Brown Rice उत्पादन को बढ़ावा दे रही ओडिशा सरकार, सुंदरगढ़ की आदिवासी महिलाओं की इनकम भी बढ़ी
ओडिशा के सुंदरगढ़ में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच पारंपरिक और स्वस्थ भोजन की मांग लगातार बढ़ रही है। हस्क लीवर पौंड राइस, को उड़िया भाषा में 'ढिंकी कुटा चौला' (Dhinki Kuta Chaula) कहा जाता है।

डिमांड बढ़ने के बाद एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसी (ITDA), सुंदरगढ़ की तरफ से स्थानीय जनजातीय समुदायों की महिलाओं को पारंपरिक हस्क लीवर पौंड राइस यानी ब्राउन राइस (साबुत अनाज चावल) का उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। अनाज के विशेषज्ञों (connoisseurs) की नजर में ब्राउन राइस पसंदीदा अनाजों में से एक है।
ब्राउन राइस उत्पादन से महिलाओं की आय भी बढ़ सकेगी। ब्राउन राइस उत्पादन का यह कार्यक्रम 'वन धन विकास कार्यक्रम' (VDVK) का हिस्सा है। इसका मकसद अलग-अलग आदिवासी समुदायों के सदस्यों के लिए उनके पारंपरिक ज्ञान और विशेषज्ञता का उपयोग करके आजीविका के पर्याप्त अवसर पैदा करना है।
गौरतलब है कि फाइबर से भरपूर ब्राउन राइस सेहत के लिए फायदेमंद होने के कारण बाजार में महंगे दामों पर बिकते हैं। ITDA आदिवासी महिला स्वयंसहायता समूह (WSHGs) के सदस्यों को उच्च मूल्य वाले ब्राउन राइस के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए हस्क लीवर पौंड राइस (husk lever pounds) के साथ-साथ वजन और पैकेजिंग मशीन मुहैया करा कर प्रोत्साहित कर रहा है।
ITDA सुंदरगढ़ जिले के 9 ब्लॉकों में 18 VDVK इकाइयां स्थापित की गई हैं। 30 WSHGs की 300 महिलाओं को हर यूनिट से जोड़ा गया है। अब तक चार VDVK इकाइयों के बीच 600 हस्क लीवर पौंड वितरित किए जा चुके हैं। इससे 1200 महिलाओं को लाभ मिला है। गौरतलब है कि लीवर पाउंड राइस की बाहरी परत लाल होती है। इसमें फाइबर, प्रोटीन और आयरन जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। इस चावल के सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बनाए रखने में मदद मिलती है।
लेफ्रिपारा ब्लॉक के साहेबडेरा गांव की एक लाभार्थी चंचला नाइक ने कहा, हम VDVK प्रोग्राम के तहत ITDA से मिले हस्क लीवर पाउंड का उपयोग करके ब्राउन राइस का उत्पादन कर रहे हैं। उपज से हमें अच्छा रिटर्न मिल रहा है। हमें घरेलू बिल और बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाने में मदद कर रही है।












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