'ब्रेन में सूजन,आंखों से कम दिखना', प्रज्ञा ठाकुर ने अपने कष्टों के लिए कांग्रेस के टॉर्चर को बताया जिम्मेदार

Shvi Pragya Singh Thakur: भोपाल की पूर्व सांसद और भारतीय जनता पार्टी की नेता साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के खिलाफ मुंबई के स्पेशल एनआईए कोर्ट ने जमानती वारंट जारी किया है। अदालत ने प्रज्ञा को 13 नवंबर के दिन कोर्ट में पेश होने के लिए बोला है। इस बीच प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने अपनी बिगड़ी सेहत दिखाते हुए एक पोस्ट लिखा है।

साध्वी प्रज्ञा के ब्रेन में सूजन और आंखों से कम दिखने लगा है। कानों से कम सुनना और बोलने में असंतुलन होने लगा है। पूर्व सांसद ने ये दावा खुद किया है। अपनी खराब हालत के लिए उन्होंने कांग्रेस को दोषी ठहराया है। साध्वी प्रज्ञा ने चेतावनी दी है कि वो जिंदा रही हैं तो कोर्ट जाएंगी।

Pragya Thakur blamed Congress for her sufferings

पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने अपनी एक फोटो पोस्ट की है, जिसमें उनका चेहरा तनावपूर्ण दिख रहा है। साध्वी प्रज्ञा ने ट्विटर (X) पर लिखा है- 'कांग्रेस का टॉर्चर सिर्फ ATS कस्टडी तक ही नहीं, मेरे जिंदगी भर के लिए मृत्यु दाई कष्ट का कारण हो गए। ब्रेन में सूजन, आंखों से कम दिखना, कानों से कम सुनना, बोलने में असंतुलन, स्टेरॉयड और न्यूरो की दवाओं से पूरे शरीर में सूजन एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। जिंदा रही तो कोर्ट अवश्य जाउंगी।

साध्वी को मालेगांव विस्फोट में बनाया गया था आरोपी
29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव शहर के नासिक शहर में एक बाइक पर रखे विस्फोटक उपकरण के फटने से 6 लोग मारे गए और 100 से अधिक अन्य घायल हो गए थे। घटना में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का नाम आरोपियों में शामिल था। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर बार-बार दावा करती रही हैं कि कस्टडी के दौरान उन पर काफी अत्याचार हुआ है। तभी से वो फिजिकली ठीक नहीं रही हैं। इसके लिए वो कांग्रेस की सरकार और एटीएस की प्रताड़ना को दोषी मानती है।

साध्वी प्रज्ञा ने कुछ समय पहले अपनी खराब हेल्थ के चलते 2008 में हुए मालेगांव ब्लास्ट मामले में अदालत में उनकी उपस्थिति से छूट के लिए पत्रदार किया था। अदालत ने सिर्फ मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उन्हें छूट भी दी थी। हालांकि हाल ही में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत ने साध्वी प्रज्ञा को 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले के सिलसिले में जमानती वारंट जारी किया है।

घटना में आरोपी ठाकुर अदालत की कार्यवाही के लिए उपस्थित नहीं हुईं, जिसके बाद अदालत ने उनकी उपस्थिति की मांग की है। वारंट 13 नवंबर तक 'वापस करने योग्य है, जिसका अर्थ है कि वारंट रद्द करने के लिए ठाकुर को उस तिथि तक अदालत में उपस्थित होना चाहिए।

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