कांग्रेस का धमाकेदार प्रदर्शन, 'बंदर के हाथ में उस्तरा' की झांकी से भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार
MP News: मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र (1-5 दिसंबर) तीसरे दिन भी हंगामेदार रहा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने भाजपा सरकार की कथित "जनविरोधी नीतियों" के खिलाफ विधानसभा परिसर में जोरदार सांकेतिक प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन का केंद्र रहा "बंदर के हाथ में उस्तरा" का प्रतीक - कई विधायक बंदर की ड्रेस पहनकर हाथ में उस्तरा थामे पहुंचे, जो सरकार को "अक्षम और जनहित के खिलाफ" बताने का प्रयास था। यह प्रदर्शन सत्र के पहले दो दिनों के बाद (पहले दिन छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड पर 'पूतना' झांकी, दूसरे दिन MSP पर 'चिड़िया चुग गई खेत') तीसरा लगातार सांकेतिक विरोध था।

सदन की कार्यवाही महज एक घंटे चली, उसके बाद कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट किया। सिंघार ने कहा, "भाजपा सरकार की नीतियां जनता के गले की हड्डी बन चुकी हैं। हम सड़क से सदन तक लड़ेंगे।" भाजपा ने इसे "विपक्ष का सस्ता स्टंट" बताते हुए खारिज किया। वनइंडिया हिंदी की विशेष रिपोर्ट में जानिए प्रदर्शन का पूरा विवरण, सिंघार के बयान, राजनीतिक असर और सत्र का एजेंडा।
प्रदर्शन का अनोखा अंदाज: बंदर ड्रेस और उस्तरा - "सरकार जनहित पर उस्तरा चला रही"
सत्र के तीसरे दिन (4 दिसंबर) सुबह करीब 10:30 बजे विधानसभा परिसर के महात्मा गांधी सभागार के बाहर करीब 35 कांग्रेस विधायक इकट्ठा हुए। उनके हाथों में प्लेकार्ड थे - "बंदर के हाथ में उस्तरा: भाजपा की जनविरोधी नीतियां", "युवाओं का रोजगार लूटा, किसानों का हक छीना"। कई विधायक (जैसे सुखदेव पांसे, लखन पटेल) ने बंदर की पूंछ और मास्क पहन रखे थे, हाथ में चमचमाता उस्तरा थामा था। यह कहावत का प्रतीक था - अक्षम हाथों में खतरनाक हथियार, जो प्रदेश की जनता को चोट पहुंचा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए: "बंदर सरकार मुर्दाबाद! जनविरोधी नीतियां बंद करो!" सिंघार ने मंच से कहा,
"बंदर रूपी भाजपा सरकार के हाथ में उस्तरा आ गया है, और वह युवाओं के रोजगार, प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और किसानों के अधिकारों पर बेरहमी से उस्तरा चला रही है। प्रदेश में बेरोजगारी चरम पर है, स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल हैं, कानून-व्यवस्था अस्त-व्यस्त है, और किसान न्याय और अधिकारों के लिए तरस रहे हैं।"
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जनता की मूल समस्याओं से मुंह मोड़कर केवल राजनीतिक स्टंट में लगी है। सिंघार ने कहा, "कांग्रेस विधायकदल जनता की आवाज बनकर हर मोर्चे पर सरकार को कटघरे में खड़ा करता रहेगा। हम प्रदेश की जनता के हितों, अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए सड़कों से लेकर विधानसभा तक संघर्ष जारी रखेंगे।" प्रदर्शन के दौरान विधायकों ने उस्तरा हवा में लहराया और सदन की ओर मार्च किया, लेकिन स्पीकर ने सदन में प्रवेश की अनुमति न दी।
सत्र के पहले दो दिनों का संदर्भ: लगातार सांकेतिक विरोध की श्रृंखला
पहला दिन (1 दिसंबर): छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड पर। विधायकों ने बच्चों के पुतले थामे, एक महिला विधायिका 'पूतना' का गेटअप धारण कर सरकार को "मासूमों के लिए जहर बांटने वाली" बताया। सिंघार ने कहा, "सरकार को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी तय करने की फुर्सत नहीं।"
दूसरा दिन (2 दिसंबर): MSP और किसान संकट पर। विधायकों ने हाथों में खेत का मॉडल और चिड़िया के पुतले लिए, "चिड़िया चुग गई खेत" की झांकी दिखाई। सिंघार ने कहा, "किसानों को सही दाम नहीं मिल रहा, सरकार किसान-विरोधी है।" इन प्रदर्शनों से सत्र की कार्यवाही बाधित रही। आज तीसरे दिन भी सदन में बहस न हो सकी।
सिंघार का राजनीतिक सफर: आदिवासी नेता से विपक्ष का चेहरा
1974 में धार जिले के कुक्षी में जन्मे उमंग सिंघार आदिवासी समाज से हैं। वे गांधवानी से तीन बार विधायक रह चुके हैं और 2018-2020 में कांग्रेस सरकार में वन मंत्री थे। वर्तमान में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में वे भाजपा सरकार पर सबसे मुखर हैं। सिंघार ने 2023 विधानसभा चुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर दी और अब सत्र में सांकेतिक प्रदर्शनों से विपक्ष को एकजुट कर रहे हैं। उनका कहना है, "यह प्रदर्शन जनता की पीड़ा का प्रतीक है, न कि स्टंट।"
भाजपा का जवाब: "विपक्ष का सस्ता तमाशा, सदन में बहस करें"
भाजपा ने प्रदर्शन को "विपक्ष का सस्ता तमाशा" करार दिया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा, "कांग्रेस को सांकेतिक प्रदर्शन से बेहतर सदन में मुद्दे उठाने चाहिए। हमारी सरकार जनकल्याण पर काम कर रही है।" मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा, "बंदर की ड्रेस पहनकर क्या साबित होगा? बेरोजगारी पर हम नौकरियां दे रहे हैं, स्वास्थ्य पर बजट बढ़ा रहे हैं।" सदन में स्पीकर रामनिवास रावत ने कांग्रेस को चेतावनी दी, "प्रदर्शन लोकतांत्रिक हैं, लेकिन सदन की गरिमा बनाए रखें।"
सत्र का एजेंडा: अनुपूरक बजट और बिल, लेकिन हंगामा बरकरार
चार दिवसीय सत्र में मुख्य एजेंडा:
- द्वितीय अनुपूरक बजट: 10,000 करोड़ रुपये का, विकास योजनाओं पर फोकस।
- नगरपालिका (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025: नगरीय विकास के लिए।
- अन्य बिल: शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि से जुड़े।
लेकिन कांग्रेस ने रणनीति बनाई है कि इनकी चर्चा तभी होगी, जब बेरोजगारी, स्वास्थ्य और किसान मुद्दों पर बहस हो। सिंघार ने कहा, "सरकार अगर बहस से बचेगी, तो हम सत्र का बहिष्कार करेंगे।"
राजनीतिक असर: 2028 चुनाव से पहले विपक्ष की रणनीति?
यह प्रदर्शन 2028 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आदिवासी बहुल धार-झाबुआ क्षेत्र से सिंघार की पकड़ मजबूत है, और सांकेतिक विरोध से विपक्षी एकता बढ़ रही है। विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा सरकार पर दबाव बनेगा, लेकिन सत्र छोटा होने से मुद्दे अधूरे रह सकते हैं।
जनता की आवाज बनेगी कांग्रेस, या सियासी ड्रामा?
शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन का प्रदर्शन मध्य प्रदेश की राजनीति को और गरमा गया। "बंदर के हाथ में उस्तरा" की यह झांकी सरकार की नीतियों पर सवाल खड़ी कर रही है। क्या भाजपा जवाब देगी या विपक्ष का हंगामा जारी रहेगा? वनइंडिया हिंदी सत्र की लाइव कवरेज करेगा। क्या आपको लगता है सांकेतिक प्रदर्शन प्रभावी हैं? कमेंट में बताएं।
(रिपोर्ट: वनइंडिया हिंदी संवाददाता )












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