Bhopal News: जानिए कैसे फर्नीचर कारोबार के नाम पर संचालित अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स रैकेट का हुआ भंडाफोड़
भोपाल के बगरौदा गांव में स्थित एक फैक्ट्री में चल रहे फर्नीचर कारोबार के नाम पर अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स रैकेट का खुलासा हुआ है। आरोपियों ने फैक्ट्री को लकड़ी पर पॉलिश बनाने के बहाने किराए पर लिया था, जबकि असलियत में वहां ड्रग्स का निर्माण किया जा रहा था। इस कार्रवाई से न केवल स्थानीय पुलिस बल्कि एटीएस और एनसीबी की टीम भी चौंक गई।
यह मामला तब सामने आया जब गुजरात एटीएस और एनसीबी की 15 सदस्यीय टीम ने फैक्ट्री पर दबिश दी। इस कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री के बाहर कटारा हिल्स पुलिस तैनात थी। शनिवार दोपहर 12 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई में अधिकारियों को ड्रग्स बनाने के केमिकल को तौलते हुए 907 किलो की मात्रा तक पहुँचने का पता चला। यह कार्रवाई रात करीब नौ बजे तक चलती रही।

ड्रग्स की कीमत और गिरफ्तारियां
पुलिस ने फैक्ट्री से 1814.18 करोड़ रुपये की ड्रग्स बरामद की हैं। इस दौरान अमित प्रकाशचंद्र चतुर्वेदी और सान्याल बाने नाम के दो लोग गिरफ्तार किए गए। फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूरों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया, क्योंकि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि फैक्ट्री में ड्रग्स तैयार हो रहे थे।
आरोपियों का नेटवर्क और क्रिप्टो करेंसी का उपयोग
जांच में पता चला है कि यह ड्रग्स तस्करी का इंटरनेशनल नेटवर्क जेल में तैयार हुआ था। आरोपियों ने ड्रग्स खरीदने के लिए क्रिप्टो करेंसी का भी इस्तेमाल किया, जिससे यह मामला और भी जटिल हो गया।

अमित प्रकाशचंद्र चतुर्वेदी की पृष्ठभूमि
गिरफ्तार आरोपी अमित प्रकाशचंद्र चतुर्वेदी एक साइंस ग्रेजुएट है, जिसने पहले प्राइवेट नौकरी की थी। इसके बाद उसने दो बार अपना अलग व्यवसाय शुरू किया, लेकिन दोनों बार उसे असफलता का सामना करना पड़ा। पूछताछ के दौरान चतुर्वेदी ने बताया कि उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि उसकी फैक्ट्री में तैयार होने वाला केमिकल नशे के लिए इस्तेमाल होता है।
सान्याल बाने का आपराधिक इतिहास
आरोपी सान्याल बाने का पूर्व में एनडीपीएस एक्ट के तहत एक केस में पांच साल की सजा हुई थी, जिसे उसने ऑर्थर रोड जेल, मुंबई में काटा था। चतुर्वेदी ने बताया कि उसकी सान्याल से पहली मुलाकात मुंबई में एक दोस्त के जरिए हुई थी, और इसके बाद दोनों नासिक में कई बार मिले।

जेल में ड्रग्स तस्करों से संपर्क
सजा के दौरान सान्याल ने मुंबई की ऑर्थर जेल में कई राज्यों के ड्रग्स तस्करों से मुलाकात की। इनमें तुषार गोयल नाम का कुख्यात तस्कर भी शामिल था, जो दिल्ली का रहने वाला था, लेकिन उसके कई ठिकाने पंजाब, हरियाणा, नेपाल और गुजरात में थे। इसी नेटवर्क के माध्यम से सान्याल को एमडी ड्रग्स की तस्करी का रास्ता मिला, और इससे पहले वह कोकीन और चरस जैसे मादक पदार्थों का कारोबार करता रहा था।
फैक्ट्री की स्थापना का प्लान
जेल में रहते हुए, सान्याल ने प्रकाशचंद्र को फैक्ट्री शुरू कराने की योजना बनाई। प्रकाश एक ऐसा व्यक्ति था जो खास काम नहीं कर रहा था, लेकिन उच्च जीवनशैली का शौक रखता था। सान्याल ने इस बात का फायदा उठाते हुए अपने गुर्गे और केस के तीसरे आरोपी हरीश आंजना को प्रकाश के पास पहुंचाया। हरीश और सान्याल दोनों ऑर्थर रोड जेल में साथ थे। हरीश ने प्रकाशचंद्र को शॉर्टकट से अमीर बनने का सपना दिखाया, जिससे वह सान्याल के प्लान का हिस्सा बना।
फैक्ट्री का किराया और जमीन का चयन
सान्याल के निर्देश पर, हरीश ने प्रकाश को भोपाल के आउटर में फैक्ट्री के लिए जमीन तलाशने को कहा। इसके बाद प्रकाश ने बगरौदा में जयदीप सिंह की फैक्ट्री को किराए पर लिया। इस फैक्ट्री का अलॉटमेंट एके सिंह नाम के व्यक्ति के पास था, जिसे बाद में जयदीप ने खरीद लिया था।












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