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Asian Bird 'जून में आते हैं नवंबर में चले जाते हैं', ओपनबिल के बारे में जानिए कुछ ख़ास

Asian Bird जून महीने की शुरुआत में बिहारशरीफ के विभिन्न इलाकों में अपना डेरा जमाता है। वहीं नवंबर के आखिर में यह प्रवास कर जाता है। इस पक्षी का पसंदीदा खाना घोंघा होता है, घोंघे को कटोर कवच से बाहर निकालने...

Asian Bird: बिहार के नालंदा ज़िले में खास प्रजाति का पक्षी जून में अपना बसेरा बनाता हैं और नवंबर के आखिर होते होते वह अपना डेरा बदल लेता है। जिला मुख्यालय बिहार शरीफ में विशेष प्रजाति के पक्षी को लोग मॉनसून आगमन का सूचक मानते हैं। इस पक्षी की पहचान लंबी चोंच और लंबी टांग से होती है, देखने बिल्कुल बगुला और सारस की तरह होता है। एस्टार्क प्रजाति का पक्षी एशियन ओपनबिल (घोंघिल पक्षी) के चोंच के बीच खाली जगह होती है। इसलिए ही लोगो इस पक्षी को ओपनबिल कहते हैं।

ओपनबिल पसंदीदा भोजन घोंघा

ओपनबिल पसंदीदा भोजन घोंघा

जून महीने की शुरुआत में यह पक्षी बिहारशरीफ के विभिन्न इलाकों में अपना डेरा जमाता है। वहीं नवंबर के आखिर में यह प्रवास कर जाता है। इस पक्षी का पसंदीदा खाना घोंघा होता है, घोंघे को कटोर कवच से बाहर निकालने में ओपनबिल का काफी मददगार साबित है। घोंघा पसंदीदा खाना होने की वजह से ओपनबिल को घोंघिल कहा जाता है। आपको बता दें कि यह पक्षी पूरी तरह से मांसाहारी होता है। शाकाहारी भोजन ओपनबिल को पंसद नहीं है।

कॉलोनियों में बनाते हैं घोंसला

कॉलोनियों में बनाते हैं घोंसला

एशियन ओपनबिल के बारे में जानकार लोग बताते हैं कि यह पक्षी कॉलोनियों में अपना घोंसला (हेरोनरी) बनाते हैं। अक्सर यह भी देखा गया है कि ओपनबिल उसी जगह पर या उन पेड़ों को घोंसला बनाने के लिए चुनते हैं, जहां उन्होंने पिछले साल घोंसला बनाया था। घोंसला बनाने के लिए बरगद, पीपल, इमली,अशोक जैसे बड़े पेड़ों को चुनते हैं। इसके साथ ही घोंसले के निर्माण में टहनि और मुलायम तिनकों का का उपयोग करते हैं ताकि उनके बच्चों को किसी भी तरह की तकलीफ़ नहीं हो।

मादा ओपनबिल देती है 2 से 5 अंडे

मादा ओपनबिल देती है 2 से 5 अंडे

मादा ओपनबिल 2 से 5 अंडे तक देती और घोंसले में बच्चों की देखभाल करती है। इसके साथ बच्चों के लालन पालन की ज़िम्मेदारी नर और मादा दोनों ही उठाते हैं। ओपनबिल के बच्चे को 3 महीने में उड़ने के काबिल हो जाते हैं, इसके बाद यह पक्षी नवम्बर तक अपने डेरा बदल कर वापस उस ठिकाने पर पहुंच जाते हैं जहां से उन्होंने प्रवास किया था। घोंघिल का पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए काफी लाभदायक माने जाते हैं। कई परजीवियों से ये इंसानों को होने वाले बीमारियों से ओपनबिल हिफाज़त करते हैं।

ओपनबिल को साइबेरियन पक्षी समझते हैं लोग

ओपनबिल को साइबेरियन पक्षी समझते हैं लोग

ओपनबिल के बारे में जानकारों का कहना है कि उनके मल मूत्र से मिट्टी उपजाऊ होती है। क्योंकि इनमें यूरिक एसिड, फास्फोरस और नाइट्रोजन पाया जाता है। बारिश होने की वजह से मिट्टी में मिल जाती है। ज्यादातर लोग ओपनबिल को साइबेरियन पक्षी या फिर विदेशी प्रवासी पक्षी समझते हैं। हक़कीत में यह पक्षी देसी ही होते हैं जो देश के अंदर प्रवास पर रहते हैं। ओपनबिल ज्यादातर भारतीय उपमहाद्वीप, दक्षिण पूर्व एशियाई देश कंबोडिया, थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेसिशा,म्यंमार, मलेशिया में पाये जाते हैं।

खतरे में ओपनबिल का अस्तित्व

खतरे में ओपनबिल का अस्तित्व

आज की तारीख में इस पक्षी का अस्तित्व खतरे में है, पक्षी संरक्षण के लिए काम कर रहे पर्यावरणविदों की मानें तो दुनिया भर में विकास की वजह से पेड़ पौधों को काटा जा रहा है, जिसका खामियाज़ा इन पक्षियों को भुगतना पड़ रहा है। नदी और जलाशयों में अतिक्रमण, पेड़ों का कटना और खेतों में केमिकल के इस्तेमाल से इनकी तादाद में काफी कमी आई है। ओपनबिल को संरक्षित करने के लिए सभी को मिलकर कारगर क़दम उठाने चाहिए।

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