MP की धरती पर दहाड़ेंगे नामीबिया के चीते, जानिए कहाँ और क्यों आ रहे ये चीते
करीब सात दशकों पहले देश से चीतों का साम्राज्य लगभग खत्म सा हो गया है। लेकिन हिन्दुस्तान की सरजमीं पर एक बार फिर चीते दहाड़ेगे और वाइल्ड लाइफ सेंचुरी की यह रौनक बढ़ाएंगे। चीतों को भारत लाने की सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली
भोपाल, 21 जुलाई: नामीबिया देश बहुत जल्द भारत को बड़ा गिफ्ट देने जा रहा है। यह गिफ्ट वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के लिए है। नामीबिया हिन्दुस्तान को 8 चीते देने जा रहा है, जिसमें चार नर और चार मादा चीते शामिल है। इनको मध्य प्रदेश के कूनो पालपुर अभयारण्य में रखा जाएगा। बताया जा रहा है कि भारत और नामीबिया के बीच अंतरराष्ट्रीय करार हुआ है। जिस पर वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और नामीबिया की उपराष्ट्रपति सुश्री नांगलो मुंबा ने हस्ताक्षर किए हैं।

अगस्त में नामीबिया से लाने की तैयारी
करीब सात दशकों पहले देश से चीतों का साम्राज्य लगभग खत्म सा हो गया है। लेकिन हिन्दुस्तान की सरजमीं पर एक बार फिर चीते दहाड़ेगे और वाइल्ड लाइफ सेंचुरी की यह रौनक बढ़ाएंगे। चीतों को भारत लाने की सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई है। इससे पहले वन्य जीव संरक्षण और विलुप्त होते वन्य जीवों के मसले को लेकर गहरी चिंता जताई गई थी। अपनी अलग तरह की नस्ल के लिए पहचान रखने वाले अफ्रीकन चीतों प्रजाति दुनिया भर में मशहूर है। जिस पर देश के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने नामीबिया से बातचीत शुरू की। विशेषकर चीतों को लेकर दोनों देशों के बीच करार की सहमति बनी। जिस पर वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और नामीबिया की उपराष्ट्रपति सुश्री नांगलो मुंबा ने हस्ताक्षर किए।

विशेष चार्टर प्लेन से आएंगे चीते
यह एक बड़ा प्रोजेक्ट है। जिसे एनटीसीए (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथारिटी) हेंडिल कर रहा है। हाल ही हुए करार के मुताबिक चीतों को नामीबिया से भारत लाने विशेष चार्टर प्लेन की व्यवस्था की जा रही है। जिसमें नर-मादा आठों चीतों को लिफ्ट किया जाएगा। चीतों को हवाई यात्रा से भारत लाने में करीब आठ से नौ घंटे का वक्त लगेगा। वन्य जीव विशेषज्ञ भी इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद उत्साहित है। उनका मानना है कि भारत की सेंचुरी में चीतों की आमद से वन्य क्षेत्रों का एक नया इतिहास लिखा जाएगा।

महीने भर क्वारंटाइन रहेंगे चीते, इलाका होगा हाईटेक
नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथारिटी (NTCA) से प्राप्त जानकारी के मुताबिक नामीबिया से जिन चीतों को भारत लाया जाएगा, उनकी निगरानी के लिए वन्य जीव विशेषज्ञों की विशेष टीम तैयार की गई है। दुनिया में यह पहला अवसर माना जा रहा है कि जब किसी एक देश से दूसरे देश वन्य जीवों को बसाया जा रहा है। नामीबिया से चीतों को लाने से लेकर सेंचुरी में बसाने तक वन्यजीव विशेषज्ञों और डाक्टरों की भी एक टीम तैनात रहेगी। जो चीतों के पल-पल की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। इसके अलावा भारत पहुँचते ही करीब एक महीना चीतों को क्वारंटाइन पीरियड में गुजारना होगा।

यहाँ है कुनो-पालपुर राष्ट्रीय उद्यान
'कुनो-पालपुर राष्ट्रीय उद्यान ' जहाँ नामीबिया से लाए जाने चीतों को रखने के योजना है, यह मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में है । लगभग 750 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्रफल में फैले इस नेशनल पार्क में कई जानवर है । विशेषकर मांसाहारी जानवरों को सँभालने के लिए यह पार्क सबसे सुरक्षित माना जाता है । मध्यप्रदेश सरकार भी इस इलाके में वन्य प्राणियों के संरक्षण को लेकर एक्टिव रही है । माना जा रहा है कि यहाँ चीतों के पहुँचने के बाद यह पार्क वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिहाज से नई ऊँचाइयाँ भी छुएगा ।

1952 में घोषित किया गया विलुप्त
देश की आजादी के बाद साल 1952 में बेहद फुर्तीले इस जानवर को विलुप्त घोषित किया गया । आखिरी बात साल 1947 में देश का आखिरी चीता देखा गया था, जिसकी मध्यप्रदेश में ही मौत हुई थी । उसके बाद चीता नाम का जंगली प्राणी सिर्फ किताबों और तस्वीरों में ही सिमटकर रह गया। आज की नई पीढ़ी इस विलुप्त जानवर के बारे में कम ही जानती है । इसके बारे में जो पढ़ा-लिखा भी जाता है तो चीते की खूबियों से आज भी बहुत से लोग अनजान है ।

चीतों को बसाने सुप्रीम कोर्ट ने लगाईं थी रोक
दरअसल देश में चीतों की आबादी को लेकर कई बार सवाल उठते रहे है। विलुप्त होते चीतों को बसाने चिंता तो होती रही, लेकिन वास्तविकता इससे कोसों दूर रही। हालाँकि कई वजहों से साल 2013 सुप्रीम कोर्ट ने चीतों को दोबारा बसाए जाने की प्लानिंग पर रोक लगा दी थी। फिर सात साल बाद जनवरी 2020 में कुछ शर्तों के साथ अफ्रीकन चीते लाने को ग्रीन सिग्नल मिला। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस प्रोजेक्ट को देखने एक कमिटी भी बनाई गई थी। प्रोजेक्ट के सिलसिले में नामीबिया के चीता कंजर्वेशन फंड ने मदद की पेशकश की थी।












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