मध्य प्रदेश सरकार अब धान के साथ ही गेहूं नीलामी के मुद्दे को भी निपटाएगी
भोपाल, 14 जून। मध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी गई धान की मिलिंग के साथ-साथ गेहूं की नीलामी का मुद्दा भी कैबिनेट में विचार के लिए रखा जाएगा। दरअसल, प्रदेश के मिलर 50 रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि पर मिलिंग करने के लिए तैयार नहीं हैं। अन्य राज्यों के मिलर भी मिलिंग में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। वहीं, दो लाख टन गेहूं की नीलामी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसे खरीदने के लिए अब सिर्फ एक ही कंपनी मैदान में है। इसे गेहूं बेचा जाए या नहीं, इस पर अंतिम निर्णय कैबिनेट द्वारा लिया जाएगा।

प्रदेश में कमल नाथ सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2019-20 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 73.70 लाख टन गेहूं खरीदा था। इसमें से छह लाख 45 हजार टन गेहूं केंद्र सरकार ने यह कहते हुए सेंट्रल पूल में लेने से इन्कार कर दिया था कि राज्य सरकार ने प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा करके अनुबंध का उल्लंघन किया है।
बाद में सरकार बदलने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस गेहूं को सेेंट्रल पूल में लेने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह किया था, पर नीतिगत मामला होने की वजह से बात नहीं बनी। यही वजह है कि मार्च 2021 में कैबिनेट ने खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग को इस गेहूं को नीलाम करने की प्रक्रिया करने की अनुमति दी।
इससे संबंधित विषयों पर निर्णय लेने के लिए मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस की अध्यक्षता में समिति गठित की थी। समिति ने दो लाख टन गेहूं नीलाम करने के लिए न्यूनतम दर एक हजार 580 रुपये तय की। निविदा की शर्तों को लेकर सवाल उठे और अंत में सिर्फ आइटीसी कंपनी ही बची है। एक कंपनी होने की वजह से उसे गेहूं देना है या नहीं, इस पर विचार समिति करेगी और फिर यह मामला कैबिनेट में रखा जाएगा ताकि आगे कोई विवाद की स्थिति न बने। सरकार ने तय किया है कि इस बिक्री से निगम को जो नुकसान होगा, उसकी भरपाई राज्य सरकार करेगी।
मौजूदा प्रविधानों पर मिलिंग के लिए तैयार नहीं मिलर
उधर, धान की मिलिंग को लेकर भी समस्या बरकरार है। मिलर मिलिंग के मौजूदा प्रविधानों पर मिलिंग करने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि धान में टूटन ज्यादा है, जिसकी वजह से वे एक क्विंटल धान से 67 किलोग्राम चावल बनाकर नहीं दे सकते हैं। ऊपर से प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि भी कम है।
हालांकि, सरकार ने प्रोत्साहन राशि 25 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति क्विंटल कर दी पर मिलर इसके लिए तैयार नहीं हैं। मिलर एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष अग्रवाल का कहना है कि हमने नए सिरे से मिलिंग के लिए सरकार को अपनी ओर से रेट दे दिए हैं। इसको लेकर मंत्रिपरिषद की समिति विचार कर चुकी है और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ भी बैठक हो गई है। अब प्रोत्साहन राशि और मिलिंग से जुड़े अन्य मामलों पर निर्णय लेने के लिए प्रस्ताव कैबिनेट में रखा जाएगा।
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