OBC आरक्षण पर सियासत: मंत्री कृष्णा गौर ने कांग्रेस पर साधा निशाना, कहा- भावनाओं के साथ खेल रही है कांग्रेस
MP News: मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27% आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर सियासी गलियारों में छाया हुआ है। इस बार, बीजेपी की वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश की मंत्री कृष्णा गौर ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस OBC आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर न केवल राजनीति कर रही है, बल्कि OBC समुदाय की भावनाओं के साथ खिलवाड़ भी कर रही है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है और सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होकर OBC के हक में पक्ष रखने की अपेक्षा की जा रही है।

कृष्णा गौर का कांग्रेस पर हमला
मंत्री कृष्णा गौर ने अपने बयान में कहा, "मुझे बहुत दुख और आश्चर्य है कि OBC आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर कांग्रेस किस प्रकार OBC वर्ग की भावनाओं के साथ खेल रही है।" उन्होंने कांग्रेस के उस दावे को पूरी तरह गलत बताया, जिसमें कहा गया कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 13% आरक्षण को होल्ड करने का आदेश नहीं दिया था। गौर ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट ने 27% आरक्षण को लागू करने की अनुमति दी थी, लेकिन इस शर्त के साथ कि 13% हिस्सा होल्ड पर रहेगा।
उन्होंने कहा, "हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि यदि 13% हिस्सा होल्ड नहीं किया गया, तो हर भर्ती विज्ञापन पर स्थगन आदेश जारी हो सकता था। बाद में, हाईकोर्ट ने रोस्टर को ही स्थगित कर दिया। यह तथ्य एडवोकेट जनरल ने विपक्ष के वकीलों के साथ सामूहिक चर्चा में स्पष्ट किए थे।"
सुप्रीम कोर्ट में एकजुटता की कोशिश
कृष्णा गौर ने बताया कि एडवोकेट जनरल की बैठक में विपक्षी दलों के वकीलों ने सहमति जताई थी कि वे सुप्रीम कोर्ट में OBC के 27% आरक्षण और 13% होल्ड की गई सूची को अनहोल्ड करने के लिए दो वकीलों के नाम सुझाएंगे। ये वकील राज्य सरकार के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखेंगे। इसके अलावा, विपक्षी वकीलों को यह भी नोट देना था कि 13% आरक्षण को अनहोल्ड करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
लेकिन, गौर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस सहमति का पालन नहीं किया। इसके बजाय, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा पर सवाल उठाए। गौर ने इसे कांग्रेस की दोहरी नीति करार देते हुए कहा, "यह स्पष्ट है कि कांग्रेस को OBC के हितों की कोई चिंता नहीं है। वे केवल राजनीति करना चाहते हैं।"
सरकार की प्रतिबद्धता: 27% आरक्षण और 13% सूची पर जोर
मंत्री गौर ने दोहराया कि राज्य सरकार OBC के 27% आरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, "हम सुप्रीम कोर्ट में दो मुद्दों पर मजबूती से पक्ष रखेंगे: पहला, OBC को 27% आरक्षण सुनिश्चित हो, और दूसरा, 13% होल्ड की गई सूची को अनहोल्ड करने की अनुमति मिले।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी राजनीतिक दलों को एकजुट करने की कोशिश की थी, ताकि सुप्रीम कोर्ट को यह संदेश जाए कि यह मुद्दा सभी दलों और जनता की साझा मांग है।
लेकिन, गौर ने अफसोस जताया कि कांग्रेस ने इस एकजुटता को तोड़ने की कोशिश की और मामले को उलझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा, "कांग्रेस की मंशा साफ है कि वे न तो OBC के 27% आरक्षण के हक में हैं, न ही चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को दमदारी से लड़ा जाए।"
कांग्रेस पर सियासी हमला
कृष्णा गौर ने कांग्रेस पर सियासी हमला तेज करते हुए कहा कि विपक्ष का यह रवैया OBC समुदाय के साथ विश्वासघात है। उन्होंने कहा, "जब सभी दल मिलकर सुप्रीम कोर्ट में OBC के हक की बात रख सकते थे, तब कांग्रेस ने पीछे हटकर अपनी असलियत दिखा दी।" गौर ने यह भी दोहराया कि राज्य सरकार विपक्ष के सुझाए किसी भी वकील को साथ लेकर सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखने को तैयार है।
OBC आरक्षण का इतिहास और मौजूदा स्थिति
मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है। 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने OBC आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% करने का फैसला लिया था। इस फैसले को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जिसके बाद कोर्ट ने 13% हिस्से को होल्ड करने की शर्त पर भर्ती प्रक्रिया को मंजूरी दी। बाद में, यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुँचा, जहाँ यह अभी लंबित है।
28 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, जिसमें सभी दलों ने OBC को 27% आरक्षण देने पर सहमति जताई थी। इस बैठक में यह भी तय हुआ था कि सुप्रीम कोर्ट में एकजुट होकर पक्ष रखा जाएगा। लेकिन, अब कांग्रेस पर इस सहमति से पीछे हटने का आरोप लग रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में OBC आरक्षण से जुड़े सभी याचिकाओं पर 22 सितंबर 2025 से नियमित सुनवाई शुरू होने वाली है। मध्य प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई के लिए आवेदन भी दिया है। कृष्णा गौर ने विश्वास जताया कि सरकार इस मामले में OBC समुदाय के हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगी।












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