MP News: भोपाल में मंदिर की चौखट पर फूट-फूटकर रोई महिला, मंत्री से कहा- "बेरोजगारी से टूट गया परिवार"
Bhopal News: भोपाल की सड़कों और मंदिरों तक बेरोजगारी का दर्द गूंजने लगा है। रविवार को नरेला विधानसभा के दौरे पर निकले मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग को एक मंदिर में ऐसी ही करुण पुकार सुनने को मिली। खेड़ापति हनुमान मंदिर के बाहर एक महिला रोती हुई नजर आई, जिसे देख खुद मंत्री भी भावुक हो गए।
"भाई हूं, चिंता मत करना..."
मंत्री सारंग जब महिला के पास पहुंचे और रोने की वजह पूछी तो महिला ने रुंधे गले से बताया कि उसके पति वेल्डिंग का काम करते हैं, लेकिन काम नहीं मिलने से परिवार तंगी में है। घर खर्च चलाना मुश्किल हो गया है और बच्चों की स्कूल फीस भी नहीं भर पा रही।

मंत्री ने महिला को सांत्वना दी और कहा, "मैं तुम्हारा भाई हूं, तुम्हारे पति को मेरे पास भेजना। रोजगार का इंतजाम करूंगा। बच्चों की पढ़ाई भी नहीं रुकेगी।"
यह मार्मिक घटना रविवार, 23 मार्च 2025 की शाम को नरेला विधानसभा क्षेत्र के खेड़ापति हनुमान मंदिर में देखने को मिली। मध्य प्रदेश के खेल मंत्री विश्वास सारंग, जो अपने क्षेत्र के दौरे पर थे, ने इस महिला की व्यथा सुनी और उसे हरसंभव मदद का भरोसा दिया। इस दौरान माँ को रोते देख उसकी छोटी बेटी हाथ जोड़े खड़ी रही, जिसने मंत्री को भी भावुक कर दिया। यह घटना मध्यप्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी की एक कड़वी सच्चाई को सामने लाती है, जहाँ एक तरफ सरकार बड़े-बड़े आयोजनों के जरिए प्रदेश को विकसित बनाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर आम लोग आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।
मंदिर में रोती मिली महिला, मंत्री ने पूछा हाल
रविवार की शाम को खेल मंत्री विश्वास सारंग अपने विधानसभा क्षेत्र नरेला के दौरे पर थे। वे खेड़ापति हनुमान मंदिर में दर्शन करने पहुँचे। दर्शन के बाद जैसे ही वे मंदिर से बाहर निकलने लगे, उनकी नजर मंदिर की चौखट पर रोती हुई एक महिला पर पड़ी। मंत्री तुरंत उनके पास गए और पूछा, "बहन, क्या बात हो गई? बताओ, क्यों रो रही हो?" पहले तो महिला ने जवाब देने से इनकार किया और कहा, "कुछ नहीं।" लेकिन मंत्री ने प्यार से फिर पूछा, "कोई कष्ट है? कहाँ रहती हो?"
महिला ने रुंधे गले से जवाब दिया, "शिवनगर में रहती हूँ।" मंत्री ने फिर पूछा, "खेड़ापति भगवान के सामने क्यों रो रही हो? क्या बात है, बताओ, हम सब मिलकर तुम्हारी समस्या हल करेंगे।" काफी देर तक ढांढस बंधाने के बाद महिला ने अपनी आपबीती सुनाई।
"पति को काम नहीं मिल रहा, बच्चों की फीस भी नहीं भर पा रही"
महिला ने बताया कि उनके घर में भारी आर्थिक तंगी चल रही है। मंत्री ने पूछा, "आपके पति क्या काम करते हैं?" इस पर महिला ने कहा, "मेरे पति वेल्डिंग का काम करते हैं, लेकिन उनका काम-धंधा ठीक नहीं चल रहा। कई दिनों से उन्हें कोई काम नहीं मिला है।" उसने आगे बताया, "घर में इतनी तंगी है कि मैं अपने बच्चों की स्कूल फीस भी नहीं भर पा रही हूँ।"
महिला की बात सुनकर मंत्री भावुक हो गए। इस दौरान महिला की छोटी बेटी, जो अपनी माँ को रोते देख रही थी, हाथ जोड़े खड़ी थी। यह दृश्य देखकर वहाँ मौजूद लोग भी भावुक हो गए।
मंत्री का भरोसा: "पति को रोजगार देंगे, फीस भी माफ करवाएंगे"
महिला की व्यथा सुनने के बाद मंत्री विश्वास सारंग ने उसे ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा, "चिंता मत करो, पति देव को मेरे पास भेजना। उनके रोजगार की व्यवस्था करेंगे और तुम्हारी मदद भी करेंगे। तुम्हारा भाई तुम्हारे साथ है।" मंत्री ने पूछा, "कितने बच्चे पढ़ते हैं? कोई दिक्कत तो नहीं?"
महिला ने बताया कि उसके दो बच्चे हैं, लेकिन वह उनकी फीस नहीं भर पा रही। इस पर मंत्री ने कहा, "आप पति देव को भेजना, आपकी समस्याएँ भाई हल कराएगा। बच्चों की फीस भी माफ करवाएँगे। चिंता मत करो, खेड़ापति हनुमान जी सबके पालनहार हैं, सबकी मदद करेंगे।"
मंत्री ने तत्काल महिला को आर्थिक सहायता दी और उसके पति को रोजगार उपलब्ध कराने का वादा किया। साथ ही, उन्होंने बच्चों की स्कूल फीस माफ करवाने का भी भरोसा दिया। मंत्री ने कहा, "खेड़ापति हनुमान जी ने ही मुझे तुम्हारी मदद के लिए भेजा है।" इस आश्वासन के बाद महिला की चिंता कुछ कम हुई, और उसने राहत की साँस ली।
बेरोजगारी की मार: मध्यप्रदेश में चरम पर हालात
यह घटना मध्यप्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी की एक कड़वी सच्चाई को सामने लाती है। एक तरफ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बड़े-बड़े आयोजनों और निवेश सम्मेलनों के जरिए प्रदेश को विकसित बनाने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर आम लोग आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। मध्यप्रदेश में बेरोजगारी दर पिछले कुछ सालों में लगातार बढ़ी है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (CMIE) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, मध्यप्रदेश में बेरोजगारी दर 2024 में 6.5% तक पहुँच गई थी, जो राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है।
भोपाल जैसे शहरों में भी रोजगार के अवसर सीमित हैं, जिसके चलते छोटे-मोटे काम करने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सरकार की नीतियाँ जमीनी स्तर तक पहुंच पा रही हैं?
सोशल मीडिया पर चर्चा
यह घटना सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई है। कई लोगों ने मंत्री विश्वास सारंग की तारीफ की है, जिन्होंने तुरंत महिला की मदद का भरोसा दिया। एक यूजर ने लिखा, "विश्वास सारंग जी ने जो संवेदनशीलता दिखाई, वह काबिल-ए-तारीफ है। ऐसे नेताओं की जरूरत है।" वहीं, कुछ लोगों ने सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा, "जब तक बेरोजगारी का समाधान नहीं होगा, तब तक ऐसी घटनाएँ सामने आती रहेंगी। सरकार को बड़े आयोजनों से ज्यादा रोजगार पर ध्यान देना चाहिए।"
एक उम्मीद की किरण
महिला की इस कहानी ने भले ही मध्यप्रदेश में बेरोजगारी की कड़वी सच्चाई को उजागर किया हो, लेकिन मंत्री विश्वास सारंग के इस कदम ने एक उम्मीद की किरण भी जगाई है। उनके इस संवेदनशील रवैये ने न सिर्फ उस महिला को राहत दी, बल्कि यह भी दिखाया कि अगर नेता चाहें, तो जमीनी स्तर पर बदलाव लाया जा सकता है। अब देखना यह है कि क्या मंत्री अपने वादे को पूरा कर पाते हैं, और क्या यह घटना सरकार को बेरोजगारी के मुद्दे पर गंभीरता से सोचने के लिए मजबूर करेगी?












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