MP वक्फ बोर्ड के चुनाव पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने जताई थी आपत्ति
हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश के जरिए मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड भोपाल के चुनाव पर रोक लगा दी है।
भोपाल, 7 सितंबर। हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश के जरिए मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड भोपाल के चुनाव पर रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमथ में न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की युगल पीठ ने मनोनीत सदस्य महबूब हुसैन व शिया दाऊदी बोहरा समाज दावते हडिया मुंबई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

बता दे एमपी वक्फ बोर्ड के चुनाव कराने को लेकर भोपाल के मुजफ्फर नईम अब्दुल रफीक कुरैशी समेत अन्य की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई रही। इससे पहले कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने जबलपुर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कही थी शुक्रवार को उन्होंने पूरे गड़बड़ी को लेकर कोर्ट जाने के लिए भी कहा था। उन्होंने बताया था कि बिना निर्वाचन के वक्फ बोर्ड में नियुक्तियां हुई है मुझे इसलिए जगह नहीं दी गई क्योंकि मैं भ्रष्टाचार का खुलासा करता।
आरिफ मसूद ने पूर्व मंत्री अकील को दी थी सलाह
विधायक आरिफ मसूद ने अपनी पार्टी के विधायक और पूर्व मंत्री आरिफ अकील को सलाह देते हुए कहा था कि भाजपा के रहमों करम पर न लें नियुक्ति हम बीजेपी के रहमों करम पर जिंदा नहीं है उन्होंने कहा था कि बोर्ड में नियुक्तियां नियम विरुद्ध की गई है। और इसके लिए उन्होंने आरोप भी लगाया था कि चुनाव के लिए नियुक्त अधिकारी खुद घोटाले में संलिप्त है।
बता दे कि बोर्ड का कार्यकाल दिसंबर 2019 को समाप्त हो गया था। 25 जनवरी 2022 को सरकार ने अंडरटेकिंग दी थी कि 5 माह में चुनाव कराएंगे। इसके बाद जब 28 जून को सरकार ने बताया कि मार्च में चुनाव अधिकारी नियुक्त कर दिया गया है। इसके बाद सरकार ने प्रक्रिया गति को देते हुए 5 अगस्त को अधिसूचना जारी की। इसके बाद महबूब हुसैन को रिकग्नाइड स्कॉलर इन सिया सुन्नी इस्लामिक थियोलॉजी की श्रेणी में सदस्य मनोनीत कर दिया। कोर्ट को बताया गया कि महबूब हुसैन इस संस्था के मध्य प्रदेश के प्रतिनिधि हैं। यह भी कहा गया कि वह सदस्य बनने के लिए अपात्र भी हैं।
यह पूरा मामला
लंबे समय तक वक्फ बोर्ड के चुनाव टलने के कारण हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई गई थी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने जून 2022 तक चुनाव कराने का आदेश दिया था। इसके लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। इसके तहत सदस्यों की नियुक्ति भी की गई। साथ ही निर्वाचन अधिकारी भी घोषित कर दिए गए। लेकिन इस पूरे मामले में वक्फ बोर्ड एक्ट नियमों का पालन ना होने से अलग-अलग शहरों से 7 याचिकाएं हाईकोर्ट में लगाई गई थी, जिसमें चुनाव प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी।












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