पर्ची में ऊपर श्रीहरि लिखो और फिर क्रोसिन लिख दो, CM शिवराज ने डॉक्टरों को क्यों दी ऐसी सलाह, जानिए पूरा मामला

सीएम शिवराज ने कहा कि यह मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय है कि हिंदी में मेडिकल व इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराने वाला पहला राज्य बना है। सीएम ने कहा कि मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में होने से कुछ नहीं बदल रहा सिर्फ भाषा हिंदी होगी,

भोपाल,15 अक्टूबर। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने भोपाल के भारत भवन में चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित "हिंदी की व्यापकता एक विमर्श" कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौके पर सीएम शिवराज ने कहा कि यह मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय है कि हिंदी में मेडिकल व इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराने वाला पहला राज्य बना है। सीएम ने कहा कि मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में होने से कुछ नहीं बदल रहा सिर्फ भाषा हिंदी होगी, बाकी जैसे पढ़ाई होती थी, वैसे ही होगी। सीएम शिवराज ने डॉक्टरों को सलाह भी दी उन्होंने कहा कि गांव गांव में डॉक्टरों की जरूरत है। दवाई का नाम पर्ची में हिंदी में क्रॉसिंग क्यों नहीं लिखा जा सकता। उसमें क्या दिक्कत है? ऊपर श्रीहरि लिखो और फिर क्रोसिन लिख दो। सीएम ने कहा कि मुझे मातृभाषा बोलने में गर्व का एहसास होता है। मैंने यूएसए से लेकर यूके तक हिंदी में भाषण दिया और उन लोगों ने मुझे अंग्रेजी बोलने वालों से ज्यादा सम्मान और इज्जत दी है।

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    रूस,जापान, चीन, जर्मनी, इटली जैसे देशों में अंग्रेजी कहां है : CM

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    मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमारे देश में ही अंग्रेजी को प्राथमिकता दी गई है बाकी यूक्रेन रूस,जापान, चीन, इटली जर्मनी में अंग्रेजी कहां है। अब भारत में भी मेडिकल की पढ़ाई मातृभाषा में होगी देश में इसकी शुरुआत मध्य प्रदेश से हो रही है यह मेरे लिए गर्व की बात है और इसके प्रणेता देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी है। प्रदेश के 97 डॉक्टरों की टीम ने 4 महीने में रात दिन काम कर अंग्रेजी किताबों का हिंदी में अनुवाद किया है। रविवार को यानी 16 अक्टूबर को अमित जी लाल परेड ग्राउंड में इन किताबों का विमोचन करेंगे।

    MBBS फर्स्ट ईयर की किताबों का ट्रांसलेटड वर्जन तैयार

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    चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने बताया कि मध्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर और हिंदी के जानकारों ने एमबीबीएस फर्स्ट ईयर की किताबों का ट्रांसलेटड वर्जन तैयार किया है। इस पूरे प्रोजेक्ट को मंदार नाम दिया गया है। मंत्री सारंग ने इसके पीछे की वजह ये बताई कि जिस प्रकार समुद्र मंथन में मंदार पर्वत के सहारे अमृत निकाला गया था ठीक उसी प्रकार से अंग्रेजी की किताबों का हिंदी अनुवाद करके इस पाठ्यक्रम को तैयार किया गया है। इन किताबों को इस प्रकार से तैयार किया गया है कि जिसमें शब्द के मायने हिंदी में ऐसे ना बदल जाए कि उसे समझना मुश्किल हो।

    जैसे स्पाइन को सभी समझते हैं उसे हिंदी अनुवाद में मेरुदंड नहीं लिखा गया, बल्कि किताबों को ऐसी अनुवाद तैयार किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र से हिंदी में पढ़ाई कर एमबीबीएस में दाखिला लेने वाले छात्र आसानी से पढ़ समझ सके।

    मातृभाषा में मेडिकल की पढ़ाई कराने वाले देशों में शामिल हुआ भारत

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    मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि मुझे खुशी है कि दुनिया के उन देशों में भारत शामिल हो गया है जो अपनी मातृभाषा में मेडिकल की पढ़ाई कर आते हैं इसकी शुरुआत मध्य प्रदेश से हो रही है। सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आवन पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह काम चिकित्सा विभाग को दिया था हमने 97 डॉक्टरों के साथ कंप्यूटर ऑपरेटर की टीम बनाई। इस टीम ने 24 घंटे सातों दिन लगातार एमबीबीएस के हिंदी पाठ्यक्रम के लिए मेहनत की।

    मंत्री सारंग ने बताया कि भोपाल के मेडिकल कॉलेज से इसकी शुरुआत करेंगे लेकिन अब किताबे पर्याप्त मात्रा में तैयार हो गई हैं। इसलिए उसे प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज में लागू करने का प्रयास करेंगे। हमारी कोशिश है कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में भी हिंदी एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू हो।

    सीएम ने हिंदी में मेडिकल पाठ्यक्रम प्रारंभ होने के संबंध में दिया संदेश

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    बच्चे जन्म लेते ही अपनी मातृभाषा में सीखने लगते हैं और उनकी प्रतिभा का यह प्रकटीकरण अपनी मातृभाषा में ही हो सकता है और इसलिए हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मातृभाषा में ही प्राथमिक और उच्च शिक्षा देने का संकल्प प्रकट किया है।

    वे बच्चे जो अंग्रेजी न समझने के कारण प्रतिभावान होते हुए भी पीछे रह जाते हैं, उनकी प्रतिभा कुंठित हो जाती है, सहज रूप से उनका स्वाभाविक विकास नहीं होता, उन बच्चों को भी मेडिकल की शिक्षा हिंदी में देने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने प्रयास प्रारंभ किए। मुझे यह बताते हुए खुशी है कि हमने मेडिकल की पढ़ाई भी हिंदी में कराने के लिए पाठ्य पुस्तकें तैयार कर ली हैं। अब अंग्रेजी की बाध्यता व अनिवार्यता नहीं रही।

    भाषा में शब्दों के चयन में अगर हम व्यावहारिक नहीं होंगे तो हम हो जाएंगे फेल

    भाषा में शब्दों के चयन में अगर हम व्यावहारिक नहीं होंगे तो हम हो जाएंगे फेल

    सीएम शिवराज ने कहा कि हमारे बच्चों में प्रतिभा है, क्षमता है, योग्यता है। कोई कमी नहीं है, केवल अंग्रेजी भाषा नहीं जानने के कारण वे कुंठित हो जायें, वे यह समझें कि मेरी जिंदगी बेकार है, तो मैं यह समझता हूं कि ऐसी अंग्रेजी को धिक्कार है। मैं मानता हूं कि हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई के रूप में एक नये युग का प्रारंभ हो रहा है, वो भी भोपाल से।

    भोपाल में कई कार्य हुए, स्वच्छता में भी भोपाल ने बाजी मारी, देश की सबसे स्वच्छतम राजधानी भोपाल है। भाषा में शब्दों के चयन में अगर हम व्यावहारिक नहीं होंगे तो हम फेल हो जाएंगे। हमने निश्चित किया कि रोजमर्रा शब्दों को ही चलने दिया जाए, बस अपनी लिपि देवनागरी होगी। अलग-अलग विचारों का हमने हमेशा स्वागत किया है। तेलुगु, मलयालम, मराठी... सबकी अपनी-अपनी विशेषताएं हैं।

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