Bhopal: MCU के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, बोले- प्रेस का काम एजेंडा सेट करना नहीं
Bhopal News: माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय (MCU) का चतुर्थ दीक्षांत समारोह आज आयोजित किया गया। जहां दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में जनसंपर्क मंत्री राजेंद्र शुक्ला भी शामिल हुए।
कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कार्यक्रम में ऑनलाइन शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान एमसीयू के नवीन परिसर का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में कुलपति केजी सुरेश, रजिस्टर अविनाश वाजपेयी सहित प्रोफेसर अधिकारी व कर्मचारियों के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल हुए। दीक्षांत समारोह में जून 2018 में दिसंबर जनवरी 2023 तक पास हुए मास्टर के 450 से अधिक विद्यार्थियों को डिग्री दी गई।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कार्यक्रम में कहा कि देश के विकास को राजनीति के चश्मे से नहीं देखना चाहिए। विकास की चर्चा का यह मतलब नहीं है कि किसी राजनीतिक दल की तारीफ करना है। विकास देश का हो रहा है। उसका लाभ सभी को मिलता है। पत्रकार का काम किसी राजनीतिक दल का हितकारी होना नहीं होता। उसका काम कोई एजेंडा सेट करना नहीं होता। प्रेस की स्वतंत्रता तभी हो सकती है जब वह सकारात्मक हो।
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उन्होंने कहा कि अभी व्यक्ति की जितनी आजादी भारत में उतनी दुनिया की किसी देश में नहीं है। महिलाओं का सशक्तिकरण हुआ है। चंद्रयान-3 चांद पर पहुंच गया है। दुनिया ने हमारी तारीफ की है। पत्रकारों को गहराई में जाकर यह देखना चाहिए इसरो ने यह सफलता कैसे हासिल की।

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता के चौथे दीक्षांत उमराव में उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज से 10 साल पीछे का दृश्य अच्छी हमारे समाज एक चित्र था एक दौर था दुनिया में पांच कमजोर देश थे। उनको फ्रजाईल 5 कहा जाता था। वह दुनिया पर भोज बने हुए थे। यह देश थे- साउथ अफ्रीका, तुर्की, ब्राजील, इंडोनेशिया और अपना महान भारत, लेकिन सितंबर 2022 में भारत दुनिया की 5वी आर्थिक महाशक्ति बना।

अभी हाल ही में ही g-20 का सम्मेलन दिल्ली में आयोजित हुआ। इसमें मुझे कई राष्ट्रीय अध्यक्षों से मिलने का मौका मिला। कुछ बातें ऐसी सामने आई जिन्हें पत्रकारों को फ्रेंड में रखना चाहिए कुरीतियों को दूर करने में आपका बहुत बड़ा योगदान है हमारे संविधान में मौलिक अधिकार के साथ मौलिक दायित्व है। मीडिया अगर ठान लो तो देश की सड़कों पर अनुशासन दिखेगा। आपकी ताकत बहुत ज्यादा है, बस समझने की आवश्यकता है। हमारे पत्रकार प्रतिभाशाली हैं खबर वह है जो लोग छुपाना चाहते हैं 80 के दशक में खोजी पत्रकारिता थी, जो अब खत्म हो गई है। कई विदेशी चैनल पर डिबेट और डिस्कशन देखकर ऐसा लगता है कि सुनते-देखते रहो। लेकिन अपने यहां का हाल देखो, मेरे से ज्यादा आप जानते कितनी अनैतिक भाषा का उपयोग होता है।












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