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Bhopal News: ड्रग्स तस्करी का बड़ा खुलासा, क्राइम ब्रांच ने आगर-मालवा के मुख्य आरोपी समेत तीन को दबोचा

MD Drugs smuggling: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नशीले पदार्थों के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई में क्राइम ब्रांच को बड़ी सफलता मिली है। राजस्थान से MDMA (मिथाइल डाइमिथॉक्सी मेथाम्फेटामाइन) पाउडर की खेप लाकर भोपाल में बेचने वाले आगर-मालवा के एक प्रमुख आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। उसके साथ भोपाल में उसके लिए ड्रग्स की बिक्री करने वाले दो पैडलर्स भी पकड़े गए।

तीनों के कब्जे से करीब 40 लाख रुपये कीमत का 56.96 ग्राम MD पाउडर, एक चार पहिया वाहन, दो बाइक, तोल कांटा और चार मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। कुल जब्त माल की कीमत लगभग 50 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस आरोपीयों से पूछताछ कर रही है और उनके मोबाइल फोनों की सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) समेत डेटा का विश्लेषण कर बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करने में जुटी है।

MP Drug smuggling Crime Branch nabs three people including main accused from Agar-Malwa

यह कार्रवाई न सिर्फ स्थानीय स्तर पर ड्रग्स की सप्लाई चेन को तोड़ती है, बल्कि राजस्थान-मध्य प्रदेश के बीच अंतरराज्यीय तस्करी के जाल को भी उजागर करती है। हमने पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की, जिसमें पुलिस अधिकारियों, स्थानीय सूत्रों और हाल के ड्रग्स मामलों के संदर्भ शामिल हैं।

ड्रग्स तस्करी का नेटवर्क: राजस्थान से भोपाल तक की साजिश

भोपाल में ड्रग्स की समस्या तेजी से बढ़ रही है, खासकर युवाओं के बीच MDMA जैसी पार्टी ड्रग्स की मांग ने तस्करों को सक्रिय कर दिया है। गिरफ्तार मुख्य आरोपी किफायतुल्लाह खान (51 वर्ष) आगर-मालवा जिले के वार्ड नंबर 18, छावनी मस्जिद के पास का निवासी है। पुलिस के अनुसार, किफायतुल्लाह राजस्थान के जयपुर और उदयपुर इलाकों से MDMA पाउडर की खेप मंगवाता था, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार से स्मगल होती है। वह आगर-मालवा में एक छोटे व्यापार को कवर बनाकर तस्करी का धंधा चला रहा था। भोपाल पहुंचने पर वह स्थानीय पैडलर्स-अफजल खान (32 वर्ष, निवासी सात दुकान, देवकी नगर, करोंद) और दूसरे साथी-को ड्रग्स सौंपता था। अफजल खान भोपाल के ईदगाह हिल्स क्षेत्र में ड्रग्स की बिक्री का केंद्र चला रहा था, जहां वह युवाओं को छोटे-छोटे पैकेट्स में बेचता था।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, किफायतुल्लाह का नेटवर्क पिछले दो वर्षों से सक्रिय था। वह राजस्थान से प्रति सप्ताह 50-100 ग्राम MDMA भेजता था, जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 70,000 रुपये प्रति ग्राम तक होती है। भोपाल में खुदरा बिक्री पर यह 1-2 लाख रुपये प्रति ग्राम तक पहुंच जाती है। यह गिरोह मुख्य रूप से कॉलेज छात्रों, पार्टी कल्चर से जुड़े युवाओं और आईटी प्रोफेशनल्स को टारगेट करता था। हाल ही में भोपाल में 'मछली परिवार' से जुड़े ड्रग्स मामलों के बाद क्राइम ब्रांच ने ऐसे छोटे-मोटे नेटवर्क पर नजर बढ़ा दी थी, जिसका फायदा इस कार्रवाई में मिला।

कार्रवाई का विवरण: मुखबिर की सूचना से शुरू हुई रेड

कार्रवाई की शुरुआत 19 सितंबर (शुक्रवार) रात को हुई। एडिशनल डीसीपी (क्राइम ब्रांच) शैलेंद्र सिंह चौहान के नेतृत्व में एक टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि ईदगाह हिल्स क्षेत्र में दो संदिग्ध युवक ड्रग्स की डीलिंग कर रहे हैं। टीम ने तुरंत घेराबंदी की और अफजल खान व उसके साथी को हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक पूछताछ में दोनों ने कबूल किया कि वे आगर-मालवा के किफायतुल्लाह से ड्रग्स लेते हैं। अगले ही दिन (20 सितंबर, शनिवार) दोपहर में किफायतुल्लाह को भोपाल बुलाया गया, जहां उसे भी पकड़ लिया गया। तीनों के खिलाफ एनडीपीएस (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटांस) एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया गया।

तलाशी के दौरान अफजल खान के पास से 22.45 ग्राम MD पाउडर, एक स्मार्टफोन और काली रंग की यामाहा FZ मोटरसाइकिल बरामद हुई। वहीं, किफायतुल्लाह के कब्जे से 31.21 ग्राम MD पाउडर, एक स्मार्टफोन, एक कीपैड फोन, काली रंग की अल्टो कार और एक इलेक्ट्रॉनिक तोल कांटा जब्त किया गया। कुल 56.96 ग्राम MD पाउडर की कीमत 40 लाख रुपये से अधिक है, जबकि वाहनों और अन्य सामान की कीमत जोड़कर कुल 50 लाख पहुंच जाती है। चौहान ने बताया, "यह मात्र शुरुआत है। आरोपीयों के मोबाइल डेटा से उनके सप्लायर्स और ग्राहकों का पता लगाया जा रहा है। राजस्थान पुलिस से भी संपर्क किया गया है।"

मछली परिवार से जुड़े मामले

भोपाल में ड्रग्स की समस्या कोई नई नहीं है। हाल ही में 'मछली परिवार' पर ड्रग्स तस्करी, यौन शोषण और अवैध हथियारों के 60 से अधिक मामले दर्ज हुए हैं। इस परिवार ने 99 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा कर ड्रग्स का कारोबार चला रहा था। अगस्त 2025 में क्राइम ब्रांच ने पशुपालन विभाग की 6 एकड़ जमीन से जुड़े उनके कब्जे का पर्दाफाश किया। इसी क्रम में टीकमगढ़ में अवैध हथियार फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ, जो ड्रग्स गिरोह से लिंक था।

इससे पहले फरवरी 2025 में इंदौर क्राइम ब्रांच ने भोपाल में 1 करोड़ की अल्प्राजोलम टैबलेट्स और कोडीन सिरप की खेप पकड़ी थी। अगस्त में ही विज्ञान भवन के पास 1.75 लाख की स्मैक के साथ एक डिलीवरी बॉय को गिरफ्तार किया गया। ये मामले दर्शाते हैं कि भोपाल ड्रग्स का हॉटस्पॉट बन चुका है, जहां राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गुजरात से सप्लाई आती है।

प्रशासन की तारीफ, समाज का आक्रोश

इस कार्रवाई पर स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों ने क्राइम ब्रांच की सराहना की है। एक एनजीओ कार्यकर्ता ने कहा, "ईदगाह हिल्स जैसे इलाकों में युवा ड्रग्स के चपेट में आ रहे थे। यह गिरफ्तारी राहत की सांस है।" विपक्षी कांग्रेस ने सरकार से पूछा कि बड़े नेटवर्क क्यों नहीं पकड़े जा रहे, जबकि भाजपा ने इसे "मोहन यादव सरकार की जीरो टॉलरेंस" नीति का उदाहरण बताया।

कानूनी आयाम: एनडीपीएस एक्ट की कड़ी सजा

एनडीपीएस एक्ट के तहत 20 ग्राम से अधिक कमर्शियल मात्रा के ड्रग्स पर 10 वर्ष से आजीवन कारावास और जुर्माना हो सकता है। MDMA को शेड्यूल-1 ड्रग माना जाता है, इसलिए सजा और सख्त है। पुलिस ने आरोपीयों को 14 दिनों की रिमांड मांगी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल डेटा एनालिसिस से नेटवर्क का 80% हिस्सा उजागर हो सकता है।

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