MP News: आखिर क्यों सड़कों पर उतरे प्रदेश के कर्मचारी? 11 सूत्री मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन
MP News Employees: मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों का गुस्सा अब सड़कों पर साफ नजर आने लगा है। वर्षों से लंबित मांगों, अधूरे वादों और बढ़ती महंगाई के बीच खुद को ठगा महसूस कर रहे प्रदेश के कर्मचारी एक बार फिर सरकार के खिलाफ आंदोलन के मूड में हैं। राज्य मंत्रालय से लेकर जिला मुख्यालयों तक कर्मचारी संगठनों ने ऐलान कर दिया है कि 15 जनवरी को प्रदेशव्यापी प्रदर्शन किया जाएगा।
कर्मचारियों का कहना है कि सरकार चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करती है, लेकिन सत्ता में आने के बाद कर्मचारियों की समस्याएं हाशिए पर चली जाती हैं। यही वजह है कि अब कर्मचारी आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं।

राज्य मंत्रालय से जिला मुख्यालय तक प्रदर्शन, सरकार पर बढ़ेगा दबाव
तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के आह्वान पर 15 जनवरी को भोपाल के सतपुड़ा भवन सहित प्रदेश के सभी जिलों में जिला मुख्यालयों पर जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद कर्मचारियों द्वारा मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यह प्रदर्शन सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि सरकार को चेतावनी है कि अगर अब भी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
कर्मचारियों का सवाल: महंगाई बढ़ी, लेकिन वेतन और सुविधाएं क्यों रुकीं?
तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि: "महंगाई आसमान छू रही है, लेकिन कर्मचारियों को उनका हक नहीं मिल रहा। महंगाई भत्ता और महंगाई राहत में देरी, अधूरी नीतियां और नई शर्तें कर्मचारियों का शोषण हैं।"
कर्मचारियों का कहना है कि एक तरफ सरकार विकास और सुशासन की बात करती है, दूसरी तरफ अपने ही कर्मचारियों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है।
11 सूत्री मांगों ने खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा
प्रदेश के कर्मचारियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- लंबित महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) का तत्काल भुगतान
- सीपीसीटी (CPCT) से पूर्ण मुक्ति
- परिवीक्षा अवधि में 70%, 80%, 90% वेतन व्यवस्था समाप्त की जाए
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से लागू किया जाए
- वर्षों से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया तत्काल शुरू हो
- आउटसोर्स कर्मचारियों का नियमितीकरण
- स्थायी संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाए
- ई-अटेंडेंस सिस्टम से मुक्ति
- रिक्त पदों पर नियमित भर्ती
- सेवा शर्तों में सुधार
- कर्मचारियों से जुड़े सभी लंबित मामलों का निराकरण
कर्मचारियों का कहना है कि ये मांगें कोई नई नहीं हैं, बल्कि वर्षों से सरकार के पास लंबित हैं।
नेताओं का सरकार पर सीधा आरोप: कर्मचारियों को मजबूर किया जा रहा है आंदोलन के लिए
कर्मचारी नेता मोहन अय्यर, विजय रघुवंशी, आशुतोष शुक्ला, ओपी सोनी, पवन कुमार मिश्रा, जयविंद सोलंकी, एसएल पंजवानी, अरुण भार्गव, दामोदर आर्य, सैयद आरिफ अली, सुरेश बाथम, सुनील पाहुजा, उमेश बोरकर, अश्विनी चौबे, राजेश्वर सिंह, अवतार सिंह, शैलेंद्र मालाकार, सुधीर भार्गव, दीपेश ठाकुर, कुलदीप अलावा, मोहन कुशवाह, मोहम्मद सलीम, विजीत मालवीय, विशाल कनेश, अखिलेश मंडलोई, मनोज शर्मा, राजकुमार चौरसिया सहित अन्य नेताओं ने कर्मचारियों से आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है।
नेताओं का कहना है कि अगर सरकार ने अब भी कर्मचारियों की बात नहीं सुनी, तो आने वाले दिनों में कामकाज ठप करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
सरकार के सामने चुनौती: आंदोलन बढ़ा तो ठप हो सकता है प्रशासन
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह आंदोलन लंबा चला, तो इसका सीधा असर: जिला प्रशासन, सचिवालय कामकाज, जनहित सेवाओं, विकास कार्यों पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।
सवाल सिर्फ मांगों का नहीं, सम्मान और भरोसे का भी
प्रदेश के कर्मचारियों का यह आंदोलन सिर्फ वेतन या भत्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सम्मान, सुरक्षा और भरोसे की लड़ाई बन चुका है। अब देखना यह होगा कि सरकार कर्मचारियों के आक्रोश को गंभीरता से लेती है या फिर यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेता है।
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