MP के शहडोल में 3000 रुपए रिश्वत लेते कैसे रंगे हाथों पकड़ा गया सहायक राजस्व निरीक्षक इंद्र बहादुर सिंह, जानिए
मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त संगठन की सख्ती एक बार फिर सामने आई है। महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत रीवा संभाग की लोकायुक्त टीम ने शहडोल जिले में एक बड़ी ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया।
धनपुरी नगर पालिका परिषद के सहायक राजस्व निरीक्षक इंद्र बहादुर सिंह को 3000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। यह कार्रवाई उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज सिंह के मार्गदर्शन और पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में 13 अक्टूबर 2025 को धनपुरी नगर पालिका कार्यालय में की गई।

आरोपी ने शिकायतकर्ता योगेंद्र मेहरा से उनके पिता के मकान निर्माण कार्य को शुरू करने की अनुमति देने के नाम पर 5000 रुपये की रिश्वत मांगी थी, जिसमें से 2000 रुपये पहले ही ले लिए गए थे। शेष 3000 रुपये की रिश्वत लेते समय लोकायुक्त ने उसे धर दबोचा। इस कार्रवाई ने न केवल भ्रष्टाचार पर नकेल कसी, बल्कि आम जनता में विश्वास जगाया कि शिकायत का त्वरित जवाब मिलेगा।
मामला दर्ज कर आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7 के तहत कार्रवाई शुरू हो गई है। यह घटना मध्य प्रदेश में बढ़ते भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की ताबड़तोड़ कार्रवाइयों का हिस्सा है, जो हाल ही में भोपाल में सहायक आबकारी आयुक्त आलोक खरे के खिलाफ अभियोग पत्र दाखिल करने के बाद और चर्चा में है।
ट्रैप का पूरा घटनाक्रम: शिकायत से कार्रवाई तक
शिकायतकर्ता योगेंद्र मेहरा (26 वर्ष), निवासी सिद्दीकी कॉलोनी, वार्ड नंबर 2, धनपुरी, जिला शहडोल, ने 9 अक्टूबर 2025 को लोकायुक्त कार्यालय रीवा में लिखित शिकायत दर्ज की। उन्होंने बताया कि उनके पिता गया प्रसाद मेहरा सिद्दीकी कॉलोनी में मकान बना रहे हैं। सहायक राजस्व निरीक्षक इंद्र बहादुर सिंह ने निर्माण कार्य को गैरकानूनी बताकर रोक दिया और काम शुरू करने की अनुमति के लिए 5000 रुपये की रिश्वत मांगी। इसमें से 2000 रुपये पहले ही दे दिए गए थे, लेकिन शेष 3000 रुपये की मांग बार-बार की जा रही थी।
लोकायुक्त रीवा ने शिकायत मिलते ही सत्यापन शुरू किया। सत्यापन के दौरान पुष्टि हुई कि इंद्र बहादुर सिंह ने योगेंद्र से 3000 रुपये की रिश्वत मांगी। इसके बाद, 13 अक्टूबर 2025 को पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में एक ट्रैप टीम गठित की गई। टीम का नेतृत्व उप पुलिस अधीक्षक प्रवीण सिंह परिहार ने किया, जिसमें निरीक्षक संदीप सिंह भदौरिया, प्रधान आरक्षक सुरेश कुमार, मुकेश मिश्रा, पवन पाण्डेय, आरक्षक शाहिद खान और शिवेंद्र मिश्रा शामिल थे।
13 अक्टूबर का ऑपरेशन:
- स्थान: धनपुरी नगर पालिका परिषद कार्यालय, इंद्र बहादुर सिंह का कक्ष।
- समय: दोपहर करीब 1:30 बजे।
- विवरण: योगेंद्र मेहरा को रिश्वत की राशि (3000 रुपये) के साथ ट्रैप के लिए तैयार किया गया। नोटों पर विशेष रासायनिक पाउडर लगाया गया था। जैसे ही इंद्र बहादुर ने रिश्वत ली, लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। रासायनिक टेस्ट में उनके हाथों पर निशान पाए गए, जो रिश्वत लेने का सबूत था।
आरोपी को तत्काल हिरासत में लिया गया। धनपुरी थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। प्रारंभिक पूछताछ में इंद्र बहादुर ने रिश्वत लेने की बात स्वीकारी, लेकिन दावा किया कि यह "उपहार" था। लोकायुक्त ने दस्तावेज और गवाहों के बयान दर्ज कर जांच तेज कर दी है।
ट्रैप की टाइमलाइन
लोकायुक्त का भ्रष्टाचार पर प्रहार: महानिदेशक योगेश देशमुख की सख्ती
महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख ने हाल के महीनों में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। रीवा संभाग में यह दूसरी बड़ी ट्रैप कार्रवाई है। इससे पहले, अगस्त 2025 में सतना में एक पटवारी को 10,000 रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया था। देशमुख ने कहा, "लोकायुक्त संगठन भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। कोई भी बख्शा नहीं जाएगा।" उनकी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत 2025 में अब तक 45 से अधिक ट्रैप कार्रवाइयां हो चुकी हैं, जिनमें 30 सरकारी कर्मचारी पकड़े गए।
उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज सिंह ने कहा, "यह कार्रवाई आम जनता को संदेश देती है कि शिकायत करें, हम तुरंत एक्शन लेंगे।" रीवा संभाग में लोकायुक्त ने पिछले 6 महीनों में 12 ट्रैप किए, जिनमें राजस्व, नगर पालिका और पुलिस विभाग के कर्मचारी शामिल हैं। यह कार्रवाई भोपाल में सहायक आबकारी आयुक्त आलोक खरे के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में अभियोग पत्र दाखिल होने के बाद और महत्वपूर्ण हो जाती है।
शिकायतकर्ता की कहानी: निर्माण रुकवाने की धमकी
योगेंद्र मेहरा ने वन इंडिया हिंदी को बताया, "मेरे पिता का मकान निर्माण अंतिम चरण में था। इंद्र बहादुर ने बिना कारण काम रुकवाया और कहा कि अनुमति के लिए 5000 रुपये चाहिए। मैंने 2000 दे दिए, लेकिन फिर भी तंग किया।" योगेंद्र ने लोकायुक्त को चुना, क्योंकि "स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं था।" उनकी शिकायत और साहस ने इस कार्रवाई को संभव बनाया।
सिद्दीकी कॉलोनी के निवासियों ने बताया कि नगर पालिका में रिश्वतखोरी आम है। एक स्थानीय दुकानदार ने कहा, "निर्माण कार्य, दुकान लाइसेंस - हर चीज के लिए रिश्वत मांगी जाती है।" इस घटना ने धनपुरी में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी है।
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