बिहार में पहले भी सामने आ चुके हैं विमल हत्याकांड जैसे मामले, प्रदेश में कितने सुरक्षित हैं पत्रकार?
Vimal Hatyakand: बिहार में एक बार फिर से कानून व्यवस्था पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। अररिया ज़िले में हुई पत्रकार की हत्या के बाद से ही विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। रानीगंज में दिनदिहाड़े पत्रकार विमल की हत्या के बाद से लोगों में भय का माहौल है। बिहार में यह पहली बार नहीं हुआ है, पिछले 7 सालों में 5 पत्रकारों की निर्मम हत्या कर दी गई।
प्रदेश सरकार भले ही कानून व्यवस्था के दुरुस्त होने का दावा कर रही है, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और ही बयान कर रही है। बिहार में पत्रकार कितने सुरक्षित हैं इस पर बहस छिड़ गई है। आइए जानते हैं इससे पहले कब-कब अपराधियों ने पत्रकारों शिकार बनाया है।

अररिया विमल यादव हत्याकांड ने सिवान राजदेव हत्याकांड समते बिहार में हुई पत्रकारों की हत्या की यादों को ताज़ा कर दिया। पत्रकार सुभास कुमार महतो की मई (2022) में हत्या हुई थी। सुभास अपने दोस्त की शादी से लौट रहे थे, उनके घर के पास घात लगाये अपराधियों ने गोली मार दी थी। सुभाष के परिजनों का कहना है की वो शराब और बालू माफियायों के ख़िलाफ़ रिपोर्टिंग कर रहे थे। इसी वजह से उनकी हत्या हुई।
25 सितंबर 2022 को सुपोल ज़िला में पत्रकार महाशंकर पाठक की पीट पीटकर हत्या कर दी गई थी। राधोपुर थाना क्षेत्र के राधानगर गांव में हुई हत्या का आरोप महाशंकर के फैक्ट्री में काम करने वाले दम्पति पर लगा था। नवम्बर 2021 को मधुबनी ज़िला में अविनाश झा का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी गई थी।
पूर्वी चंपारण ज़िला में अगस्त 2021 युवा पत्रकार मनीष सिंह का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी गई। 3 दिन लापता होने के बाद उनकी लाश एक गड्ढे में मिली थी। मनीष घर से किसी पार्टी के लिए निकले थे। 13 मई 2016 को सिवान ज़िले में हिदुस्तान हिंदी के पत्रकार राजदेव रंजन की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
राजदेव मोटरसाइकिल से कहीं जा रहे थे, इसी दौरान बदमाशो ने उनके सिर में गोली मारी थी। अस्पताल ले के क्रम में उनकी मौत हो गई। अररिया में पत्रकार विमल यादव हत्याकांड मामले में 4 संदिग्धों को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है। संदिग्धों की निशानदेही पर अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
पत्रकारों का कहना है कि प्रदेश में पत्रकार सुरक्षित नहीं है। घर के सामने हत्या हो जा रही है। अपराधिक वारदात से लेकर राजनीतिक जगत की हर तरह की ख़बरे करते हैं। ख़बर किसी के पक्ष में या तो किसी के ख़िलाफ़ होती है। इसलिए प्रदेश सरकार को चाहिए कि पत्रकारों को सुरक्षा की गारंटी दें, या फिर पत्रकारों के लिए आर्म्स लाइसेंस लेने की प्रक्रिया को सरल करे।












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