाना चाहती है, वहीं RJD अपने आधार वोट और तेजस्वी यादव की लोकप्रियता पर भरोसा कर रही है। VIP और RLJP जैसे छोटे दल ज्यादा सीटें चाहते हैं ताकि अपनी प्रासंगिकता साबित कर सकें।
अब सबकी निगाहें दिल्ली में होने वाली बैठक पर टिकी हैं, जहां राहुल गांधी की मौजूदगी में तय होगा कि किसे कितनी सीट मिलेगी और बिहार महागठबंधन का चेहरा आखिर कैसा दिखेगा।
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