MP: अच्छी तरह देखकर लें 200 के नोट, सतना GRP पुलिस ने किया बड़ा खुलासा

सतना, 27 सितंबर। जिले में एक बार फिर नकली करेंसी पकड़ी गई है। इस पूरे मामले के तार उन बदमाशों से जुड रहे हैं जो पिछले वर्ष जाली करेंसी छापने और शहर में खपाने के आरोप में पकड़े गए थे या अभी भी फरार चल रहे हैं। सतना में बीते 7 वर्षों में नकली नोट के चार रैकेट पकड़े जा चुके हैं। इस बार जाली नोट चलाने के दौरान एक गिरोह के तीन आरोपी राजकीय रेल पुलिस जीआरपी के हत्थे चढ़े हैं।

जानें पूरा मामला

जानें पूरा मामला

दरअसल, रविवार की रात सतना रेलवे स्टेशन के बाहर आरोपियों ने 1 गोमती दुकानदार से 20 रुपए का गुटखा खरीदा और 200 का नकली नोट थमा दिया था। गोमती वाले की सूझबूझ से तीनों कुछ देर बाद पकड़े गए।

जीआरपी चौकी जीपी मिश्रा के अनुसार


जीआरपी चौकी प्रभारी जीपी मिश्रा ने खुलासा करते हुए बताया कि नकली नोट मिलने पर गोमती दुकानदार राधेश्याम खटिक को नकली नोट का एहसास हुआ और वह पैसे फुटकर कराने का बहाना कर आरोपियों की नजर से ओझल होकर नोट को चेक किया। उसने आरोपियों से दूसरा नोट मांगा तो उसे उसी तरह के कई नोट दिखाए गए। दुकानदार द्वारा शक किए जाने पर तीनों मौके से खिसक गए। दुकानदार ने इसकी जानकारी जीआरपी को दी। इसके बाद युवकों को कुछ देर बाद अंधेरी पुलिया से पकड़ लिया गया।

नकली नोट के साथ गए थे प्रयागराज

नकली नोट के साथ गए थे प्रयागराज

पूछताछ में जीआरपी को पता चला है कि पहले प्रयागराज में नकली नोट चलाने की प्लानिंग थी। अनीष, रवि नाबालिग 23 सितम्बर को झोले में नकली नोट भरकर प्रयागराज नकली करंसी चलाने के इरादे से गए थे। रविवार की रात रेल से सतना लौटे और स्टेशन के बाहर भी गुटखा खरीदने के लिए जाली नोट दिया। आरोपी अपने साथ प्रयागराज कितने जाली करेंसी ले गए और वहां किससे मिले, इसकी जानकारी जीआरपी जुटा रही है।आशंका जताई जा रही है कि पकड़े गए आरोपी नकली नोट के सप्लायर एजेंट हो सकते हैं, जिनका काम सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह नकली नोट पहुंचाना होता है।

जीआरपी ने जब्त किए नकली करेंसी

जीआरपी ने जब्त किए नकली करेंसी

जीआरपी थाना प्रभारी जीपी त्रिपाठी ने आशा करते हुए जानकारी दी की आरोपियों के पास से 200-200 के 1270 यानी 25400 रुपए के जब्त नकली करेंसी में से कई नोट एक ही नंबर के मिले हैं। जब्त करेंसी देखकर कोई भी धोखा खा सकता है, क्योंकि असली नोट से मिलते जुलते हैं। नंबर के अलावा नकली नोट के रंग और कड़कपन में भी अंतर है, जिसे गौर से नहीं देखने पर कोई भी अंतर नहीं कर पाता। आरोपी भीड़भाड़ वाली दुकानों में नकली नोटों को खपाने के फिराक में रहते थे।

रामनगर के डागा गुलवार का है सरगना

रामनगर के डागा गुलवार का है सरगना

इस पूरे मामले का सरगना सतना जिले के ग्राम पंचायत डागा गुलवार का रहने वाला धीरज तिवारी पिता दिनेश तिवारी है। बताया गया कि आरोपियों को पूरे नकली नोट इसी ने दिए थे। नोट चलाने पर आरोपियों को धीरज ने कुछ परसेंटेज देने की बात कही थी। डागा गुलवार से वर्षा 2015 में पुलिस ने फेक करेंसी पकड़ी थी। तब 3 आरोपियों में धीरज तिवारी भी शामिल था, जो रेड के दौरान फरार हो गया था। उस दौरान सभी आरोपी मध्य प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ के शहरों में भी नकली नोट चलाते पाए गए थे। सरगना की गिरफ्तारी के लिए जिला पुलिस और सायबर सेल की मदद भी ली जा रही है।

इन आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

इन आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

फर्जी करेंसी चलाने वाले आरोपियों की पहचान रवि रावत पिता रामायण रावत निवासी गुलवार गुजारा व अनीष तिवारी पिता उदयभान तिवारी निवासी डागा, एक नाबालिग के रूप में हुई। तीनों रामनगर थाना क्षेत्र के हैं। आरोपियों को डागा पंचायत निवासी धीरज तिवारी ने फर्जी करेंसी बाजार में चलाने के लिए दिए थे। जीआरपी ने रात में ही उसके गांव में दबिश लेकिन वह फरार हो गया। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ धारा 489ख आइपीसी का केस दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया है।

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