Shahdol: अस्पताल से नहीं मिली एंबुलेंस तो मां की लाश को लकड़ी से बांध मोटरसाइकिल पर घर ले गए बेटे'

शहडोल, 1 अगस्त। मध्य प्रदेश अजब हैं ये कहावत यूं ही नहीं कही जाती है। कहने को तो यहां की सड़कें अमेरिका जैसी हैं, शहर स्मार्ट हो गये हैं और पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हैं। लेकिन मरीज के मरने के बाद शव को घर पहुंचाने के लिए शव वाहन तक नहीं मिल पाता। ताजा मामला मध्य प्रदेश के शहडोल से सामने आया है। शहडोल मेडिकल कॉलेज में रविवार को 1 महिला की मौत के बाद जिला अस्पताल ने शव को घर ले जाने के लिए मृतक के परिवार वालों को शव वाहन तक उपलब्ध नहीं करा पाए।इसके बाद बेटों को मां का शव लकड़ी की पटरी में बाधकर मोटरसाइकिल से शहडोल जिले से पड़ोसी जिले अनूपपुर तक 80 किमी दूर अपने घर ले जाना पड़ा।

मजबूर परिजनों ने बताया कि अस्पताल में न इलाज मिला और न ही मौत के बाद शव वाहन उपलब्ध कराया गया। प्राइवेट शव वाहन वाले ने 4-5 हजार रुपए मांग रहे थे। लेकिन परिजनों के पास इतने पैसे नहीं थे। आखिरकार बेटों ने मां के शव को बाइक पर घर ले जाना सही समझा। मृतक महिला के बेटों का आरोप है कि अनुपपुर जिले से शहडोल मेडिकल कॉलेज में अपनी मां का इलाज कराने आए थे। लेकिन यहां समुचित इलाज नहीं मिलने से उनकी मां की मौत हो गई। इसके बाद उनको शव वाहन चाहिए था। जो मांगने पर भी अस्पताल के द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बाद बेटों ने सौ रुपए की 1 लकड़ी की पटिया खरीदी और उसके ऊपर शव को बांधकर साइकल से 80 किलोमीटर का सफर तय कर अनूपपुर जिले के ग्राम गुड़ारू अपने घर पहुंचे।

न मिला इलाज न मिला शव वाहन

न मिला इलाज न मिला शव वाहन

अनूपपुर जिले के गुडारू गांव की रहने वाली महिला जयमंत्री यादव को सीने में दर्द होने के कारण बेटों ने उपचार जिला अस्पताल शहडोल में भर्ती कराया था। जहां हालत खराब होने के कारण मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया गया। उपचार के दौरान देर रात उनकी मौत हो गई। मृतका के बेटे सुंदर यादव ने जिला अस्पताल की नर्सों पर लापरवाही से इलाज करने का आरोप लगाते हुए मां की मौत के लिए मेडिकल अस्पताल प्रबनधन को जिम्मेदार ठहराया है।

100 रुपये की लकड़ी की पटरी खरीद बाइक पर शव रखा

100 रुपये की लकड़ी की पटरी खरीद बाइक पर शव रखा

महिला की मौत के बाद शव को घर ले जाने के लिए शव वाहन की मांग की, लेकिन शव नहीं मिलने और पैसे न होने के कारण बेटों ने 100 रुपए की 1 लकड़ी की पटरी खरीदकर किसी तरह से मां का शव बाइक में बांधकर शहड़ोल से अनूपपुर जिले के गुड़ारु गांव पहुंचे।

धरती में नरक देखना है तो शहड़ोल के मेडिकल आइए

धरती में नरक देखना है तो शहड़ोल के मेडिकल आइए

मृतका के परिजनों का आरोप है कि कहने को तो शहड़ोल संभाग का सबसे बड़ा सर्व सुविधायुक्त मेडिकल कॉलेज है, लेकिन यहां लोगों को अच्छा उपचार तो छोड़िये मरने पर शव वाहन भी नहीं मिलता। सुविधाओं के नाम पर बस यहां खानापूर्ति होती है।

मेडिकल कॉलेज में नहीं है शव वाहन

मेडिकल कॉलेज में नहीं है शव वाहन

मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक नागेंद्र सिंह के अनुसार एंबुलेंस की सुविधा नहीं है और ना ही शव वाहन है। 2 एंबुलेंस दी गई है। जिनके रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया की जा रही है रजिस्ट्रेशन के बाद ही मरीजों को सुविधा दी जाएगी।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

इस दौरान किसी ने घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिए. अब ये वायरल हो गए हैं। लोग इन्हें देखकर तरह-तरह के प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि ये स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही है। जिसकी वजह से ये हुआ है उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। कई लोगों ने इस घटना को लेकर सरकारी व्यवस्था की आलोचना भी की

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