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Anant Singh: क्या चली जाएगी अनंत सिंह की विधायकी? कब जेल से बाहर आएंगे 'छोटे सरकार', शपथ न लेने पर बढ़ी टेंशन!

Anant Singh Update News: बिहार विधानसभा का सत्र 1 दिसंबर से शुरू हो गया है और नए विधायकों ने औपचारिक रूप से शपथ भी ले ली है। लेकिन मोकामा से जेडीयू के टिकट पर चुनाव जीतकर आए अनंत सिंह शपथ नहीं ले पाए। ऐसे में बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या उनका विधायक पद सुरक्षित है या खतरे में पड़ सकता है।

नियम साफ कहते हैं कि चुनाव जीतने के बाद शपथ लेना जरूरी है। शपथ न लेने से सीट तुरंत खाली नहीं होती, लेकिन छह महीने तक सदन की कार्यवाही में शामिल न होने पर सीट खाली घोषित कर दी जाती है। इसलिए अनंत सिंह का शपथ न ले पाना अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है।

Anant Singh

🟡 शपथ के लिए हाईकोर्ट पहुंचे छोटे सरकार

मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना के बेउर जेल में बंद अनंत सिंह जल्द बाहर आ सकते हैं। उनके वकीलों ने पटना हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दाखिल की है।

याचिका में साफ तौर पर कहा गया है कि अनंत सिंह मोकामा से जेडीयू के टिकट पर विधायक चुने गए हैं और उन्हें 1 से 5 दिसंबर के बीच शपथ लेना अनिवार्य है। वकीलों का तर्क है कि संवैधानिक दायित्व पूरा करने के लिए उन्हें अस्थायी जमानत दी जानी चाहिए ताकि वे विधानसभा पहुंचकर शपथ ले सकें।

🟡 गिरफ्तारी पुराने हत्याकांड से जुड़ी, यहीं से शुरू हुआ पूरा विवाद

अनंत सिंह की गिरफ्तारी 1 नवंबर को हुई थी। विधानसभा चुनाव के दौरान पटना के टाल इलाके में जनसुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। परिवार ने सीधे तौर पर इस हत्या के लिए अनंत सिंह को जिम्मेदार ठहराया था। इसी आधार पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर बेउर जेल भेज दिया। 20 नवंबर को निचली अदालत ने जमानत अर्जी खारिज कर दी, जिसके बाद अब मामला हाईकोर्ट में लंबित है।

🟡 हाई कोर्ट से राहत की उम्मीद, लेकिन शर्तें तय मानी जा रही हैं

सूत्रों का दावा है कि सत्ता पक्ष का विधायक होने के कारण अनंत सिंह को शपथ ग्रहण के लिए सीमित अवधि की जमानत मिल सकती है। हालांकि अदालत कुछ सख्त शर्तें भी लगा सकती है, जैसे तय समय में वापस जेल लौटना, मीडिया से दूरी रखना या किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल न होना। लेकिन चाहे शर्तें कैसी भी हों, संकेत यही हैं कि छोटे सरकार जल्द ही कुछ समय के लिए अपने समर्थकों के बीच नजर आ सकते हैं।

🟡 पहली बार नहीं है जब जेल में रहते हुए चुनाव जीते हों

दिलचस्प बात यह है कि अनंत सिंह के राजनीतिक करियर में यह कोई नया मोड़ नहीं है। 2020 के चुनाव में भी वे जेल में रहते हुए आरजेडी उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए थे। तब उन्होंने अदालत से राहत लेकर विधानसभा में शपथ भी ली थी।

बाद में एक अवैध हथियार मामले में उन्हें दस साल की सजा सुनाई गई थी, जिसके चलते उनकी सदस्यता चली गई। लेकिन 2024 में हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया और वे फिर से चुनावी मैदान में लौट आए।

🟡जेल में रहते हुए भी चुनावी प्रभाव बरकरार

इस बार भी गिरफ्तारी के बावजूद उनके समर्थकों ने ताबड़तोड़ प्रचार किया और नतीजा यह हुआ कि अनंत सिंह ने आरजेडी उम्मीदवार तथा पूर्व सांसद सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को बड़ी बढ़त से हराकर जीत दर्ज की। उनकी जीत दर्शाती है कि मोकामा की राजनीति में उनका प्रभाव अब भी बरकरार है।

🟡 क्या खतरे में है विधायकी? आगे क्या होगा

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि शपथ न लेने के चलते उनकी विधायकी पर कोई संकट आएगा या नहीं। अगर अदालत से राहत मिल गई और वे 1 से 5 दिसंबर के बीच शपथ ले लेते हैं, तो उनका पद सुरक्षित रहेगा। लेकिन अगर वे छह महीने तक सदन में उपस्थित नहीं हो पाए, तब उनके विधायक पद पर संकट गहरा सकता है। फिलहाल नजरें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं जो तय करेगा कि छोटे सरकार विधानसभा पहुंच पाएंगे या नहीं।

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