खंडवा में दुर्गा विसर्जन के दौरान कैसे गिरी ट्रैक्टर-ट्रॉली, ड्राइवर फरार, ग्रामीणों की बहादुरी ने बचाईं जानें
विजयादशमी का पावन पर्व, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में एक ऐसी त्रासदी बन गया जिसने पूरे राज्य को सिहरा दिया। पंधाना क्षेत्र के जामली गांव के पास अर्दला तालाब में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान एक ट्रैक्टर-ट्रॉली अचानक पलट गई, और उसमें सवार 35-40 आदिवासी श्रद्धालु - ज्यादातर बच्चे, महिलाएं और युवा - गहरे पानी में समा गए।
हादसे में 8 मासूम बच्चियों समेत 11 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 3 घायल अभी भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो तालाब की गहराई 50 फीट से अधिक थी, और ट्रैक्टर के पलटते ही चीखें गूंज उठीं। ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर 9 लोगों को बचाया, लेकिन ड्राइवर दीपक किराड़े फरार हो गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शोक जताते हुए मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की।
हादसे की पूरी कड़ियां: विसर्जन का जश्न, तालाब का कहर
3 अक्टूबर 2025, गुरुवार शाम करीब 3:30 बजे। खंडवा जिले के पंधाना तहसील के राजगढ़ गांव के पाडला फाटा फलिया से एक जुलूस निकला। आदिवासी बहुल इस इलाके में दुर्गा माता की भव्य प्रतिमा को विसर्जन के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लादा गया। ट्रॉली पर ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते-गाते 35-40 लोग सवार थे - 7 साल के मासूम से लेकर 25 साल के युवा तक। ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे, जो उत्साह से भरे मूर्ति को तालाब तक ले जा रहे थे। अर्दला तालाब के किनारे पहुंचते ही चालक ने ट्रैक्टर को कच्चे पुल पर रोका, ताकि मूर्ति उतारी जा सके।
लेकिन अगले ही पल त्रासदी घटी। प्रत्यक्षदर्शी प्रदीप जगधन्ने ने बताया, "ट्रैक्टर तालाब किनारे पहुंचा तो अचानक असंतुलन हो गया। कच्चा पुल फिसलन भरा था, और ट्रॉली भारी होने से पलट गई। 50 फीट गहरे पानी में सब गिर पड़े। चीखें सुनकर हम दौड़े, 10-15 ग्रामीणों ने छलांग लगा दी। हमने 9 लोगों को बाहर निकाला और पंधाना अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने 3 को खंडवा रेफर कर दिया।
हादसे के ठीक बाद शाम 5:30 बजे पुलिस-प्रशासन की टीमें पहुंचीं। जेसीबी और क्रेन से रेस्क्यू शुरू हुआ, जो रात 8:30 बजे तक चला। खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने कहा, "ऑपरेशन में एसडीआरएफ की मदद ली गई। सभी शव रात में ही पीएम के लिए भेजे गए।" पंधाना सिविल सर्जन अनिरुद्ध कौशल ने बताया, "खंडवा से डॉक्टरों की टीम बुलाकर रात में ही पोस्टमॉर्टम कराया गया।
मृतकों में 8 बच्चियां (7-15 साल) शामिल हैं, जबकि बाकी युवा। 10 लोग तैरकर बाहर आ गए, लेकिन बाकी ग्रामीणों और टीमों ने बचाए। ट्रैक्टर ड्राइवर दीपक किराड़े ने हादसे के बाद भागने का सहारा लिया, और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।
पीड़ितों की कहानी: मासूमों का सपना अधूरा, परिवारों का मातम
यह हादसा आदिवासी समुदाय को सबसे ज्यादा आहत कर गया। मृतकों में 15 साल की राधा (बदला नाम), जो स्कूल जाती थी, और 7 साल की सीता जैसी मासूमियां शामिल हैं। एक परिवार के मुखिया, रामू भील ने रोते हुए कहा, "बेटियां मूर्ति विसर्जन देखने गईं, लौटीं नहीं। घर में रोना-धोना मच गया। सरकार की मदद तो मिलेगी, लेकिन बच्चे कैसे वापस आएंगे?" एक अन्य ग्रामीण ने बताया, "ट्रॉली ओवरलोड थी, और कच्चा रास्ता खतरनाक। फिर भी उत्साह में कोई नहीं रुका।" घायलों - दो युवा और एक बच्चा - का इलाज खंडवा जिला अस्पताल में चल रहा है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया: अनुग्रह राशि, लेकिन सवाल बाकी
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक्स पर शोक जताते हुए कहा, "खंडवा हादसा अत्यंत दुखद। मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख, घायलों को मुफ्त इलाज।" कलेक्टर गुप्ता ने जांच के आदेश दिए। लेकिन विपक्ष ने लापरवाही का आरोप लगाया - कच्चे पुल पर ट्रैक्टर क्यों? सुरक्षा क्यों नाकाम? विशेषज्ञों का कहना है कि आदिवासी इलाकों में तालाब-नदी घाटों पर रेलिंग और चेतावनी बोर्डों की कमी बड़ी समस्या।
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