Bihar Assembly Election 2025:फर्जी दस्तावेजों के आधार पर छपरा में 15 से ज्यादा अवैध निर्माण, जानें पूरा मामला

Bihar Assembly Election 2025: भूमी घोटाला को लेकर बिहार के छपरा जिला में रजानीतिक हलचल मचा हुआ है। यहां रामनगर एस्टेट की 2.53 एकड़ जमीन को लेकर जमीन घोटाला सामने आया है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ज़मीन पर तेज़ी से निर्माण कार्य कराया गया है। वर्तमान में यहाँ 10-15 सिंगल और डबल स्टोरी मकान तथा लगभग इतनी ही संख्या में दुकानें बन चुकी हैं। कुछ दुकानदार दावा करते हैं कि उन्होंने अपनी दुकानें स्वयं बनाई हैं, जबकि कुछ अन्य लोग इसके लिए दिवंगत राजा मनमोहन विक्रम शाह उर्फ़ राम राजा को श्रेय देते हैं। आइए जानते हैं पूरा मामला क्या है?

इस अतिक्रमण के बावजूद, लगभग एक बीघा ज़मीन अब भी खाली पड़ी है। इस ज़मीन पर एक पुराना न्यायालय भवन और एस्टेट कार्यालय स्थित है, जिस पर कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। वर्ष 1943 में मोतिहारी न्यायालय द्वारा पारिवारिक बंटवारे के आदेश के तहत यह भूमि राम राजा की पत्नी पंचसीता महारानी के नाम दर्ज हुई थी।

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फर्जी दस्तावेजों बनाकर 15 से ज्यादा अवैध निर्माण

इसके बाद यह संपत्ति क्रमशः उनके वंशजों - शिव विक्रम शाह, नारायण विक्रम शाह, हरि विक्रम शाह, मनमोहन विक्रम शाह - तथा उनके उत्तराधिकारियों - मनोहर विक्रम शाह, मधुकर विक्रम शाह, धनंजय विक्रम शाह, मीरा शाह और संजय विक्रम शाह - के नाम पर निर्विवाद रूप से चली आ रही है।

छपरा नगर निगम और सदर भूमि रजिस्ट्री कार्यालय के अभिलेखों में यह भूमि विधिवत रूप से उनके नाम दर्ज है। संपदा प्रबंधक वशिष्ठ तिवारी के अनुसार, भू-राजस्व रसीदें वर्ष 2025 तक नियमित रूप से निर्गत की गई हैं।

जिलाधिकारी के आदेश पर अपर समाहर्ता (भू-अभिलेख) इंजीनियर मुकेश कुमार ने मामले की विस्तृत जांच प्रारंभ कर दी है। जांच के दायरे में फर्जी दस्तावेजों की श्रृंखला, एक ही डीड नंबर का बार-बार उपयोग, जाली हस्ताक्षर, खरीददारों और विक्रेताओं के नाम, दस्तावेज़ लेखकों, गवाहों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका शामिल है।

प्रारंभिक जांच में वकीलों, डॉक्टरों, स्थानीय नेताओं और भू-माफियाओं की संलिप्तता के प्रमाण मिले हैं। फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए छपरा, चंपारण, वाराणसी समेत अन्य स्थानों से संदर्भ जुटाए गए। हैरान करने वाली बात यह है कि कई जाली दस्तावेज ऐसे सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर बनाए गए हैं, जो अब रजिस्ट्री कार्यालय के अभिलेखों से गायब हो चुके हैं।

धोखाधड़ी को रोकने के लिए दस्तावेजों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया में तेजी

भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी को रोकने के लिए दस्तावेजों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ाई जा रही है। वर्तमान में छपरा में वर्ष 1968 से 1990 तक के अभिलेखों का डिजिटलीकरण पूरा कर लिया गया है।

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पूर्व में वर्ष 1934, 1964 और 1983 के दस्तावेजों में हुई धोखाधड़ी के मामलों में एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। रजिस्ट्रार गोपेश चौधरी ने बताया कि जुलाई 2023 में कार्यभार ग्रहण करने के बाद से वे कार्यालय की पारदर्शिता और साफ-सफाई को लेकर प्रतिबद्ध हैं तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की सूचना वे सक्रिय रूप से उच्चाधिकारियों को दे रहे हैं।

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