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राजद में तेजप्रताप अकेले नहीं हैं रणछोड़, चार और दिग्गजों ने किया पलायन

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नई दिल्ली। ऐसा नहीं है कि सिर्फ तेजप्रताप यादव ने ही हार के डर से सीट बदली है राजद में और भी बड़े नेताओं ने अपनी सीट बदली है। इस बार के विधानसभा चुनाव में न लालू यादव बाहर हैं और न नीतीश कुमार राजद के गठबंधन में। इसलिए बहुत से नेताओं को अपनी जीत का भरोसा नहीं है। कहा जा रहा है कि राजद के दिग्गज नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी, लालू यादव के सबसे विश्वासी नेता भोला यादव और राजद के प्रभावशाली दलित नेता शिवचंद्र राम हार के डर से ही नयी सीटों पर किस्मत आजमा रहे हैं। जब हसनपुर से तेजप्रताप के खिलाफ ऐश्वर्या राय ने चुनाव नहीं लड़ा तो राजद ने भी युद्धविराम की घोषणा कर दी। परसा विधानसभा सीट पर लालू के समधी चंद्रिका राय के खिलाफ राजद ने उनकी भतीजी करिश्मा राय को मैदान में नहीं उतारा। यहां राजद ने लोजपा के पूर्व प्रत्याशी छोटे लाल राय को अपना उम्मीदवार बनाया है। छोटे लाल राय तीन बार यहां से विधायक भी रहे हैं।

    Bihar Assembly Elections 2020: Tej Pratap Yadav ने Hasanpur सीट से भरा नामांकन | वनइंडिया हिंदी

    Bihar Assembly Elections 2020: Not Only Tej Pratap these 4 leaders change their seat.

    अब्दुल बारी सिद्दीकी शिफ्ट हुए केवटी

    अब्दुल बारी सिद्दीकी राजद में प्रभावशाली मुस्लिम चेहरा हैं। 2010 में नेता प्रतिपक्श रहे थे। अगर 2015 के मंत्री पद की शपथ को आधार मानें तो सिद्दीकी राजद में तेजस्वी और तेजप्रताप के बाद तीसरे पायदान पर खड़े हैं। ऐसे बड़े नेता को भी 2020 में चुनाव जीतने के लिए सीट बदलनी पड़ी है। सिद्दीकी 2015 में दरभंगा की अलीनगर सींट से विधायक चुने गये थे। 2010 में भी वे इसी सीट से चुनाव जीते थे। लेकिन 2020 में वे केवटी से चुनाव लड़ रहे हैं। अलीनगर की सीट परिसीमन के बाद 2010 में बनी थी। इसके पहले सिद्दीकी बहेड़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते थे। 1977 में बहेड़ा से ही चुनाव जीत कर वे संसदीय राजनीति में दाखिल हुए थे। उन्हें कर्पूरी ठाकुर के मंत्रिमंडल में मंत्री भी बनाया गया था। लेकिन इसके बाद अब्दुल बारी सिद्दीकी इस सीट पर लगातार तीन चुनाव हारे। 1980, 1985 और 1990 में वे बहेड़ा से चुनाव हार गये थे। बाद में उन्हें लालू यादव ने विधान परिषद में भेजा था। 1995 के विधानसभा चुनाव में वे यहां से दूसरी बार जीते। इसके बाद उन्होंने यहां से 2005 तक लगातार जीत हासिल की। 2015 में केवटी से राजद के फराज फातिमी जीते थे जो अब जदयू में हैं। जब फराज राजद से चले गये तो सिद्दी को यहां शिफ्ट करने का मौका मिल गया। अब केवटी सीट पर सिद्दीकी का मुकाबला एनडीए के घटक दल वीआइपी के हरि सहनी से है। हरि सहनी पहले दरभंगा जिला के भाजपा अध्यक्ष रह चुके हैं। अब वे वीआइपी के नाव छाप पर चुनाव लड़ रहे हैं।

    लालू के परम विश्वासी भोला यादव भी नयी सीट पर

    भोला यादव लालू यादव के परम विश्वासी व्यक्ति हैं। जब से लालू यादव जेल में हैं तब से वे पार्टी और लालू यादव के बीच पुल का काम कर रहे हैं। लालू यादव अपने सारे संदेश भोला यादव के मार्फत ही पार्टी तक पहुंचाते हैं। राजद के सभी उम्मीदवारों के सिंबल लेटर पर भोला यादव ने ही लालू यादव से दस्तखत कराये हैं। लालू यादव सांसद के रूप में जब (2009) केन्द्र की राजनीति कर रहे थे तब भोला यादव उनके निजी सचिव हुआ करते थे। तब से लालू उन्हें प्रिय पात्र मानते आ रहे हैं। ऐसे विश्वासपात्र को लालू यादव ने उपकृत भी किया। लालू ने उन्हें विधान पार्षद बनाया फिर विधायक भी बनाया। भोला यादव 2015 के चुनाव में बहादुरपुर सीट से चुने गये थे। लेकिन इस बार उन्हें वहां कुछ दिक्कत महसूस हुई तो उन्होंने हायाघाट से चुनाव लड़ना बेहतर समझा। 2015 में हायाघाट से जदयू के अमरनाथ गामी चुनाव जीते थे। अमरनाथ गामी इस सीट पर 2010 में भाजपा के टिकट पर जीते थे। लेकिन अब वे राजद में चले गयें हैं। राजद ने गामी को दरभंगा से उम्मीदवार बनाया है। इस तरह जब गामी की हायाघाट सीट खाली हुई तो भोला यादव को इस सीट से चुनाव लड़ने का मौका मिल गया। इसी तरह राजद के दलित नेता और विधायक शिवचंद्र राम को राजा पाकर की जगह पातेपुर से चुनाव मैदान में उतारा गया है। राजद के एक और विधायक को अपनी जीती हुई सीट छोड़नी पड़ी है। पिपरा के विधायक यदुवंश यादव निर्मली से चुनाव लड़ रहे हैं।

    सबसे अधिक प्रयोग राजद में

    सर्वे रिपोर्ट और गठबंधन के कारण राजद के 15 विधायकों का टिकट कट गया है। दो विधायकों के परिजनों के टिकट दिया गया है। इस तरह राजद के 17 विधायक चुनाव से पहले ही मैदान से बाहर हो गये हैं। राजद ने गोरेयाकोठी, तरैया, गड़खा, सहरसा, सिमरी बख्तियारपुर, मखदुमपुर, केसरिया बरौली, हरसिद्धि के सिटिंग विधायक के टिकट को काट कर नये उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। माले और सीपीआइ के कारण उसे अपनी सीत सीटों पर से दावा छोड़ना पड़ा। आरा के विधायक नवाज आलम, काराकाट के विधायक संजय यादव की सीट माले को दे दी गयी। पालीगंज के राजद विधायक जयवर्धन यादव जद यू में चले गये। यह सीट भी माले को गयी। झंझारपुर से राजद के गुलाब यादव जीते थे जहां से अब सीपीआइ चुनाव लड़ रही है। तेघड़ा से राजद के जीते वीरेन्द्र कुमार जदयू में चले गये। अब राजद की तेघड़ा सीट से सीपीआइ का उम्मीदवार चुनाव लड़ रहा है। इस बार प्रत्याशियों के चयन में सबसे अधिक प्रयोग राजद ने किये हैं।

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    English summary
    Bihar Assembly Elections 2020: Not Only Tej Pratap these 4 RJD leaders change their seat.
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