MP News: घरेलू LPG सिलेंडर ₹50 महंगा: भोपाल में 858, इंदौर में 881, भिंड-मुरैना में सबसे ज्यादा 937 रुपये
मध्य प्रदेश में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी हो गई है। केंद्र सरकार ने घरेलू LPG सिलेंडर (14.2 किलो) की कीमत में ₹50 की बढ़ोतरी का ऐलान किया है, जो मंगलवार, 8 अप्रैल से लागू होगा।
यह बढ़ोतरी प्रदेश के लाखों परिवारों के किचन बजट पर असर डालेगी। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। इससे पहले, 8 मार्च 2024 को महिला दिवस के अवसर पर सरकार ने सिलेंडर की कीमतों में ₹100 की कटौती की थी, लेकिन अब ढाई महीने बाद ही कीमतें फिर बढ़ा दी गई हैं।

नए रेट के अनुसार घरेलू सिलेंडर की कीमतें, विभिन्न शहरों में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें अब इस प्रकार होंगी:
- भोपाल: ₹858
- इंदौर: ₹881
- ग्वालियर: ₹936
- जबलपुर: ₹859
- उज्जैन: ₹912
- मुरैना: ₹937 (प्रदेश में सबसे महंगा)
- भिंड: ₹936
ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, और अन्य शहरों में भी कीमतों में वृद्धि हुई है, लेकिन भिंड और मुरैना में सिलेंडर की कीमत सबसे अधिक है। इन शहरों में स्थानीय टैक्स और ट्रांसपोर्ट लागत के कारण सिलेंडर की कीमत अन्य शहरों से ज्यादा होगी। यह अंतर विभिन्न शहरों में अलग-अलग देखने को मिलता है।
कॉमर्शियल सिलेंडर में हाल ही में राहत
इसके विपरीत, हाल ही में कॉमर्शियल LPG सिलेंडर (19 किलो) की कीमतों में राहत दी गई थी। 1 अप्रैल को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने इनके दाम में ₹44.50 की कमी की थी। नए रेट के अनुसार:
- भोपाल: ₹1,767
- इंदौर: ₹1,800
- जबलपुर: ₹1,979.50
- ग्वालियर: ₹1,992
- उज्जैन: ₹1,934
कॉमर्शियल सिलेंडर में यह राहत मुख्य रूप से होटल, रेस्तरां और अन्य व्यवसायों के लिए दी गई थी, लेकिन अब घरेलू उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई कीमतों का बोझ उठाना पड़ेगा।
कीमतों में बढ़ोतरी की वजह
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (IOC, HPCL, BPCL) को लागत से कम कीमत पर सिलेंडर बेचने के कारण लगभग ₹41,000 करोड़ का घाटा हुआ है। यह घाटा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू स्तर पर सस्ते दामों के बीच के अंतर से उत्पन्न हुआ है। इस घाटे की भरपाई के लिए सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि जरूरी हो गई। हालांकि, विपक्ष और आम लोग इस बढ़ोतरी पर सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में हाल के दिनों में कोई बड़ी वृद्धि नहीं देखी गई है।
कैसे तय होती है LPG की कीमत?
LPG सिलेंडर की कीमत हर महीने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा तय की जाती है। इसके निर्धारण में पिछले महीने के अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस के मूल्य, रुपये-डॉलर का एक्सचेंज रेट, ट्रांसपोर्ट लागत, डीलर कमीशन और स्थानीय टैक्स को ध्यान में रखा जाता है। इसके बाद सब्सिडी और गैर-सब्सिडी वाले सिलेंडर की खुदरा कीमत तय की जाती है। यदि कोई उपभोक्ता सब्सिडी वाले सिलेंडर का इस्तेमाल करता है, तो उसे यह अंतर सीधे सरकार के जरिए बैंक खाते में मिल जाता है। हालांकि, गैर-सब्सिडी वाले सिलेंडर की पूरी कीमत उपभोक्ता को चुकानी पड़ती है।
मध्य प्रदेश में उज्ज्वला योजना के तहत लाभार्थियों को भी इस बढ़ोतरी का सामना करना होगा, हालांकि उनकी सब्सिडी पहले की तरह जारी रहेगी। इसके बावजूद, यह बढ़ोतरी गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए आर्थिक बोझ का कारण बनेगी।
लोगों की प्रतिक्रिया
इस बढ़ोतरी से आम लोग नाखुश हैं और इसकी आलोचना कर रहे हैं। भोपाल की गृहिणी राधा शर्मा ने कहा, "पहले ही खाने-पीने की चीजें महंगी हो चुकी हैं, अब गैस भी महंगी हो गई। सरकार को आम आदमी की जेब का भी ध्यान रखना चाहिए।" वहीं, इंदौर के व्यापारी राकेश जैन का कहना है, "कॉमर्शियल सिलेंडर सस्ता करके कुछ राहत दी थी, लेकिन घरेलू सिलेंडर महंगा करना समझ से परे है।"
महंगाई की मार झेल रहे लोग इस बढ़ोतरी से और परेशान हैं। अब किचन बजट को लेकर परिवारों में ज्यादा चिंता सता रही है, क्योंकि यह बढ़ोतरी उन परिवारों के लिए और भी मुश्किलें पैदा करेगी, जो पहले से ही महंगाई से जूझ रहे हैं।
क्या है भविष्य की स्थिति?
मौजूदा स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो मई में कीमतों की समीक्षा की जा सकती है, और संभव है कि उपभोक्ताओं को राहत मिले। हालांकि, फिलहाल मध्य प्रदेश के लोगों को बढ़ी हुई कीमतों के साथ गुजारा करना होगा। इस बढ़ोतरी से प्रभावित होने वाले उपभोक्ताओं की उम्मीदें अब अगले महीने की कीमत समीक्षा पर टिकी हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में स्थिरता का न होना और घरेलू बाजार में गैस के दामों का बढ़ना, सरकार की ओर से आने वाले समय में राहत की उम्मीद को धूमिल करता है।
मध्य प्रदेश में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी का असर राज्य के लाखों परिवारों के बजट पर पड़ेगा। यह बढ़ोतरी विशेष रूप से उन लोगों के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण होगी, जो पहले से ही बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं। अब सभी की नजरें आगामी महीनों में तेल की कीमतों पर रहेंगी, ताकि यह देखा जा सके कि क्या सरकार आने वाले समय में इस स्थिति को सुधारने के लिए कोई कदम उठाती है या नहीं।












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