MP News: भोपाल में तहसीलदारों का ‘न्यायिक बनाम गैर-न्यायिक’ संग्राम, 6 दिन से ठप काम, 3,000 केस अटके
मध्य प्रदेश के राजस्व विभाग में इन दिनों एक अजीब-सी लड़ाई छिड़ी है। लड़ाई किसी जमीन, पट्टे या सीमांकन की नहीं... बल्कि खुद तहसीलदार और नायब तहसीलदार बनाम सरकार की है।
मामला है न्यायिक और गैर-न्यायिक कार्यों के बंटवारे का। सरकार ने सोचा-"काम बांट देंगे तो आसानी होगी"। लेकिन अधिकारियों का कहना है-"इससे तो और गड़बड़ हो गई!"

क्यों नाराज हैं राजस्व अधिकारी?
नई व्यवस्था के मुताबिक कुछ तहसीलदार सिर्फ कोर्ट और सुनवाई वाले काम देखेंगे, बाकी को फील्ड के काम-जैसे सर्वे, सीमांकन, नामांतरण। भोपाल की बैरागढ़, कोलार, एमपी नगर, शहर वृत्त, बैरसिया और टीटी नगर तहसीलों में ये नया सिस्टम लागू भी हो गया है।
राजस्व अधिकारी संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह चौहान का कहना है- "एक ही अधिकारी दोनों तरह के काम करता आया है। अब अचानक आधा काम छीन लेना और आधा दे देना, न तो हमारे लिए आसान है और न जनता के लिए फायदेमंद।"
आम जनता की परेशानी
भोपाल में रोजाना करीब 500 राजस्व मामले दर्ज होते हैं-नामांतरण, सीमांकन, फौती नामांतरण, जाति व आय प्रमाण पत्र, EWS सर्टिफिकेट। तहसीलदार रोज 300 केसों की सुनवाई करते हैं। हड़ताल के 8 दिन में 3,000 केस पेंडिंग हो गए, 600 से ज्यादा सुनवाइयां टल गईं। रमेश साहू जैसे लोग तहसील के चक्कर काटते थक गए- "एक हफ्ते से नामांतरण कराना है, लेकिन दरवाज़ा खुला है... काम बंद है!"
15 अगस्त को 'ब्रेक'
संघ ने साफ किया है-स्वतंत्रता दिवस पर कोई विरोध नहीं। सभी अधिकारी ध्वजारोहण और राष्ट्र से जुड़े कर्तव्यों में हिस्सा लेंगे। लेकिन 16 अगस्त से फिर 'ऑफिस बंद, विरोध चालू'।
सरकार और राजनीति का पेंच
कांग्रेस ने इसे सरकार की नीतिगत विफलता कहा, बीजेपी का दावा-"जल्दी समाधान होगा"। अंदर की खबर ये है कि राजस्व मंत्री और अधिकारियों के बीच बातचीत हुई, लेकिन नतीजा-शून्य।
असर सिर्फ भोपाल तक नहीं
इंदौर, उज्जैन समेत कई जिलों में काम ठप। कोर्ट की पेशियां टाल दी गईं, फील्ड सर्वे रुके, भूमि रिकॉर्ड अपडेट अटके।
आगे क्या?
सरकार कह रही है-"हम समीक्षा कर रहे हैं"। लेकिन जब तक कोई ठोस फैसला नहीं आता, आम जनता को तहसील के चक्कर और इंतज़ार-दोनों झेलने पड़ेंगे।












Click it and Unblock the Notifications