Success Story: PMEGP योजना ने बदली भोपाल के प्रमोद पाटीदार की जिंदगी, छोटे किसान परिवार से बने सफल उद्यमी
Success Story PMEGP: भोपाल जिले के ग्राम पंचायत मुगलिया हाट में रहने वाले प्रमोद पाटीदार की कहानी सुनकर आज कई युवा उद्यमी प्रेरणा ले रहे हैं। एक साधारण किसान परिवार से निकलकर प्रमोद ने सिर्फ मेहनत और दूरदर्शिता से नहीं, बल्कि सरकार की प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) योजना का सही उपयोग करके एक छोटे से उद्योग को बड़े स्तर पर पहुंचाया।
आज उनका सीमेंट कंक्रीट पेवर ब्लॉक और रेडीमेड बाउंड्री वॉल का कारोबार न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहा है, बल्कि 10-12 लोगों को स्थिर रोजगार भी दे रहा है।

किसान परिवार से शुरू हुई यात्रा
प्रमोद पाटीदार का जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ। उनके पिता ने 2010 में मुगलिया हाट में खेती के साथ-साथ छोटे स्तर पर सीमेंट कंक्रीट पेवर ब्लॉक बनाने का काम शुरू किया। यह काम परिवार की आर्थिक स्थिति को कुछ स्थिरता देता था, लेकिन बड़े सपनों के लिए काफी नहीं था। प्रमोद ने बचपन से ही पिता के इस छोटे उद्योग को देखा और महसूस किया कि इसमें बहुत संभावनाएं हैं। उन्होंने सोचा-यदि इसे सही तरीके से बढ़ाया जाए, तो न केवल परिवार का भविष्य संवर सकता है, बल्कि कई लोगों को रोजगार भी मिल सकता है।
पीएमईजीपी योजना बनी टर्निंग पॉइंट
2018-19 में ग्राम पंचायत सचिव ने प्रमोद को खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग की प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) योजना के बारे में बताया। प्रमोद ने योजना को गहराई से समझा। योजना के तहत नए उद्यमियों को कम ब्याज पर लोन और 35% तक सब्सिडी मिलती है। प्रमोद ने पहली बार 10 लाख रुपये का लोन लिया। सरकार ने 35% सब्सिडी दी, जिससे उन्हें सिर्फ 65% राशि ही चुकानी पड़ी।
इस पैसे से प्रमोद ने मुगलिया हाट में सीमेंट कंक्रीट पेवर ब्लॉक और बाउंड्री वॉल का छोटा उद्योग शुरू किया। शुरुआत में चुनौतियां थीं-मशीनें लगाना, कच्चा माल जुटाना, बाजार ढूंढना-लेकिन प्रमोद की लगन और क्वालिटी पर जोर ने कामयाबी दिलाई। पहला लोन समय पर चुकाने के बाद उनका क्रेडिट स्कोर मजबूत हुआ।
दूसरा लोन और बड़ा विस्तार
सफलता मिलने के बाद प्रमोद ने दोबारा पीएमईजीपी योजना के तहत 30 लाख रुपये का लोन लिया। इस बार उन्होंने उद्योग को और विस्तार दिया। नई मशीनें लगाईं, रेडीमेड बाउंड्री वॉल और सीमेंट ब्लॉक चैनल बनाने की यूनिट शुरू की। आज उनके उत्पाद की मांग भोपाल और आसपास के जिलों में लगातार बढ़ रही है।
रोजगार सृजन और सामाजिक योगदान
प्रमोद का उद्योग अब 10-12 लोगों को स्थिर रोजगार दे रहा है। ये लोग ज्यादातर स्थानीय हैं-कुछ मजदूर, कुछ कुशल कारोबारी। प्रमोद कहते हैं, "मैं चाहता हूं कि मेरे गांव के लोग बाहर न जाएं। यहां काम मिले, परिवार साथ रहे, यही मेरी सबसे बड़ी सफलता है।"
प्रमोद का संदेश: सपने देखने की हिम्मत और मेहनत जरूरी
प्रमोद पाटीदार अपनी सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को देते हैं। वे कहते हैं, "सरकार की योजनाओं और सब्सिडी के बिना यह संभव नहीं होता। पीएमईजीपी ने मुझे पूंजी दी, लेकिन मेहनत और सही प्लानिंग ने सफलता दिलाई।"
पीएमईजीपी योजना क्या है? पूरी जानकारी एक जगह पर
पीएमईजीपी का पूरा नाम है प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (Prime Minister's Employment Generation Programme - PMEGP)। यह भारत सरकार की एक प्रमुख क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना है, जिसे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) द्वारा 2008 में शुरू किया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में नए सूक्ष्म उद्यम (माइक्रो एंटरप्राइज) स्थापित करके स्व-रोजगार के अवसर पैदा करना है।
यह योजना पहले चल रही दो योजनाओं-प्रधानमंत्री रोजगार योजना (PMRY) और ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम (REGP)-को मिलाकर बनाई गई है। योजना को खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) राष्ट्रीय स्तर पर नोडल एजेंसी के रूप में लागू करता है। राज्य स्तर पर राज्य खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड (KVIB), जिला उद्योग केंद्र (DIC) और कोयर बोर्ड इसे लागू करते हैं।
योजना के मुख्य उद्देश्य
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नए स्व-रोजगार वाले सूक्ष्म उद्यम स्थापित करके रोजगार पैदा करना।
पारंपरिक कारीगरों, ग्रामीण और शहरी बेरोजगार युवाओं को उनके घर के पास ही रोजगार के अवसर देना।
पलायन रोकना और स्थानीय स्तर पर आर्थिक विकास को बढ़ावा देना।
उद्यमिता को प्रोत्साहन देकर आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य हासिल करना।
योजना के तहत कितनी सहायता मिलती है?
यह क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना है, यानी बैंक से लोन लेकर उद्योग शुरू करने पर सरकार सब्सिडी देती है (मार्जिन मनी सब्सिडी)। सब्सिडी की दर इस प्रकार है:
- सामान्य श्रेणी (General Category):
- ग्रामीण क्षेत्र: परियोजना लागत का 25% सब्सिडी।
- शहरी क्षेत्र: परियोजना लागत का 15% सब्सिडी।
विशेष श्रेणी (SC/ST/OBC/महिला/पूर्व सैनिक/शारीरिक रूप से विकलांग/ट्रांसजेंडर/एनईआर/पहाड़ी/सीमावर्ती/आकांक्षी जिले आदि):
- ग्रामीण क्षेत्र: 35% सब्सिडी।
- शहरी क्षेत्र: 25% सब्सिडी।
परियोजना लागत की सीमा (2025-26 तक अपडेटेड)
- विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing): अधिकतम 50 लाख रुपये तक की परियोजना।
- व्यवसाय/सेवा क्षेत्र (Business/Service): अधिकतम 20 लाख रुपये तक की परियोजना।
- लाभार्थी का अपना योगदान (Margin Money): सामान्यतः 5-10% (विशेष श्रेणी में कम)।
- बैंक लोन: बाकी राशि (सब्सिडी और लाभार्थी योगदान घटाकर)।
- 10 लाख तक के लोन पर कोई संपार्श्विक (गारंटी) की जरूरत नहीं।
पात्रता (Eligibility)
- उम्र: कम से कम 18 वर्ष।
- शैक्षणिक योग्यता: कम से कम 8वीं पास (कुछ मामलों में छूट)।
- कोई आय सीमा नहीं (विशेष श्रेणी में प्राथमिकता)।
- योजना केवल नए उद्यम के लिए है, पहले से चल रहे व्यवसाय के लिए नहीं।
- SHG (स्वयं सहायता समूह) भी पात्र हैं।
- कोई व्यक्ति जिसने पहले किसी अन्य योजना से लाभ लिया हो, वह भी आवेदन कर सकता है (कुछ शर्तों के साथ)।
आवेदन कैसे करें?
- ऑनलाइन पोर्टल: https://www.kviconline.gov.in/pmegpeportal/ पर जाएं।
- एक पेज का आवेदन फॉर्म भरें।
- आवेदन KVIC/KVIB/DIC को जाता है।
- प्रोजेक्ट रिपोर्ट, दस्तावेज जमा करने के बाद बैंक लोन और सब्सिडी मिलती है।
- पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है, मोबाइल-अनुकूल, एसएमएस/ईमेल अलर्ट के साथ।
योजना के फायदे
- कम ब्याज पर लोन।
- सब्सिडी सीधे बैंक खाते में।
- कोई गारंटी नहीं (छोटे लोन पर)।
- रोजगार सृजन पर फोकस (प्रति इकाई औसतन 8 व्यक्ति रोजगार)।
- 2021-26 तक योजना को 13,554 करोड़ रुपये का बजट मिला, लक्ष्य: 4 लाख नए उद्यम, 30 लाख रोजगार।












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