IAS Neha Marvya की Whatsapp पोस्ट वायरल, CM शिवराज के प्रमुख सचिव पर लगाए ये गंभीर इल्जाम

भोपाल, 16 जुलाई। मध्य प्रदेश कैडर में पूर्व विधायक से भिड़ने वालीं आईएएस निधि सिंह के बाद अब एक और महिला आईएएस नेहा मारव्या सुर्खियों में है। वजह है कि आईएएस नेहा मारव्या की व्हाट्सएप पोस्ट, जो उन्होंने मध्य प्रदेश की महिला आईएएस अधिकारियों के व्हाट्सएप ग्रुप में डाली है।

आईएएस नेहा मारव्या का नया विवाद

आईएएस नेहा मारव्या का नया विवाद

आईएएस नेहा मारव्या ने अपनी व्हाट्सएप पोस्ट में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी को लेकर कई बातों का जिक्र करते हुए यहां तक लिखा दिया कि अब चुप रही तो एक महिला, आईएएस और इंसान होने के नाते शर्म आएगी।

 कौन हैं आईएएस नेहा मारव्या?

कौन हैं आईएएस नेहा मारव्या?

बता दें कि नेहा मारव्या मध्य प्रदेश कैडर में साल 2011 की आईएएस अफसर हैं। साल 2013 से 2014 तक इनकी जबलपुर में पोस्टिंग रही। इन्होंने वहां SDM और जिला पंचायत CEO पद पर सेवाएं दी। नेहा मारव्या जब प्रभारी कलेक्टर थी तो उनका खेल मंत्री यशोधरा राजे से विवाद सीएमओ तक पहुंच गया था।

आईएएस नेहा मारव्या की व्हाट्सएप पोस्ट

आईएएस नेहा मारव्या की व्हाट्सएप पोस्ट

आईएएस नेहा मारव्या ने अफसरों के व्हाट्सएप ग्रुप में लिखा कि 'यह पहला मौका है जब यह ग्रुप में मैं अपनी बात शेयर कर रही हूं। यदि मैंने अब भी शेयर नहीं किया और चुप रही तो महिला, आईएएस और मानव होने के नाते शर्म आएगी। यह ग्रुप महिला आईएएस अधिकारियों का है इस वजह से वे मुझे अच्छे से गाइड कर सकेंगी और मेरी मदद भी कर सकेंगी। मैं मनरेगा में एडिशनल सीईओ के तौर पर पदस्थ थी। 4 जुलाई से 7 जुलाई तक अवकाश पर थी। 7 जुलाई की शाम को मुझे सामान्य प्रशासन विभाग के उप सचिव की ओर से कॉल आया कि मेरा तबादला राजस्व विभाग में उप सचिव के तौर पर कर दिया है।

 मनरेगा से रिलीव होने पहुंची तो...

मनरेगा से रिलीव होने पहुंची तो...

8 जुलाई को मैं मनरेगा से रिलीव होने पहुंच गई। वहां से प्रक्रिया पूरी कर वल्लभ भवन पहुंच गई। जब मैं मुख्यमंत्री और राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी के चैंबर में गई तो उन्होंने मुझसे कहा कि मैं उनके चैंबर में नहीं आ सकती हूं। उनके पास मुझे देने के लिए कोई काम भी नहीं है। मैंने तुम्हें सुधारने के लिए मेरे अंडर में रखा है। अब मैं तुम्हें देखता हूं। मैंने जब उनसे अपनी गलती पूछी तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। फिर मुझसे कहा कि मुझे बोलने का कोई हक नहीं है। फिर मैंने उनसे निवेदन किया कि मनरेगा के वाहन से मैं आई थी वो मैंने वापस कर दिया है। लिहाजा, मुझे किसी वाहन से घर भिजवा दें तो उन्होंने वाहन देने से इनकार कर दिया। जब मैंने उनसे पूछा कि मैं घर कैसे जाउंगी तो उन्होंने बोला कि स्टाफ से पूछ लो कि वो लोग वल्लभ भवन से घर कैसे जाते हैं?

पीए के सामने बोले गेटआउट...

पीए के सामने बोले गेटआउट...

इसके बाद उन्होंने अपने पीए को बुलाकर मुझे उसके सामने जलील करते हुए मुझे गेटआउट कहा। इसके बाद उप सचिव ने मेरे लिए वाहन उपलब्ध कराने की कोशिश तो प्रमुख सचिव ने उसे भी फटकार लगाकर ऐसा करने से रोक दिया। अब मुझे क्या इस मामले में चुप रहना चाहिए। जब पीएस के पास मेरे लिए कोई काम नहीं था तो उन्होंने मुझे अपने अंडर में क्यों बुलवाया? क्या उन्होंने मुझे प्रताड़ित करने के लिए रखा है? राजस्व विभाग में मेरे कोई कॉल रिसीव नहीं कर रहा है? न कोई मैसेज के जवाब दे रहा है और न कोई वाहन दिया गया है? वल्लभ भवन के सुरक्षा गार्ड मुझे घर छोड़ने जा रहे हैं? मेरे पास अब कहने के लिए कुछ नहीं बचा है. बहुत दुखद है?'

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