Flashback 2022 : भोपाल की वो घटनाएं जिसकी दुनिया भर में हुई चर्चा,जानें जिंदा समाधि लेने वाले बाबा के बारे में

भोपाल में भूमिगत समाधि लेने वाले बिजासन मंदिर के महाराज स्वामी पुरुषोत्तम तीन बाद पूरी तरह से स्वस्थ बाहर निकले थे। महाराज को जमीन के अंदर से बाहर निकलते देखने के लिए मंदिर के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई थी।

भोपाल में जिंदा समाधि लेने वाले बाबा के बारे में जानें

Flashback 2022 : भारत में अक्सर जब कभी अजीबोगरीब घटना होती है, तो ऐसी घटनाओं को कवर करने के लिए लोकल मीडिया नहीं पूरे देश का मीडिया इकट्ठा हो जाता है, ऐसा ही कुछ साल 2022 के अक्टूबर माह में राजधानी भोपाल में देखने को मिला था। जब 3 दिनों तक भूमिगत समाधि लेने वाले भद्रकाली बिजासन मंदिर के महाराज स्वामी पुरुषोत्तम 3 अक्टूबर को पूरी तरह से स्वस्थ बाहर निकले थे महाराज को जमीन के अंदर से बाहर निकलते देखने के लिए मंदिर के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई थी। चारों तरफ मीडिया के कैमरे और लोग ही लोग नजर आ रहे थे। अक्टूबर के महीने में ही नवरात्रि का त्यौहार चल रहा था ऐसे में पुजारी बाबा का जिंदा समाधि लेना और 3 दिन बाद पूरी तरह से स्वस्थ बाहर निकल जाना चर्चा का विषय बन गया था। आपको बताते हैं कि प्रशासन की मनाई के बाद बाबा ने कैसे भूमिगत समाधि ले ली और इससे पहले बाबा ने और कौन सी समाधि ली थी।

महाराज ने कब ली थी जिंदा भूमिगत समाधि

महाराज ने कब ली थी जिंदा भूमिगत समाधि

बता दे 1 अक्टूबर की सुबह 10 बजे स्वामी पुरुषोत्तम आनंद महाराज ने 7 फीट गहरे 5 चौडे गड्ढे में भूमिगत समाधि ली थी। प्रशासन के समझाने के बाद भी महाराज नहीं माने और उन्होंने समाधि ले ली थी। उन्होंने कहा था कि वे 3 दिन की समाधि के बाद घर आएंगे और ऐसा ही हुआ 3 अक्टूबर को महाराज तब इस स्थल के गड्ढे से बाहर आए तो पूरी तरह सुरक्षित निकले। इसके बाद मंदिर चारों ओर महाराज के जयकारों की गूंज है।

7 फीट गहरा खुदवाया था गड्ढा

7 फीट गहरा खुदवाया था गड्ढा

महाराज ने भूमिगत समाधि लेने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए थे बकायदा 7 फीट गहरा गड्ढा खुदवाया था। इसके बाद बाबा 1 अक्टूबर को गड्ढे के अंदर बैठे थे। जिसके ऊपर लकड़ी के पटिए को रखकर उनको ढक दिया गया था। पटिये के ऊपर एक लाल कलर का कपड़ा बिछाया गया था। फिर उसके ऊपर मिट्टी डाल दी गई थी। 3 अक्टूबर को सबसे पहले मिट्टी हटाई गई, फिर लाल कपड़ा उठाया गया और फिर चार पटिए हटाए गए। तब महाराज की झलक देखने को मिली। 12 घंटे के अंदर ध्यान मुद्रा में बैठे हुए थे। उनकी झलक पाते ही उनके भक्त जयकारे के नारे लगाने लगे। भक्तों ने उन पर पुष्पा की वर्षा भी की। महाराज में बैठे बैठे सभी का हाथ जोड़कर अभिवादन किया इसके बाद महाराज सबसे पहले माता बिजासन मंदिर के दरबार में गए और उनका आशीर्वाद लिया।

मस्तिष्क पर सिर्फ माताजी का ही प्रभाव

मस्तिष्क पर सिर्फ माताजी का ही प्रभाव

समाधि से बाहर आने के बाद महाराज ने बताया था कि समाधि के समय जब वे गड्डे के अंदर थे तो उन्हें माता की कृपा से असीम शक्तियां प्राप्त हुई। उनके हृदय और मस्तिष्क पर सिर्फ माताजी का ही प्रभाव था। उन्होंने बताया कि इस दौरान माताजी ने साक्षात्कार उन्हें दर्शन दिए और उनसे कहा कि तुमने मेरे वचन का पालन किया है तुझे स्वर्ग लोक की यात्रा कराती हूं। हालांकि महाराज ने समाधि लेने से पहले ही बातचीत में बताया था कि समाधि के दौरान भगवान और भक्त एक दूसरे के निकट हो जाते हैं। इसलिए मैं भूमिका समाधि ले रहे थे।

1985 में कर चुके थे अग्नि स्नान

1985 में कर चुके थे अग्नि स्नान

बता दे भूमिगत समाधि लेने वाले ये महाराज पुरुषोत्तम आनंद 1985 में अग्नि स्नान भी कर चुके हैं। उन्होंने भोपाल के सोमवारा चौक पर अग्नि स्नान किया था यानी शरीर पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली थी और वे इसे भी अपनी सिद्धि का ही एक हिस्सा मानते है। उन्होंने बताया कि तब वे 80% तक जल गए थे, लेकिन उनके शरीर पर आज भी एक निशान जलने का नहीं है। वे इसे माता की कृपा बताते हैं।

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