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MP News: इंदौर दूषित जल कांड में कैसे हुआ मोहन सरकार का बड़ा एक्शन, निगम कमिश्नर हटे, दो अफसर सस्पेंड

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले ने अब प्रशासनिक और सियासी भूचाल का रूप ले लिया है। लगातार बढ़ते दबाव, हाईकोर्ट की सख्ती और जन आक्रोश के बीच मोहन सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए इंदौर नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव को पद से हटा दिया है। वहीं, एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और जल वितरण विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है, जब भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से 15 मौतों के दावे सामने आ चुके हैं, जबकि सरकार हाईकोर्ट में अब भी सिर्फ 4 मौतों की पुष्टि कर रही है। इसी विरोधाभास ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

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पहले नोटिस, फिर सस्पेंशन... 48 घंटे में बदली तस्वीर

इस बड़े एक्शन से पहले शुक्रवार दोपहर सरकार ने नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव और एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

रोहित सिसोनिया का तबादला कर दिया गया था।

एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस ले लिया गया था।

लेकिन जैसे-जैसे मामले ने तूल पकड़ा, सरकार को कड़े कदम उठाने पड़े। देर रात जारी आदेश में कमिश्नर को हटाने और दो वरिष्ठ अधिकारियों को सस्पेंड करने का फैसला लिया गया।

निगम में नए चेहरे, नई जिम्मेदारी

सरकार ने इंदौर नगर निगम में तीन नए अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी है, ताकि प्रशासनिक कामकाज पर नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

नए अपर आयुक्त बनाए गए हैं-

  • आकाश सिंह (CEO, जिला पंचायत खरगोन)
  • प्रखर सिंह (CEO, जिला पंचायत आलीराजपुर)
  • आशीष कुमार पाठक (उप परिवहन आयुक्त, इंदौर)

सरकार का दावा है कि नए अधिकारियों की तैनाती से व्यवस्थाओं में तेजी से सुधार होगा और जल आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा।

हाईकोर्ट में सरकार का दावा: "सिर्फ 4 मौतें"

शुक्रवार को ही राज्य सरकार ने इंदौर हाईकोर्ट में 39 पन्नों की स्टेटस रिपोर्ट पेश की। इसमें कहा गया कि दूषित पानी से केवल 4 लोगों की मौत हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार-

  • सभी मृतकों की उम्र 60 वर्ष से अधिक थी।
  • उर्मिला की मौत 28 दिसंबर
  • तारा (60) और नंदा (70) की मौत 30 दिसंबर
  • हीरालाल (65) की मौत 31 दिसंबर को हुई।

हालांकि, यह रिपोर्ट तब सामने आई है, जब मृतकों के परिजन, स्थानीय लोग और अस्पतालों के रिकॉर्ड के आधार पर 15 मौतों की जानकारी सार्वजनिक हो चुकी है।

आंकड़ों का टकराव: सच क्या है?

  • यही आंकड़ों का अंतर अब सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
  • एक तरफ परिजन और अस्पताल 15 मौतों की बात कर रहे हैं।
  • दूसरी तरफ सरकार हाईकोर्ट में सिर्फ 4 मौतों को स्वीकार कर रही है।

इस विरोधाभास पर विपक्ष ने सरकार पर "सच छिपाने" का आरोप लगाया है, वहीं सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार आयोग ने भी मामले में हस्तक्षेप किया है।

अगली सुनवाई 6 जनवरी को, बढ़ सकती है सख्ती

1 जनवरी को हाईकोर्ट ने सरकार को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। पांच दिन बाद दाखिल रिपोर्ट ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब 6 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि कोर्ट मौतों के आंकड़े, मुआवजे और जिम्मेदारी तय करने को लेकर और सख्त रुख अपना सकता है।

कार्रवाई हुई, लेकिन सवाल बाकी

इंदौर दूषित जल कांड में अधिकारियों पर गिरी गाज से यह साफ है कि सरकार दबाव में है और संदेश देना चाहती है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। लेकिन असली सवाल अब भी कायम है-

  • मौतें 4 हैं या 15?
  • जिम्मेदार कौन है?
  • और क्या पीड़ित परिवारों को सच और न्याय दोनों मिल पाएंगे?

इन सवालों के जवाब अब हाईकोर्ट और आने वाली जांच रिपोर्टों से तय होंगे।

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