Bhopal News: मंत्री निर्मला भूरिया का बयान: लड़कों को माफ करने की परंपरा को तोड़ना होगा
महिला बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने गुरुवार को भोपाल में आयोजित 'लिंग आधारित हिंसा-समाज और समाधान' कार्यक्रम में गंभीर बयान दिया।
उन्होंने लैंगिक हिंसा को एक गंभीर सामाजिक चुनौती करार देते हुए कहा कि यह महिलाओं और समाज के समग्र विकास में बड़ी बाधा उत्पन्न करती है। इसके समाधान के लिए मंत्री ने सरकार और समाज दोनों को मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

समानता और सम्मान के महत्व पर जोर
मंत्री निर्मला भूरिया ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, "हम हमेशा से लड़कियों को गलती पर समझाइश देते हैं, लेकिन लड़कों को उनकी गलती की माफी दी जाती है। यह परंपरा हमें तोड़नी होगी।" उन्होंने कहा कि लिंग आधारित हिंसा को रोकने के लिए समाज में महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता और सम्मान की भावना को बढ़ाना होगा। यह तभी संभव हो सकता है जब समाज में बदलाव आए और हर व्यक्ति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को समझे।
मुख्यमंत्री ने शुरू किया 'हम होंगे कामयाब' अभियान
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से 'हम होंगे कामयाब' अभियान की शुरुआत की। इस अभियान के तहत घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, बाल विवाह जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह अभियान महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करेगा और समाज में लैंगिक समानता के महत्व को बढ़ावा देगा।
लैंगिक हिंसा का व्यापक प्रभाव
कार्यक्रम में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने लैंगिक हिंसा के मानसिक और आर्थिक प्रभावों पर भी बात की। उन्होंने कहा, "लैंगिक हिंसा केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका महिलाओं पर मानसिक और आर्थिक रूप से भी गहरा प्रभाव पड़ता है। महिला कामकाजी होने के बावजूद कभी-कभी आर्थिक हिंसा से जूझती हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि हिंसा के बारे में चर्चा तो की जाती है, लेकिन सबसे ज्यादा हिंसा घर के अंदर होती है, और यह हिंसा अक्सर महिलाओं द्वारा रिपोर्ट नहीं की जाती।
लिंग आधारित हिंसा के कारण और समाधान
कार्यक्रम में प्रमुख सचिव महिला बाल विकास रश्मि अरुण शमी ने कहा, "लिंग आधारित हिंसा के कई कारण हैं, जैसे सामाजिक और सांस्कृतिक मान्यताएं और शक्ति असंतुलन।" उन्होंने बताया कि विभाग ने कई योजनाएं लागू की हैं, जो लिंग आधारित हिंसा को रोकने और पीड़ितों को सहारा देने के लिए हैं। रश्मि अरुण शमी ने यह भी बताया कि महिलाओं को जागरूक करना तो आवश्यक है, लेकिन इससे कहीं ज्यादा पुरुषों को जागरूक करने की आवश्यकता है ताकि वे भी इस दिशा में अपनी जिम्मेदारी समझें।
पुरुषों के साथ संवाद की आवश्यकता
आयुक्त महिला बाल विकास सूफिया फारूकी वली ने कार्यक्रम में कहा, "महिलाओं के विषय पर बातचीत के लिए पुरुषों से भी संवाद जरूरी है।" उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पुरुषों को भी इस विषय पर जागरूक करना आवश्यक है, क्योंकि किसी भी समाज में लैंगिक हिंसा के समाधान के लिए पुरुषों की भी भागीदारी जरूरी है।
इस कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार और सम्मान के साथ जीवन जीने की दिशा में एक नया कदम उठाने का आह्वान किया गया। मंत्री निर्मला भूरिया और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि समाज में लिंग आधारित हिंसा के खिलाफ एक व्यापक आंदोलन की आवश्यकता है, जो हर स्तर पर परिवर्तन लाने के लिए कारगर साबित हो सके।












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