Anant Singh: मोकामा से जीतकर भी जेल में अनंत सिंह! क्या विधायक पद पर कोई खतरा है? जानें कैसे और कब लेंगे शपथ
Anant Singh: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आते ही मोकामा फिर सुर्खियों में है। वजह है बाहुबली नेता अनंत सिंह, जिन्होंने इस बार जनता दल यूनाइटेड (JDU) के टिकट पर करीब 28,000 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की। जीत तो मिल गई लेकिन अनंत सिंह इस समय बेउर जेल में बंद हैं। ऐसे में बड़ा सवाल उठ रहा है कि जो विधायक खुद जेल से बाहर नहीं निकल सकते, वो विधानसभा में शपथ कैसे लेंगे? और क्या उनके विधायक पद पर कोई खतरा है?
जेल में हैं बंद, फिर कैसे लेंगे शपथ?
अनंत सिंह फिलहाल ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं। उन पर जन सुराज पार्टी के समर्थक दुलार चंद यादव की हत्या का आरोप है। चूंकि अभी तक पुलिस ने चार्जशीट दाखिल नहीं की है, इसलिए वे सजायाफ्ता नहीं हैं।

लेकिन नियम साफ कहते हैं कि विधायक बनने के बाद शपथ लेना अनिवार्य है। शपथ न लेने पर तुरंत सदस्यता नहीं जाती लेकिन 6 महीने तक सदन की कार्यवाही में हिस्सा न लेने पर सीट खाली हो सकती है। यानी चुनाव जीत जाना काफी नहीं है, शपथ भी लेनी ही होगी।
शपथ लेने की प्रक्रिया: जेल में बंद नेता क्या करें?
संविधान का अनुच्छेद 188 बताता है कि हर विधायक को सदन में बैठने से पहले शपथ लेनी होती है। जेल में बंद होने पर शपथ लेने के विकल्प कुछ ऐसे हैं-
1. अदालत से पैरोल या अंतरिम जमानत लेनी होगी
यह सबसे आम तरीका है। विधायक अदालत में आवेदन देते हैं और पैरोल मिलने के बाद विधानसभा जाकर शपथ लेते हैं। शपथ के बाद उन्हें वापस जेल लौटना होता है।
2. स्पीकर जेल में जाकर शपथ दिला सकते हैं (लेकिन यह बेहद दुर्लभ)
कभी-कभार स्पीकर या उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी जेल में जाकर भी शपथ दिला सकते हैं, लेकिन यह प्रक्रिया लगभग न के बराबर होती है। यानी व्यावहारिक तौर पर अनंत सिंह को शपथ के लिए पैरोल ही लेनी होगी।
शपथ के बाद क्या होगा?
मान लीजिए कि अनंत सिंह को पैरोल मिल जाती है और वे विधायक पद की शपथ ले लेते हैं, तब भी वे जेल में रहेंगे तो सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। उन्हें हर बार अनुपस्थिति की सूचना स्पीकर को लिखित में देनी पड़ेगी। सदन की अनुपस्थिति समिति यह तय करेगी कि छुट्टी मंजूर की जाए या नहीं। वे एक बार में 59 दिन से ज्यादा लगातार गैरहाजिर नहीं रह सकते। साफ है कि जेल में रहते हुए विधायी काम करना आसान नहीं होता।
अगर चार्जशीट आई तो क्या होगा?
यह मामला आगे कैसे बढ़ेगा, इस पर काफी कुछ निर्भर करता है
✔ हल्की धाराएं लगीं
→ जमानत मिलने की संभावना बढ़ेगी
→ वे विधानसभा आ-जा सकेंगे
→ विधायक पद पर कोई खतरा नहीं
✔ गंभीर आरोप लगे
→ बाहर आना मुश्किल
→ फिर भी पैरोल के जरिए शपथ संभव
→ लेकिन सदन में शामिल होना चुनौतीपूर्ण
✔ अगर अदालत ने दोषी ठहरा दिया
→ दो साल या उससे ज्यादा की सजा मिली
→ प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत विधायकी खत्म
पांच साल पहले भी जेल से जीते थे अनंत सिंह
दिलचस्प बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब अनंत सिंह ने जेल में रहते हुए चुनाव जीता हो। 2020 में वे आरजेडी उम्मीदवार के रूप में जेल से ही जीते थे। उस बार उन्होंने अदालत से जमानत लेकर शपथ भी ली थी। बाद में अवैध हथियार मामले में 10 साल की सजा हुई और वे अयोग्य ठहराए गए। लेकिन 2024 में हाईकोर्ट ने बरी कर दिया। अनंत सिंह का राजनीतिक करियर हमेशा जेल और चुनाव दोनों के बीच झूलता रहा है।
बिहार विधानसभा का पहला सत्र कब बुलाया जाएगा?
आमतौर पर चुनाव के बाद 15-45 दिनों के भीतर पहला सत्र बुलाया जाता है। 2020 में नतीजे 10 नवंबर को आए थे शपथ 23-27 नवंबर को हुई। 2025 में नतीजे 8 नवंबर को आए हैं, इस बार शपथ 20 नवंबर के बाद होने की उम्मीद है। पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शपथ लेंगे फिर प्रोटेम स्पीकर नए विधायकों को शपथ दिलाएंगे। यानी अनंत सिंह के पास अदालत से पैरोल लेने का समय अभी है।
चुनाव जीतने के बाद जेल में ऐसा था अनंत सिंह का दिन
अनंत सिंह पटना के बेउर जेल में फिलहाल बंद हैं। बेउर जेल के सूत्रों के मुताबिक चुनाव जीतने के बाद भी अनंत सिंह को किसी तरह की वीआईपी सुविधा नहीं मिली। उन्हें विशेष सुरक्षा वार्ड में रखा गया है और उनकी दिनचर्या पहले की तरह ही चलती रही। 14 नवंबर, यानी रिजल्ट वाले दिन भी उनकी सुबह सामान्य तरीके से ही शुरू हुई। वे करीब सुबह 5 बजे उठ गए, इसके बाद स्नान करने के बाद उन्होंने आधे घंटे से ज्यादा समय तक पूजा और प्रार्थना की। पूजा के बाद नाश्ता और चाय पीकर वे सीधे बैरक में लगे टीवी के सामने आकर बैठ गए, क्योंकि उसी समय वोटों की गिनती शुरू होने वाली थी।
काउंटिंग शुरू होते ही उनकी नजर टीवी पर टिक गई। जैसे-जैसे मोकामा सीट से अपडेट आते, वे चैनल बदल-बदलकर हर आंकड़ा बड़े ध्यान से देखते रहे। सिर्फ मोकामा ही नहीं, वे पूरे बिहार में NDA की स्थिति पर भी लगातार नजर रखे थे। जैसे ही वीणा देवी पर उनकी बढ़त 10,000 से ज्यादा हुई, उन्होंने आत्मविश्वास से कहा,"हमरा कोई न हरा सकता है।''
जीत की पुष्टि होते ही अनंत सिंह बेहद खुश हुए और बैरक में मौजूद कैदियों के बीच खुशी का माहौल बन गया। वहीं, जेल के बाहर उनके समर्थकों ने खास भोजन भेजकर उनकी जीत का जश्न मनाया। जेल में रहते हुए भी अनंत सिंह का यह दिन पूरी तरह चुनावी रोमांच, तनाव और फिर जीत की संतुष्टि से भरा रहा।












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