Satna: अंतर्राष्ट्रीय वुशू स्मार्थ में गोल्ड जीतकर घर लौटी गीतांजलि त्रिपाठी का हुआ भव्य स्वागत
सतना, 11 अगस्त। जिले की वुशु खिलाड़ी गीतांजलि त्रिपाठी घर लौटने पर सतना शहर में शानदार स्वागत किया गया। गीतांजलि अंतर्राष्ट्रीय वुशु स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर घर लौटी हैं। उनके स्वागत में जिले के गणमान्य नागरिक, परिवार और परिचितों के साथ आम लोग और सांसद गणेश सिंह भी मौजूद थे। ऐसा स्वागत देख गीतांजलि की आंखें भर आयीं। गीतांजलि 12 वर्ष की आयु में माता-पिता से दूर रही और आज देश की लाडो बन गयी।
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जॉर्जिया में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय वुशु गेम्स में 7 अगस्त को तिरंगे के साथ 1 युवा खिलाड़ी जब विक्ट्री स्टैंड पर खड़ी हुई तो पूरे विंध्य क्षेत्र समेत जिले का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। गले मेले में गोल्ड मेडल था। वो लाडो सतना जिले के रामपुर बाघेलान के ग्राम करही की गीतांजलि थी। जिसने वुशु स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीत कर देश का मान बढ़ाया था। आज गीतांजलि सतना लौटीं तो उनका यहां भव्य स्वागत हुआ। भारत माता के जयकारे लगे। सांसद गणेश सिंह ने गीतांजलि की आगवानी की और सम्मान के साथ साथ हौसला अफजाही किए।
सातवीं कक्षा से माता-पिता से दूर
गीतांजलि जब महज 7वीं कक्षा में थीं तभी से वुशु की ट्रेनिंग के लिए अपने माता-पिता से दूर हो गयी थीं। उसके बाद शुरू हुआ उनका सफर, सफलता के कई मुकाम तक पहुंचा. उन्होंने कई राष्ट्रीय स्पर्धाएं और अब वुशु इंटरनेशनल प्रतियोगिता जीत कर लौटी हैं। गीतांजलि का कहना है मेरे लिए वो क्षण यादगार हैं जब तिरंगा सामने लहरा रहा था। 1 तिरंगा मेरे बदन पर था और राष्ट्रगान बज रहा था. अब गीतांजलि एशियन गेम्स की तैयारी में जुट जाएंगी।

बेटियों के लिए एक पिता की सलाह
गीतांजलि 3 बहन और 2 भाई हैं। पिता विनोद त्रिपाठी सीधी में पुलिस विभाग में एएसआई हैं। गीतांजलि ने अब एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल का लक्ष्य निर्धारित किया है। बेटी की सफलता पर माता-पिता खुशी से भावुक हैं। उनका कहना है बेटियों की जगह चार दीवारी में नही बल्कि बाहर भी है। बस उन्हें मौका देने और विश्वास करने की जरूरत है। गीतांजलि एसएससी में नौकरी कर रही हैं। खेल कोटे से ही वो देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।









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