ओडिशा: बरगढ़ के किसानों का आरोप- 'धान खरीद के 3 साल बाद भी नहीं हुआ भुगतान'
बरगढ़ जिले के कई किसानों ने आरोप लगाया कि मंडियों से उनका धान उठाए हुए तीन साल बीत जाने के बावजूद उन्हें भुगतान नहीं मिला है। शुक्रवार को बरगढ़ स्थित डीआरडीओ कार्यालय में आयोजित धान खरीद की तैयारी बैठक में किसानों ने ये आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने अभी तक क्षेत्र के कुछ किसानों को भुगतान नहीं किया है। उन्होंने इस खरीफ सीजन के लिए धान की खरीद शुरू करने के लिए पहले की तारीख तय करने की भी मांग की।
हालांकि प्रशासन ने 25 नवंबर तक मंडियों से धान का उठाव शुरू करने का फैसला किया है, लेकिन अभी तक इसकी कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है।

मामले में किसान रमानी दांता ने कहा कि बैठक से हमें कोई फ़ायदा नहीं हुआ। हमारी प्राथमिक मांग यह थी कि तीन साल पहले हमने जो धान बेचा था, उसका पैसा सरकार से मिले। हमें अभी तक भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है। जबकि हमने बैठक के दौरान इस मामले को उठाया, कलेक्टर ने इस विषय को नजरअंदाज कर दिया और यह कहकर दूसरे विषय पर चले गए कि प्रशासन इस मामले पर बाद में चर्चा करेगा।
एक अन्य किसान सुरेश निकांती ने कहा कि हमने कलेक्टर से 15 नवंबर को मंडी खोलने का आग्रह किया। लेकिन बैठक में प्रशासन द्वारा कोई तारीख तय नहीं की जा सकी। हम नहीं जानते कि राज्य स्तरीय खरीद समिति (एसएलपीसी) के सभी सदस्य कौन हैं। इसलिए हम धान खरीद के दौरान शिकायत भी नहीं कर सकते।
मामले में बारगढ़ कलेक्टर मनीषा बनर्जी ने कहा कि हम मंडी को जल्दी नहीं खोलना चाहते क्योंकि इससे टोकन खत्म हो जाएंगे। एक बार जब कोई टोकन समाप्त हो जाता है, तो उसे पुनः सक्रिय करना एक लंबी और कठिन प्रक्रिया बन जाती है। वहीं धान खरीद में देरी को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सरकार की आलोचना की।
बारगढ़ के सांसद सुरेश पुजारी ने कहा कि राजस्व विभाग से आपूर्ति विभाग तक, आरएमसी से पैक्स तक और एसएचजी से मिलर्स तक, धान खरीद प्रक्रिया में बहुत सारे खिलाड़ी और लालफीताशाही शामिल हैं, जो इसे किसानों के लिए सिरदर्द बनाते हैं। राज्य सरकार को किसानों से सीधे उस पैसे से धान खरीदना चाहिए जो केंद्र इस उद्देश्य के लिए भुगतान करता है।












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