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Bhopal MP News: सरकारी जमीन पर कब्जा, 6 एकड़ से ज्यादा भूमि पर मछली परिवार समेत 36 लोगों को नोटिस

Bhopal News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के अनंतपुरा कोकता इलाके में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का मामला गरमा गया है। पशुपालन विभाग की 65 एकड़ जमीन में से करीब 6 एकड़ से ज्यादा पर कब्जे पाए गए हैं, जिनकी बाजार कीमत 20 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।

यहां डायमंड सिटी कॉलोनी के 20 मकान, एक प्राइवेट स्कूल, शादी हॉल, फार्म हाउस, खेती के प्लॉट और यहां तक कि नगर निगम की दुकानें व पेट्रोल पंप भी जद में हैं। आज, सोमवार को गोविंदपुरा तहसीलदार सौरभ वर्मा के सामने उन लोगों की पेशी है, जिन्होंने 18 सितंबर को जवाब नहीं दिए थे। पेशी के बाद प्रशासन आगे की कार्रवाई तय करेगा - जो शायद बुलडोजर एक्शन हो सकता है।

Occupation of government land in Anantapura Kokta houses school hall notice to Machli family

हाईकोर्ट में स्टे की गुहार लगाने वाले कब्जाधारियों को राहत नहीं मिली, लेकिन उन्होंने सभी दस्तावेज पेश कर अपना पक्ष रखा है। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं, ताकि आप हर कोण से इसे जान सकें।

अनंतपुरा कोकता का इलाका और सरकारी जमीन का महत्व

भोपाल का अनंतपुरा कोकता इलाका गोविंदपुरा तहसील के अंतर्गत आता है, जो शहर के बाहरी हिस्से में बसा है। यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है - यहां बायपास रोड, कॉलोनियां और व्यावसायिक निर्माण आम हैं। लेकिन समस्या तब शुरू हुई जब पशुपालन विभाग ने अपनी 65 एकड़ जमीन पर 34 साल बाद सीमांकन (सीमा निर्धारण) कराया। यह जमीन 1991 से रिकॉर्ड में सरकारी थी, लेकिन समय के साथ यहां अवैध कब्जे हो गए। विभाग को शक था कि 'मछली परिवार' जैसे प्रभावशाली लोग शामिल हैं, जो पहले से ही ड्रग्स और रेप के मामलों में फंसे हैं।

सीमांकन से पता चला कि 6 एकड़ से ज्यादा जमीन पर कब्जे हैं। इसमें शामिल हैं:

  • डायमंड सिटी कॉलोनी: 20 मकान, जिनमें परिवारों ने सालों से रह रहे हैं।
  • शैक्षणिक संस्थान: बीपीएस स्कूल जैसी 3 मंजिला बिल्डिंग।
  • व्यावसायिक निर्माण: द ग्रीन स्केप मेंशन शादी हॉल/रिसोर्ट, एक हॉस्टल, दुकानें और पेट्रोल पंप।
  • खेती और अन्य: 1 एकड़ पर खेती, 130 डेसीमल अवैध खेती, फार्म हाउस, कॉलोनी के गेट, सड़क, पार्क और पहुंच मार्ग।
  • नगर निगम की संपत्ति: 50 दुकानें, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और बायपास का 200 फीट हिस्सा - जो पशुपालन विभाग की जमीन पर ही बना है।

कब्जाधारियों का दावा है कि जमीन सिद्धार्थ सिन्हा से खरीदी गई थी, नामांतरण, बटांकन (विभाजन) और सीमांकन प्रशासन ने ही कराया था। वे कहते हैं, "तब तो अवैध नहीं था, अब क्यों?" लेकिन प्रशासन का कहना है कि पुराने रिकॉर्ड में गड़बड़ी है, और अब सच्चाई सामने आ गई है। इस जमीन की कीमत इतनी ज्यादा है कि कार्रवाई से करोड़ों का स्ट्रक्चर प्रभावित हो सकता है।

मछली परिवार की कार्रवाई से शुरू हुई जांच

यह मामला जुलाई-अगस्त 2025 में भोपाल के कुख्यात 'मछली परिवार' पर छाई कार्रवाई से जुड़ा है। यह परिवार ड्रग्स तस्करी, रेप और ब्लैकमेल के आरोपों में सुर्खियों में रहा। दो सदस्य जेल में हैं, बाकी पर केस चल रहे हैं। 30 जुलाई को प्रशासन ने परिवार की 6 संपत्तियां जमींदोज कर दीं, जिनकी जमीन की कीमत 100 करोड़ बताई गई। 21 अगस्त को एक और बड़ी कार्रवाई हुई, जहां 7 अवैध निर्माण गिराए गए।

इसी बीच, पशुपालन विभाग ने गोविंदपुरा एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव और तहसीलदार सौरभ वर्मा को आवेदन दिया। विभाग ने कहा, "हमारी कोकता बायपास वाली 99 एकड़ जमीन पर भी कब्जा हो सकता है, खासकर मछली परिवार का।" जांच में कब्जे सही पाए गए। मछली परिवार के नाम पर 26 एकड़ दर्ज थी, जिसमें कोर्टयार्ड प्राइम और कस्तूरी कॉलोनियां बनीं। ये टीएंडसीपी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) से अप्रूव्ड हैं, लेकिन अब स्वामित्व की पड़ताल हो रही है। परिवार के वकीलों ने कहा, "हमारा कब्जा नहीं है," लेकिन सीमांकन में वे मौजूद थे। भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने भी परिवार पर तीखा प्रहार किया, कहा, "शारिक मछली जैसे लोग जेल के लायक हैं।"

सीमांकन प्रक्रिया: 27 अगस्त से शुरू, 3 दिनों में पूरा

27 अगस्त 2025 को गोविंदपुरा एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव और तहसीलदार सौरभ वर्मा की मौजूदगी में 11 पटवारी व 3 राजस्व निरीक्षकों ने सीमांकन शुरू किया। तीन दिनों में काम पूरा हो गया। रिपोर्ट में हर कब्जे का विवरण था - कौन, कितना, कहां। खास बात: घरों पर क्रॉस, लाल निशान और खूटियां गाड़ दी गईं, जिससे लोग खौफजदा हो गए।
2 सितंबर को डायमंड सिटी के लोग एसडीएम ऑफिस पहुंचे, न्याय की गुहार लगाई। 3 सितंबर को रिपोर्ट कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को सौंपी गई। 8-9 सितंबर को 35+ लोगों को नोटिस जारी हुए, 10 दिन की मोहलत दी गई। नोटिस में शामिल: छोटेलाल, बलवीर मेहरा, शुभम राय, ममता मिश्रा, शिवांक स्वामी, आरएस परिहार, रेखा कात्यवार, तेजपाल सिंह राजपूत, राहुल साहू, उमाशंकर, कमलेश, भरत लोधी, नरबदा प्रसाद, धीरज सिंह चौहान, सुशीला लोधी, रिजवान मोहम्मद, अजय गुप्ता, शर्मिला ठाकरे, रामकृष्ण खांडवे, अमिताभ वर्मा, आशु वर्मा, अवधनारायण मालवीय, निर्भय सिंह, बद्रीप्रसाद, संतोष, विनोद साहू, प्रमोद साहू, विजित पाटनी, निशंक जैन, देवेंद्र लोधी, उषा सिन्हा, शावेज अहमद, सोहेल अहमद, शावर अहमद, शारिक अहमद, तारिक अहमद, शफीक अहमद और अनुज साहू।

कुछ ने पहले ही पक्ष रखा: रजिस्ट्री, नक्शा, डायवर्जन के दस्तावेज दिखाए। लेकिन हाईकोर्ट में स्टे की मांग खारिज हो गई।

कब्जाधारियों का पक्ष: 'प्रशासन ने ही सब कराया था'

लोगों का कहना है कि जमीन सिद्धार्थ सिन्हा से ली गई, जो सही बताई गई। नामांतरण एसडीएम ऑफिस से, बटांकन में आरआई-पटवारी आए, बोले - "कोई सरकारी हिस्सा नहीं।" सभी अनुमतियां लीं - बिल्डिंग बनी। अब वे कहते हैं, "यह अन्याय है। सालों की पूंजी डूब जाएगी।" एक निवासी ने कहा, "हमने टैक्स भरा, बिजली-पानी लिया। अब तोड़ोगे तो परिवार बर्बाद।"

आज की पेशी: 22 सितंबर को गोविंदपुरा तहसील में हाजिरी

18 सितंबर को कई ने जवाब दिए, लेकिन कुछ के बच गए। आज तहसीलदार सौरभ वर्मा के सामने वे पेश होंगे। पेशी के बाद एसडीएम फैसला लेंगे। कलेक्टर के आदेश पर तहसीलदार ही नोटिस दे रहे हैं। संभावना है कि कमर्शियल कब्जे (स्कूल, हॉल) पहले टारगेट हों। अगर पक्ष न माने, तो बुलडोजर चलेगा।

समाज पर असर: सबक और सावधानियां

यह मामला भोपाल में भू-माफिया के खिलाफ प्रशासन की सख्ती दिखाता है। एनसीआरबी डेटा के मुताबिक, 2024 में मध्य प्रदेश में 5,000+ जमीन कब्जे के केस दर्ज हुए। लेकिन कब्जाधारियों की दुविधा भी सच्ची है - कई निर्दोष फंस सकते हैं।

सावधानियां:

  • जमीन खरीदते समय: भूलेख पोर्टल (mpbhulekh.gov.in) पर चेक करें। नामांतरण, खसरा-खतौनी वेरिफाई करें।
  • सीमांकन में भाग लें: नोटिस मिले तो तुरंत जवाब दें।
  • कानूनी मदद: हाईकोर्ट जैसी राहत के लिए वकील लें, लेकिन दस्तावेज मजबूत रखें।
  • प्रशासन के लिए: डिजिटल रिकॉर्ड मजबूत करें, ताकि पुरानी गड़बड़ी न हो।
  • यह विवाद भोपाल के विकास को प्रभावित कर सकता है। कब्जाधारियों को न्याय मिले, लेकिन सरकारी जमीन सुरक्षित रहे। प्रशासन की कार्रवाई पर नजर!
  • (यह रिपोर्ट स्थानीय प्रशासन स्रोतों, सीमांकन रिपोर्ट और कोर्ट बयानों पर आधारित है। अधिक जानकारी के लिए गोविंदपुरा तहसील से संपर्क करें।
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